फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% हुई:खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर; इजराइल-ईरान जंग से ये और बढ़ सकती है

फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंच गई है। इससे पहले जनवरी में यह 2.74% थी। आज 12 मार्च को ये आंकड़े जारी किए गए हैं। महंगाई में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग चल रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह जंग लंबी चली तो कच्चे तेल के दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। इससे पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और फल-सब्जी समेत हर जरूरी सामान की कीमतें बढ़ जाएंगी।

खाने-पीने की चीजों के दाम चढ़ने से महंगाई बढ़ी

  • महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दामों का बढ़ना है। फूड इन्फ्लेशन फरवरी में बढ़कर 3.47% पर पहुंच गया। जनवरी में यह आंकड़ा केवल 2.13% था।
  • ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरों में महंगाई थोड़ी कम रही। ग्रामीण महंगाई जनवरी के 2.73% से बढ़कर 3.37% हो गई, जबकि शहरी महंगाई 2.75% से बढ़कर 3.02% रही।

नए तरीके से मापी जा रही महंगाई, OTT शामिल

यह महंगाई के नए फॉर्मूले (2024 बेस ईयर) के तहत जारी दूसरा आंकड़ा है। सरकार ने महंगाई नापने के बास्केट में भी बदलाव किया है। खाने-पीने की चीजों का वजन 45.9% से घटाकर 36.75% कर दिया गया है, जबकि हाउसिंग और बिजली-गैस का वजन बढ़ा दिया गया है।

  • क्या हटा: वीसीआर और ऑडियो कैसेट जैसे पुराने सामान हटा दिए गए हैं।
  • क्या जुड़ा: OTT सब्सक्रिप्शन, डिजिटल स्टोरेज जैसे खर्चे शामिल किए हैं।

RBI का अनुमान: 4% के पार जा सकती है महंगाई

रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए औसत महंगाई दर 2.1% रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि, अप्रैल-जून (Q1 FY27) की तिमाही में यह बढ़कर 4% और अगली तिमाही में 4.2% तक जा सकती है। फिलहाल महंगाई आरबीआई के तय लक्ष्य (4%) के भीतर ही है, जिससे बाजार को उम्मीद है कि नीतिगत दरों में तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।

नॉलेज बॉक्स: महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?

महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।

3.21% महंगाई दर का क्या मतलब है?

1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल)

जब हम कहते हैं कि फरवरी 2026 में महंगाई 3.21% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना फरवरी 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 3.21% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं:

  • किसी चीज़ के दाम बहुत ज्यादा बढ़े होंगे (जैसे चांदी के गहने 160% महंगे हुए)।
  • किसी ची के दाम घटे भी होंगे (जैसे लहसुन 31% सस्ता हुआ)।
  • जब इन सबको एक साथ मिलाया गया, तो औसतन खर्च 3.21% बढ़ गया।

2. ₹100 की चीज़ अब ₹103.21 की हो गई

इसका गणित बहुत सीधा है। अगर फरवरी 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन ₹100 में खरीदा था, तो वही सामान फरवरी 2026 में ₹103.21 का हो गया है।

E-Paper 2025