बांग्लादेश की 13वीं नेशनल पार्लियामेंट के नवनिर्वाचित सदस्यों ने मंगलवार को नेशनल पार्लियामेंट के साउथ प्लाजा में शपथ ली। सुबह करीब 10:42 बजे (स्थानीय समयानुसार) मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन ने सांसदों को शपथ दिलाई।
बांग्लादेशी मीडिया प्रथोम ओलो के मुताबिक, यह शपथ ग्रहण समारोह कड़ी सुरक्षा के बीच आयोजित हुआ, जिसमें 1,000 से ज्यादा स्थानीय और विदेशी मेहमान शामिल हुए। शपथ ग्रहण समारोह से पहले कुरान पढ़ी गई।
मुख्य समारोह शाम 4 बजे शुरू होगा। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन निर्वाचित प्रधानमंत्री तारिक रहमान और उनके शुरुआती मंत्रिमंडल को पद की शपथ दिलाएंगे।
शपथ ग्रहण समारोह के लिए 13 देशों को आधिकारिक न्योता भेजा गया है, जिनमें भारत, चीन, पाकिस्तान जैसे बड़े नाम शामिल हैं। भारत की ओर से लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जा रहे हैं। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिश्री भी शामिल होंगे।
रिफॉर्म काउंसिल मेंबर की शपथ नहीं लेंगे BNP सांसद
निर्वाचित सांसदों ने रिफॉर्म काउंसिल मेंबर के सदस्य के रूप में अलग से शपथ लेने से इनकार कर दिया है। BNP के स्टैंडिंग कमिटी सदस्य और सांसद सलाहुद्दीन अहमद ने बताया कि पार्टी के कोई भी सांसद इस परिषद के सदस्य के रूप में शपथ नहीं लेंगे।
वर्तमान संविधान में ऐसी किसी परिषद का कोई प्रावधान नहीं है और न ही कोई अलग शपथ का फॉर्मेट मौजूद है। उनका कहना है कि संसद सदस्य केवल संसद के लिए चुने गए हैं, संवैधानिक सुधार परिषद के लिए नहीं।
इस परिषद को वैध बनाने के लिए पहले संविधान में संशोधन करके इसे शामिल करना होगा, फिर संसद में इसे अपनाना होगा और उसके बाद ही शपथ का कोई कानूनी आधार बनेगा। यह परिषद जुलाई चार्टर के तहत संवैधानिक सुधारों को लागू करने के लिए बनाई गई है, जिस पर हाल ही में जनमत संग्रह हुआ था और इसे मंजूरी मिली।
योजना थी कि नए संसद सदस्य के साथ-साथ इस परिषद के सदस्य भी बनें और दोनों के लिए शपथ लें, लेकिन BNP ने इसे असंवैधानिक बताते हुए केवल संसद सदस्य की शपथ ली है।
BNP सुधारों में शामिल तो होना चाहती है, लेकिन तभी जब प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी रूप से मजबूत हो। यह BNP की सतर्क और सिद्धांतवादी पोजीशन दिखाता है, ताकि भविष्य में कोई कानूनी चुनौती न आए।
जुलाई चार्टर से प्रधानमंत्री की ताकत कम होने का खतरा
जुलाई चार्टर पूरी तरह लागू हो गया, तो प्रधानमंत्री की ताकत काफी हद तक घट सकती है। इस चार्टर का मकसद एकाधिकार खत्म करना और संतुलन बनाना है।
इसमें PM के लिए जीवनभर कुल 10 साल (या अधिकतम दो टर्म) की सख्त टर्म लिमिट लगाई गई है, ताकि कोई लंबे समय तक सत्ता में न रह सके।
PM पार्टी चीफ के पद के साथ नहीं रह सकता, इमरजेंसी घोषणा के लिए कैबिनेट और विपक्षी लीडर की लिखित सहमति जरूरी होगी, प्रेसिडेंट की भूमिका मजबूत होगी, जैसे कई स्वतंत्र संस्थाओं के प्रमुखों की नियुक्ति में प्रेसिडेंट को ज्यादा स्वतंत्र अधिकार मिलेंगे, जो पहले PM के प्रभाव में थे।
बाइकैमरल संसद (उपरी सदन) बनने से PM-केंद्रित नीचली सदन के फैसलों पर कंट्रोल लगेगा और कई संस्थाओं के लिए अलग सेलेक्शन कमिटी बनेंगी, जिससे PM का एकतरफा नियंत्रण कम होगा।
दो-तिहाई बहुमत के साथ सरकार बनाएगी BNP
BNP के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 300 सदस्यीय जातीय संसद में 212 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया है।
उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान अर्थव्यवस्था को स्थिर करने, महंगाई पर काबू पाने और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने को अपनी प्राथमिकता बताया था।
आज के समारोह के साथ अंतरिम प्रशासन से नई निर्वाचित सरकार को कार्यकारी अधिकारों का औपचारिक हस्तांतरण पूरा हो जाएगा।
तारिक रहमान ने दो जीती सीटों में से एक छोड़ा
BNP के चेयरमैन तारिक रहमान ने ढाका-17 सीट को अपने पास रखने और बोगरा-6 सीट को खाली करने का फैसला किया है। 13वीं संसदीय चुनाव में तारिक रहमान ने दोनों सीटों से भारी बहुमत से जीत हासिल की थी।
ढाका-17 से उन्होंने लगभग 72,699 वोट प्राप्त किए, जबकि बोगरा-6 से उन्होंने 216,284 वोट हासिल कर जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार अब्दुर रहमान सोहेल को बड़े अंतर से हराया था।
अब तारिक रहमान ने बांग्लादेश निर्वाचन आयोग (ईसी) को एक लिखित पत्र भेजकर बोगरा-6 सीट छोड़ने की औपचारिक घोषणा की है। ईसी के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने इसकी पुष्टि की है।
बांग्लादेश के नियमों (आरपीओ) के अनुसार, जब कोई सांसद दो सीटों से जीतता है और एक सीट छोड़ता है, तो उस खाली सीट पर उपचुनाव (by-election) कराना अनिवार्य होता है। इसलिए बोगरा-6 सीट पर अब उपचुनाव होगा, जिसे ईसी को 90 दिनों के अंदर आयोजित करना होगा।
इसके अलावा, शेरपुर-3 सीट पर भी मतदान होना है। मूल चुनाव (12 फरवरी 2026) में 300 में से 299 सीटों पर वोटिंग हुई थी, लेकिन शेरपुर-3 में एक वैध उम्मीदवार (जमात-ए-इस्लामी के) की मौत के कारण मतदान स्थगित कर दिया गया था। अब ईसी इस सीट पर सामान्य चुनाव कराएगा और इसका शेड्यूल जल्द जारी किया जाएगा।
हिंदू नेता को नई कैबिनेट में शामिल कर सकते हैं तारीक रहमान
BNP से 2 हिंदू सांसद भी चुने गए हैं। इनमें से ढाका-3 सीट से जीत दर्ज करने वाले गोयेश्वर चंद्र रॉय को नई कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। रॉय BNP के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। वह खालिदा जिया की BNP सरकार में लगभग 30 साल पहले (1991-1996) राज्य मंत्री थे।
बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, तारिक रहमान प्रधानमंत्री पद समेत रक्षा मंत्रालय और दूसरे पांच मंत्रालय अपने पास रख सकते हैं। संविधान के अनुच्छेद 148 के मुताबिक, आधिकारिक नतीजे आने के तीन दिन के भीतर निर्वाचित प्रतिनिधियों को शपथ लेनी होती है।
13वें संसदीय चुनाव के निर्वाचित सदस्य मंगलवार को शपथ लेंगे, जबकि कैबिनेट भी उसी दिन बाद में शपथ लेगी। यह जानकारी चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने शनिवार को प्रेस ब्रीफिंग में दी।
बांग्लादेश में 4 अल्पसंख्यक सांसद चुने गए, इनमें 2 हिंदू
बांग्लादेश के आम चुनाव में 4 अल्पसंख्यक समुदाय के उम्मीदवार सांसद चुने गए हैं। इनमें दो हिंदू, जबकि दो अन्य बौद्ध समुदाय से हैं।
हिंदू नेता में गोयेश्वर चंद्र रॉय और उनके समधी निताई रॉय चौधरी BNP की टिकट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। निताई रॉय चौधरी BNP के प्रमुख उपाध्यक्षों में शामिल हैं और शीर्ष नेतृत्व के वरिष्ठ रणनीतिक सलाहकार माने जाते हैं। दोनों ने जमात-ए-इस्लामी के प्रत्याशियों को हराया।
तीसरे अल्पसंख्यक सांसद साचिंग प्रू हैं, जो बंदरबन के पहाड़ी जिले से चुने गए। वे मरमा जातीय समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं और BNP के वरिष्ठ नेता हैं। चौथे विजेता दिपेन दीवान रंगामाटी सीट से जीते। वे चकमा समुदाय से आते हैं, जो बौद्ध बहुल जनजातीय समूह है।
30 से 40 सदस्यों की कैबिनेट बनाने की तैयारी में BNP
BNP के कई नीति-निर्माताओं ने संकेत दिया है कि कैबिनेट बहुत बड़ा नहीं होगा। इसमें 30 से 40 सदस्य शामिल हो सकते हैं। इसमें 2001 की BNP सरकार के पूर्व मंत्री, स्टैंडिंग कमेटी सदस्य और नए चेहरे शामिल हो सकते हैं।
तारिक रहमान ने कैबिनेट गठन को लेकर वरिष्ठ नेताओं से परामर्श शुरू कर दिया है। हालांकि, किसे कौन सा मंत्रालय मिलेगा, यह शपथ ग्रहण के बाद ही साफ होगा।
BNP की स्थायी समिति के सदस्य सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि देश को कैबिनेट का अंतिम स्वरूप देखने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।
पार्टी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को अगला राष्ट्रपति बनाया जा सकता है। हालांकि, नियुक्ति प्रक्रिया में समय लग सकता है। तब तक उनके किसी अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने की संभावना जताई जा रही है।
किन नामों पर चल रही चर्चा
विदेश मंत्री पद के लिए BNP के संयुक्त महासचिव हुमायूं कबीर का नाम चर्चा में है। पार्टी के अंतरराष्ट्रीय संबंध मजबूत करने में उनकी सक्रिय भूमिका रही है। डॉ. रेजा किब्रिया को वित्त मंत्री पद के लिए विचार किया जा रहा है। वे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में वरिष्ठ अर्थशास्त्री रह चुके हैं।
आमिर खुसरो महमूद चौधरी को वाणिज्य मंत्रालय दिया जा सकता है। वे पहले भी इस पद पर रह चुके हैं। BNP महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर का नाम स्थानीय सरकार मंत्रालय के लिए सामने आया है। वे पहले कृषि राज्य मंत्री और बाद में नागरिक उड्डयन एवं पर्यटन राज्य मंत्री रह चुके हैं।
पूर्व अटॉर्नी जनरल और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील मोहम्मद असदुज्जमान का नाम कानून मंत्रालय के लिए चर्चा में है। सलाहुद्दीन अहमद का नाम गृह मंत्रालय के लिए और मिर्जा अब्बास का नाम सड़क परिवहन एवं पुल मंत्रालय के लिए लिया जा रहा है।
डॉ. एजेडएम जाहिद हुसैन स्वास्थ्य मंत्रालय संभाल सकते हैं, जबकि रुहुल कबीर रिजवी को सूचना मंत्रालय की जिम्मेदारी मिल सकती है।
इसके अलावा नज्रुल इस्लाम खान, डॉ. अब्दुल मोयीन खान, गायेश्वर चंद्र रॉय, हाफिज उद्दीन अहमद, इकबाल हसन महमूद टुकू, सेलीमा रहमान, अंदलीव रहमान पार्थो, मिजानुर रहमान मिनू और शमा ओबैद सहित कई अन्य नामों पर भी चर्चा चल रही है।
मंत्रियों के चयन का प्रोसेस जानिए
पार्टी सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की अंतिम संरचना का फैसला BNP की स्थायी समिति और अध्यक्ष तारिक रहमान करेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में वे अंतिम सूची में कभी भी बदलाव कर सकते हैं।
मंगलवार सुबह मुख्य चुनाव आयुक्त एएमएम नासिर उद्दीन नव-निर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाएंगे। सांसदों के शपथ लेने के बाद सत्तारूढ़ दल और विपक्ष अलग-अलग बैठक कर अपने संसदीय नेता का चुनाव करेंगे। बहुमत दल का नेता इसके बाद बंगभवन जाकर राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन से मुलाकात करेगा।
राष्ट्रपति औपचारिक रूप से उसे सरकार बनाने का निमंत्रण देंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री पद के दावेदार मंत्रियों, राज्य मंत्रियों और उपमंत्रियों की सूची राष्ट्रपति को सौंपेंगे।
राष्ट्रपति सूची कैबिनेट डिवीजन को भेजेंगे, जो शपथ समारोह की तैयारी पूरी करेगा। कैबिनेट सचिव नामित मंत्रियों को व्यक्तिगत रूप से फोन कर शपथ समारोह में शामिल होने का निमंत्रण देंगे और उनके घरों पर आधिकारिक वाहन भेजे जाएंगे।