होली रंगों और पकवानों का त्योहार है। अक्सर त्योहारों में मावे की खपत कई गुना बढ़ जाती है। इसी का फायदा उठाकर मिलावटखोर बाजार में नकली और जहरीला मावा खपाने की कोशिश करते हैं। शुद्ध मावा दूध को घंटों जलाकर तैयार किया जाता है, लेकिन मुनाफा कमाने के लिए इसमें सिंथेटिक दूध, यूरिया, डिटर्जेंट और घटिया तेल मिला दिया जाता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार मिलावटी मावा खाने से न सिर्फ पाचन तंत्र बिगड़ता है, बल्कि यह किडनी और लिवर के लिए बहुत नुकसानदायक होता है। अक्सर लोग चमक और सस्ते दाम के लालच में आकर मिलावटी मिठाई खरीद लेते हैं, जिसके सेवन के बाद अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि आप मावा शुद्धता को कैसे पहचान सकते हैं, और साथ ही ये भी जानेंगे कि आप घर ही मावां प्योरिटी का जांच कैसे कर सकते हैं।
त्योहारों में बाजारों में क्यों बढ़ जाती है नकली मावा की खपत?
- होली जैसे बड़े त्योहारों पर मिठाइयों की खपत सामान्य दिनों से कई गुना तक बढ़ जाती है, जिसकी पूर्ति असली दूध के मावे से करना कठिन होता है।
- ऐसे में मुनाफाखोर कम लागत में अधिक उत्पादन के लिए केमिकल और स्टार्च का सहारा लेते हैं।
- बाजार में बढ़ती मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर का फायदा उठाकर नकली मावा गुपचुप तरीके से सप्लाई किया जाता है।