झालावाड़ के सरकारी स्कूल में हुए हादसे और जयपुर के प्राइवेट स्कूल में छात्रा अमायरा की मौत के बाद, राज्य सरकार स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त हो गई है। शिक्षा विभाग ने सरकारी और प्राइवेट स्कूलों की निगरानी के लिए ‘स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी’ (State School Standard Authority) बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। यह अथॉरिटी स्कूलों में शैक्षणिक व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं और छात्र सुरक्षा जैसे सभी पहलुओं पर नजर रखेगी।
स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी राज्य के एक लाख से अधिक सरकारी, निजी और प्राथमिक स्कूलों की निगरानी करेगी। अधिकारियों के अनुसार, इस अथॉरिटी का मुख्य उद्देश्य छात्र सुरक्षा सुनिश्चित करना, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और स्कूलों में बुनियादी मानकों का पालन करवाना है।
कई पहलुओं पर होगी नियमित जांच
सूत्रों ने बताया कि स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी स्कूलों के बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की योग्यता, सुरक्षा प्रोटोकॉल, छात्र-शिक्षक अनुपात और शैक्षणिक गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की नियमित जांच करेगा। स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के दिशानिर्देशों के आधार पर गठित किया जाएगा, ताकि शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप बनाया जा सके।
शिक्षा विभाग ने हाल ही किया 27 सदस्यीय समिति का गठन
राजस्थान में शिक्षा विभाग ने 27 सदस्यीय समिति का हाल ही में गठन किया था। समिति ने अन्य राज्यों में स्थापित स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी का अध्ययन किया। समिति ने राजस्थान के लिए विस्तृत ड्राफ्ट तैयार किया है। इस पर अंतिम निर्णय आगामी बैठकों में लिया जाएगा।
ड्राफ्ट में दिए ये सुझाव
ड्राफ्ट में यह सुझाव दिया गया है कि राज्य में सुरक्षा मानकों के अनुपालन, योग्य शिक्षकों की उपलब्धता, बुनियादी ढांचे की स्थिति और स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करने के लिए स्वतंत्र प्राधिकरण की आवश्यकता है। प्रस्तावित स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी इन सभी मुद्दों पर व्यवस्थित रूप से काम करेगा और स्कूल संचालन को पारदर्शी बनाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से राजस्थान की शिक्षा प्रणाली मजबूत होगी और स्कूलों में गुणवत्ता आधारित शिक्षा का वातावरण तैयार होगा।