बड़वानी जिले में मंगलवार को चंद्रग्रहण के चलते धार्मिक आस्था और परंपराओं का असर साफ देखने को मिल रहा है। ग्रहण के धार्मिक नियमों का पालन करते हुए जिले के तमाम छोटे-बड़े मंदिरों के कपाट अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।
शहर के प्रसिद्ध वैष्णो देवी मंदिर, श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मां कालिका माता मंदिर और संकट मोचन हनुमान मंदिर में सुबह से ही पट बंद रहे, जिसके कारण भक्तों ने बाहर से ही माथा टेका।
सूतक काल शुरू होते ही बंद हुए पट
मां कालिका माता मंदिर के पुजारी अशोक पंडित के अनुसार, चंद्रग्रहण का असर दोपहर 3:20 बजे से शुरू हो रहा है, लेकिन इसका सूतक काल 9 घंटे पहले यानी सुबह करीब 6:20 बजे से ही लग गया था।
इसी वजह से सुबह की पूजा के बाद मंदिरों के दरवाजे बंद कर दिए गए। धार्मिक मान्यताओं के चलते ग्रहण और सूतक काल की इस अवधि में देव प्रतिमाओं के दर्शन और स्पर्श को वर्जित माना जाता है, इसलिए मंदिर कमेटियों ने भक्तों को पहले ही इस बारे में सूचित कर दिया था।
शाम को शुद्धिकरण के बाद होंगे दर्शन
मंदिरों के पट शाम को करीब 7:30 बजे ग्रहण खत्म होने के बाद ही खोले जाएंगे। कपाट खुलने के तुरंत बाद मंदिरों में विशेष शुद्धिकरण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। पूरे मंदिर परिसर की साफ-सफाई कर भगवान की मूर्तियों पर गंगाजल का छिड़काव किया जाएगा।
इसके बाद विशेष आरती के साथ दर्शन की व्यवस्था फिर से शुरू होगी। शाम को आरती के समय मंदिरों में श्रद्धालुओं की खासी भीड़ उमड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
घरों में ही जारी रहा जप-तप
मंदिर बंद होने के कारण श्रद्धालुओं ने अपने घरों में ही रहकर भगवान का ध्यान और जप-तप किया। कई परिवारों में ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान और दान-पुण्य की तैयारियां भी की गई हैं।
दिनभर मंदिरों के बाहर सन्नाटा पसरा रहा, लेकिन लोगों में इस खगोलीय और धार्मिक घटना को लेकर काफी जागरूकता देखी गई। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोगों ने ग्रहण के नियमों का पूरी श्रद्धा के साथ पालन किया।