गरीब बच्चों के लिए एजुकेशन स्कीम लाकर ठगों ने राजस्थान-हरियाणा के 20 हजार लोगों से 400 करोड़ की ठगी कर ली। अब ऑफिस पर ताला पड़ा है और इंवेस्ट करने वाले न्याय के लिए भटक रहे हैं।
शातिर ठगों ने एजुकेशन स्कीम के जरिए पहले जाल फैलाया। गरीब बच्चों के लिए होम ट्यूशन टीचर के लिए आवेदन मांगे। अप्लाई करने वाले को प्रति बच्चे 1000 रुपए देने का लालच दिया।
ब्लॉक वाइज ग्रुप बनाकर लोगों को जोड़ने के लिए टीम लीडर और फील्ड मैनेजर भी बनाए। टारगेट पर कमनीशन और गिफ्ट का लालच दिया गया। फायदे की आस में लोग जुड़ते चले गए।
एजुकेशन सेक्टर में मदद के नाम पर इन्हीं लोगों से इंवेस्ट कराया गया। 1 लाख के इंवेस्ट पर 20 हजार हजार रुपए हर महीने का झांसा देकर रुपए जुटाए और स्कीम चलाने वाले फरार हो गए।
टोंक में सवाई माधोपुर पुलिया इलाके में ठगों ने ऑफिस खोल रखा था। 6 जून को इन्वेस्टर जब दफ्तर पहुंचे तो यहां ताला लगा था। फोन किया तो सभी संचालकों के नंबर बंद मिले। तब ठगी का एहसास हुआ।
पुलिस बोली-20 से ज्यादा लोग सामने आए
कोतवाली SHO भंवर लाल वैष्णव ने बताया- 8 जून अभी 20 से ज्यादा लोगों ने मामला दर्ज कराया। लगातार लोगों की शिकायतें मिल रही हैं। गिरफ्तारी के लिए दो पुलिस टीमें गठित की गई हैं।
जयपुर में होने की सूचना पर दबिश भी दी गई, लेकिन आरोपी हाथ नहीं लगे। पुलिस मामले की जांच कर रही है। एक आरोपी रहमान खान, झारखंड का रहने वाला है। अन्य दो आरोपी शिवेंद्र सिंह राजपूत और शिवेष शर्मा का भी पता लगाया जा रहा है।
पहले समझे… कैसे लोगों को झांसे में लिया
- सोसायटी के संचालकों ने लोगों को जोड़ने के लिए खुद को गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने वाली संस्था के रूप में पेश किया। लोगों को बताया गया कि वे होम ट्यूटर बनकर घर-घर बच्चों को पढ़ा सकते हैं और इसके बदले उन्हें हर महीने निश्चित पेमेंट मिलेगा।
- मेंबर बनने के लिए उनसे रजिस्ट्रेशन और विभिन्न स्कीम के नाम पर रकम जमा करवाई गई। साथ ही यह भरोसा दिलाया गया कि संस्था का काम तेजी से बढ़ रहा है और इससे जुड़ने वालों को रेगुलर मुनाफा मिलेगा। इसके अलावा लोगों को निवेश पर मोटा ब्याज और नए सदस्य जोड़ने पर आकर्षक बोनस का लालच दिया गया।
- शुरुआत में कुछ निवेशकों और ट्यूटरों को समय पर भुगतान कर उनका विश्वास जीता गया, जिससे वे अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों को भी संस्था से जोड़ने लगे। धीरे-धीरे यह नेटवर्क राजस्थान और हरियाणा के हजारों लोगों तक फैल गया और करोड़ों रुपए जमा हो गए। आरोप है कि मोटी रकम जुटाने के बाद संचालकों ने टोंक स्थित कार्यालय बंद कर दिया और फरार हो गए।
अब पढ़िए… सिलसिलेवार पूरा घटनाक्रम
होम ट्यूशन के नाम पर बनाया भरोसा, रजिस्ट्रेशन के जरिए जोड़े सदस्य
करीब एक साल पहले SBCP एज्युकेशन वेलफेयर सोसायटी के प्रतिनिधि टोंक पहुंचे। शहर से लेकर गांवों तक प्रचार शुरू किया। लोगों को बताया गया कि संस्था गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए होम ट्यूटर नियुक्त करेगी तथा प्रत्येक बच्चे पर हर माह एक हजार रुपए का भुगतान किया जाएगा।
इसके लिए इच्छुक लोगों से 4950 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस जमा करवाई गई। इसमें शुरुआत में सोसायटी ने होम ट्यूटरों को नियमित भुगतान किया, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ा और बड़ी संख्या में लोग संस्था से जुड़ते चले गए।
मोटे ब्याज और बोनस का लालच देकर करोड़ों रुपए जुटाए
भरोसा कायम होने के बाद सोसायटी ने निवेश योजनाएं शुरू कीं। लोगों को फिक्स डिपॉजिट पर बाजार से अधिक ब्याज देने और नए होम ट्यूटर जोड़ने पर प्रति सदस्य 150 रुपए बोनस देने का प्रलोभन दिया गया। एक लाख रुपए जमा कराने पर हर माह 20 हजार रुपए तक लाभ मिलने का दावा भी किया गया।
शुरुआत में बोनस और भुगतान समय पर होने से लोगों ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को भी जोड़ा। अधिक मुनाफे की उम्मीद में हजारों लोगों ने लाखों रुपए सोसायटी में निवेश कर दिए।
राजस्थान-हरियाणा तक फैला नेटवर्क, फरारी के बाद सामने आई ठगी
सोसायटी का नेटवर्क टोंक से निकलकर सवाई माधोपुर, दौसा, बूंदी, भीलवाड़ा, अजमेर, जयपुर और हरियाणा तक फैल गया। पीड़ितों के अनुसार राजस्थान और हरियाणा के करीब 15 से 20 हजार लोगों से लगभग 400 करोड़ रुपए जमा कराए गए, जिनमें टोंक जिले के करीब 8 हजार लोग शामिल हैं।
अधिकांश लेन-देन नकद में किया गया। बाद में संचालक कार्यालय बंद कर फरार हो गए। इसके बाद बड़ी संख्या में पीड़ित सामने आए, जिनमें कई लोगों के 50 लाख से 80 लाख रुपए तक फंसे हुए हैं। पीड़ितों का कहना है कि उनकी जीवनभर की जमा-पूंजी डूब गई है, जिससे वे आर्थिक संकट और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।
साडा गांव निवासी प्रभुलाल सैनी ने बताया – सितंबर 2025 में दो लोग बाइक पर आए और होम ट्यूटर बनने के लिए प्रेरित किया। वह भी अतिरिक्त आय के लालच में जुड़ गए और बाद में उन्हें सेंटर मैनेजर बना दिया गया।
उन्होंने करीब 1700 लोगों को होम ट्यूटर बनवाया। सोसायटी नियमित भुगतान करती रही, जिससे विश्वास बढ़ता गया। बाद में एक लाख रुपए जमा कराने पर हर माह 20 हजार रुपए लाभ का लालच दिया गया।
प्रभुलाल के अनुसार उनके करीब 86 लाख रुपए डूब गए हैं और आरोपियों का नेटवर्क राजस्थान के कई जिलों तथा हरियाणा तक फैला हुआ था।
50 लाख रुपए फंसने से परेशान, लोग मांग रहे पैसा
बनेठा थाना क्षेत्र की मीनाओं की झोपड़ियां निवासी दौलतराम शर्मा ने बताया – वह करीब छह माह से सोसायटी से जुड़े थे। उन्होंने और उनके माध्यम से जुड़े करीब 400 लोगों ने मिलाकर लगभग 50 लाख रुपए जमा कराए, जिनमें 10 लाख रुपए उनके खुद के थे। अब सोसायटी के संचालक फरार हो गए हैं और जिन लोगों को उन्होंने जोड़ा था, वे उनसे अपने रुपए वापस मांग रहे हैं। दौलतराम का कहना है कि वह तनाव में हैं और समझ नहीं पा रहे कि इतनी बड़ी रकम कैसे लौटाएं।
प्राचार्य और महिला शिक्षक भी बनीं शिकार, पुलिस की दो टीमें जांच में जुटीं
टोंक के एक निजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. विनोद गुप्ता ने बताया – आरोपियों ने बार-बार संपर्क कर उन्हें निवेश के लिए तैयार किया। उन्होंने अलग-अलग किश्तों में रकम जमा कराई, लेकिन जरूरत पड़ने पर पैसा निकालना चाहा तो पता चला कि संचालक फरार हो चुके हैं।
प्राइवेट टीचर शारदा महावार ने बताया – 75 हजार रुपए निवेश किए और 15 लोगों को भी जोड़ा था। अब वह खुद को बर्बाद महसूस कर रही हैं।
इधर पीड़ित कलेक्टर टीना डाबी, एसपी रोशन मीना और कोतवाल भंवरलाल वैष्णव से मिलकर रकम वापस दिलाने की मांग कर चुके हैं।