भोपाल के रिहायशी इलाकों में आवासीय भूखंडों पर चल रहे मॉल, होटल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को कोर्ट ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिए हैं कि यदि उनके पास आवासीय भूखंड पर व्यावसायिक गतिविधि संचालित करने की वैध अनुमति है, तो उसके दस्तावेज 7 दिन के भीतर भोपाल नगर निगम के समक्ष प्रस्तुत करें।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि तय समय में वैध दस्तावेज पेश नहीं किए गए तो नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के राजेंद्र कुमार बड़जात्या (2024) फैसले के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया है।
कार्रवाई का रास्ता साफ
कोर्ट के आदेश के बाद रिहायशी क्षेत्रों में बिना वैध अनुमति व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की स्थिति साफ हो गई है। अब संबंधित पक्षों को अपने व्यावसायिक उपयोग की वैध अनुमति साबित करने के लिए दस्तावेज निगम के सामने रखने होंगे।
याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने आदेश का स्वागत करते हुए कहा कि यह रिहायशी इलाकों को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अब नगर निगम के सामने कार्रवाई करने के लिए स्पष्ट न्यायिक निर्देश हैं।
ट्रैफिक-पार्किंग की समस्या से जूझ रहे रहवासी
रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के कारण ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और सुरक्षा से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को भी कोर्ट के आदेश से कार्रवाई की उम्मीद है। रहवासी लवनीश भाटी ने कहा कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ, अब कोर्ट के आदेश के बाद जमीन पर कार्रवाई की उम्मीद है।
संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने भी फैसले का स्वागत करते हुए नगर निगम से रिहायशी इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच की मांग की है। समिति का कहना है कि जिनके पास वैध अनुमति नहीं है, उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।