भारत-रूस के बीच Su-57 फाइटर जेट डील संभव:पुतिन BRICS समिट के लिए दिल्ली पहुंचे; 2016 की गोवा समिट में S-400 सिस्टम की डील हुई थी

भारत और रूस के बीच Su-57 फाइटर जेट की डील पर आज समझौता हो सकता है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन BRICS समिट के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।

पुतिन का प्लेन रात करीब 3 बजे दिल्ली उतरा। विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद उनका काफिला होटल आईटीसी मौर्या रवाना हो गया।

आज दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बैठक होगी। बातचीत में रूस की तरफ से भारत में Su-57 के प्रोडक्शन और जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश पर चर्चा हो सकती है।

इससे पहले 2016 की गोवा BRICS समिट में भारत और रूस के बीच S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील पर सहमति बनी थी। इस बार भी पुतिन के दौरे में रक्षा सहयोग अहम मुद्दा रहने की उम्मीद है।

पुतिन से पहले उनकी बख्तरबंद कार पहुंची

ब्रिक्स समिट में शामिल हो रहे दुनिया के 2 बड़े नेताओं रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के काफिले सबसे बड़े होंगे। गुरुवार को नोएडा के जेवर एयरपोर्ट पर 3 रूसी ट्रांसपोर्ट विमान के जरिए पुतिन का काफिला और ऑरस सीनेट बख्तरबंद लिमोजिन भी भारत पहुंची।

पुतिन के साथ भारत आने वाला ‘फ्लाइंग क्रेमलिन’ IL-96-300PU विमान चलता-फिरता राष्ट्रपति कमांड सेंटर है। दिल्ली में पुतिन की अंदरूनी सुरक्षा एफएसओ संभालेगी, जबकि भारतीय एजेंसियां बाहरी घेरा रखेंगी।

उन्हें दिए जाने वाले खाने की अलग जांच होगी। रूस अपने रसोइयों का इस्तेमाल करेगा। इससे पहले, रूस की दूसरी Il-96 स्पेशल फ्लाइट राजनयिकों के साथ दिल्ली पहुंची। डिप्टी PM डेनिस मंटुरोव भी भारत पहुंच चुके हैं।

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S-400 की बाकी खेप और रखरखाव पर भी बात: भारत, S-400 की बाकी खेप की आपूर्ति और उसके रखरखाव से जुड़े मुद्दों पर रूस से बात कर सकता है। इसके अलावा Su-30MKI लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने पर भी बात हो सकती है। ‘सुपर सुखोई’ योजना के तहत इनमें बेहतर रडार और नए हथियार लगाए जाएंगे।

ब्रह्मोस को लेकर दोनों देश इसके नए और हल्के संस्करण पर मिलकर काम करने की तैयारी में हैं। इसमें ब्रह्मोस-NG अहम है। यह मौजूदा ब्रह्मोस से हल्की होगी और इसे तेजस जैसे लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकेगा।

रक्षा के बाद परमाणु बिजली पर फोकस: रक्षा के अलावा परमाणु बिजली के क्षेत्र में भी भारत और रूस के बीच बातचीत हो सकती है। रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम भारत में कुडनकुलम परमाणु बिजली संयंत्र पर काम कर रही है। अब भारत में रूसी तकनीक से नए परमाणु बिजली संयंत्र लगाने पर भी चर्चा हो सकती है।

दोनों देश छोटे आकार के परमाणु रिएक्टर बनाने में भी साथ काम करने की संभावनाएं तलाश सकते हैं। ये रिएक्टर बड़े परमाणु बिजली संयंत्रों के मुकाबले छोटे होते हैं।

रुपए-रूबल में कारोबार बढ़ाने की कोशिश: भारत और रूस डॉलर की जगह रुपये और रूबल में कारोबार बढ़ाना चाहते हैं। इससे दोनों देशों के बीच भुगतान आसान होगा और डॉलर की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि रूस डॉलर हटाने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि भुगतान के आसान तरीकों के लिए तैयार है। उन्होंने बताया कि BRICS देशों के साथ रूस का करीब 90% कारोबार स्थानीय करेंसी में हो रहा है।

दोनों देशों के पास एक-दूसरे की करेंसी भी जमा हो गई है। अब इन पैसों को कारोबार और निवेश में इस्तेमाल करने और रुपये-रूबल में भुगतान आसान बनाने पर बातचीत हो सकती है।

रूस तक पहुंचने के रास्ते आसान होंगे: दोनों देश व्यापार बढ़ाने के लिए इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग को आगे बढ़ाने पर भी बात कर सकते हैं।

INSTC भारत को ईरान के रास्ते रूस से जोड़ता है। वहीं चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग से भारत और रूस के पूर्वी हिस्से के बीच सामान पहुंचाने का समय करीब 40 दिन से घटकर 20-22 दिन हो सकता है।

जिनपिंग का गलवान हिंसा के बाद पहला भारत दौरा

जिनपिंग 7 साल बाद भारत आ रहे हैं। पीएम मोदी के साथ उनकी बैठक भी होगी। 2020 के गलवान संघर्ष और एलएसी पर 4 साल लंबी तनातनी के बाद पहली बार दोनों नेता भारत में बैठक करके रिश्तों की नई जमीन तय करेंगे।

दोनों देश एलएसी से कारोबार तक 6 मोर्चों पर काम कर रहे हैं। 25 अगस्त को बीजिंग में एनएसए अजित डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता में 8 बिंदुओं पर सहमति बनी थी।

सबसे अहम फैसला सीमा विवाद पर विशेषज्ञ समूह बनाने का है। दोनों देश सीमा पर दो अतिरिक्त सैन्य संपर्क केंद्र बनाने, साथ ही पूर्वी और मध्य सेक्टर में दो सैन्य हॉटलाइन स्थापित करने पर सहमत हैं। इस प्रक्रिया को अब शीर्ष नेतृत्व की हरी झंडी मिलेगी।

दूसरा बड़ा मुद्दा कारोबार रहेगा। 2025-26 में भारत ने चीन से करीब 11.4 लाख करोड़ का सामान आयात किया। भारत का व्यापार घाटा करीब 8.6 लाख करोड़ से ऊपर रहा।

भारत के मुद्दे: फार्मा और कृषि जैसे सेक्टर्स में चीन के बाजार में पहुंच

  • भारत के सामान को चीनी बाजार में ज्यादा पहुंच मिले। सप्लाई चेन राजनीतिक तनाव से बेअसर रहे।
  • फार्मा, आईटी और कृषि उत्पादों सहित कई क्षेत्रों में भारत चीन से बेहतर बाजार पहुंच मांग रहा है।
  • बैठक में आर्थिक असंतुलन कम करने के लिए कोई संस्थागत व्यवस्था बनाने पर चर्चा हो सकती है।
  • गलवान संघर्ष के बाद चीनी निवेश मंजूरी से बंधे; सुरक्षा जांच संग फैक्टरियों से रोजगार, तकनीक और आयात घटाने पर भारत विचार कर रहा है।

चीन के मुद्दे: सीमा विवाद खत्म होने से पहले ही बाकी रिश्ते खोलो

  • चीन लंबे समय से चाहता है कि सीमा विवाद द्विपक्षीय रिश्ते से अलग रहे। व्यापार और दूसरे क्षेत्रों में संबंध बढ़ते रहें। भारत का रुख इससे अलग है।
  • सीमा पर असामान्य स्थिति हो तो बाकी संबंध सामान्य नहीं हो सकते। दोनों पक्ष इस बीच नया व्यावहारिक रास्ता ढूंढ़ते दिख रहे हैं।
  • इसका फॉर्मूला ये हो सकता है- एलएसी पर मजबूत सैन्य सुरक्षा तंत्र बने। जहां संभव हो वहां सीमा निर्धारण प्रक्रिया आगे बढ़े। व्यापार घाटा कम किया जाए। व्यापार, तीर्थयात्रा, वीसा और लोगों के बीच संपर्क सामान्य किया जाए।

ईरानी राष्ट्रपति से भी PM मोदी की बैठक होगी

पीएम मोदी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान से भी द्विपक्षीय मुलाकात करेंगे। पजेशकियान आज नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। यह आठ साल बाद किसी ईरानी राष्ट्रपति की भारत यात्रा है। दोनों नेताओं की मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है।

इससे पहले 31 अगस्त को एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और पजेशकियान की मुलाकात हुई थी। तब दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों, पश्चिम एशिया की स्थिति और क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए संवाद और कूटनीति की जरूरत पर चर्चा की थी।

30 हजार जवानों का पहरा, एयर डिफेंस में आकाश मिसाइल तैनात

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के 30 हजार जवान तैनात रहेंगे। एयर डिफेंस में आकाश मिसाइलों के साथ-साथ वायुसेना के लड़ाकू जेट भी तैनात हैं। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों के लिए 11 होटल और 35 सुरक्षित रूट तय किए गए हैं।

रूटों पर फेस रिकॉग्निशन कैमरे भी लगे हैं। गणतंत्र दिवस की तरह सख्त निगरानी व्यवस्था है। यहां एंटी एयरक्राफ्ट गन, एंटी ड्रोन सिस्टम और स्नाइपर तैनात हैं। आयोजन स्थल भारत मंडपम के आसपास के क्षेत्रों में 500 सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। कुछ कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट भी पहचान सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन की तैयारियों का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया।