प्रियांक खड़गे बोले-बीजेपी नेता बिना टेलीप्रॉम्प्टर वंदे मातरम गाकर दिखाएं:ऐसा किया तो मैं इस्तीफा दे दूंगा; कर्नाटक सरकार ने 2 पैरा गाना तय किया

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बीजेपी नेता बीवाई विजयेंद्र और आर. अशोक को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि दोनों नेता बिना टेलीप्रॉम्प्टर या कागज देखे वंदे मातरम के सभी अंतरे गाकर दिखाएं। अगर वे ऐसा कर देते हैं तो वह इस्तीफा दे देंगे।

दरअसल, कर्नाटक सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के पहले 2 अंतरे गाने का आदेश दिया था। यह आदेश राज्य के सरकारी कार्यक्रमों पर लागू होगा। लेकिन राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों को इससे बाहर रखा गया है।

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को निर्देश दिया था कि राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ के साथ वंदे मातरम के सभी 6 अंतरे गाए जाएं।

कांग्रेस ने तय किया था- वंदे मातरम के दो पैरा गाए जाएंगे

कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने 19 अगस्त को वंदे मातरम को लेकर 1937 के अपने प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया। इस प्रस्ताव के तहत पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल 2 पैरा जाते हैं।

कमेटी ने ऐलान किया था कि पार्टी अपने सभी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के 6 में से सिर्फ शुरुआती दो पैरा गाएगी। यह फैसला 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम के गायन को लेकर हुए विवाद के बाद आया।

कांग्रेस का यह फैसला बीजेपी के उन आरोपों के बाद आया था, जिसमें बीजेपी ने कांग्रेस नेताओं पर पार्टी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का पूरा संस्करण नहीं गाकर उसका अपमान करने का आरोप लगाया था।

2026 वंदे मातरम के अपमान पर कानून बना

24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गीत घोषित किया था। लंबे समय तक इसके अपमान पर कोई अलग कानून नहीं था, लेकिन 2026 के मानसून सत्र में केंद्र सरकार ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम’ बनाया।

इस कानून के तहत ‘वंदे मातरम’ के गायन को जानबूझकर रोकने, इसमें बाधा डालने या इसका सार्वजनिक अपमान करने को दंडनीय अपराध माना गया है। ऐसा करने पर 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान है।

इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम’ के पूरे 6 छंद गाए गए।

केंद्र का आदेश- पहले वंदे मातरम, फिर जन गण मन होगा

गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के गायन और बजाने को लेकर नए निर्देश जारी किए थे। इसमें दोनों के सही बोल, उच्चारण और तय प्रोटोकॉल का पालन करने को कहा गया था।

निर्देशों के मुताबिक, अगर किसी कार्यक्रम में वंदे मातरम और जन गण मन दोनों गाए या बजाए जाते हैं, तो पहले वंदे मातरम और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। अगर किसी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का अपना राज्य गीत भी है, तो पहले राज्य गीत फिर वंदे मातरम और अंत में जन गण मन रहेगा।