पंजाब और चंडीगढ़ समेत 5 शहरों में 26 ठिकानों पर ED की गुरुवार तक करीब 50 घंटे सर्च चली। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में हुई इस कार्रवाई में GMADA और पंजाब सरकार के हाउसिंग विभाग के अफसर भी शामिल रहे।
ED ने दावा किया कि AAP नेता सत्येंद्र जैन और प्रदेश प्रभारी मनीष सिसोदिया GMADA अधिकारियों के साथ अनौपचारिक बैठकें करते थे। इतना ही नहीं सत्येंद्र जैन के निर्देश पर नीलामी, अधिग्रहण व मुआवजे से जुड़े फैसले लिए जाते थे। एजेंसी ने कुछ मोबाइल फोन से पंजाब सरकार के नेताओं के रिश्तेदारों को कथित हवाला भुगतान से जुड़ी चैट मिलने का भी दावा किया है। हालांकि, AAP ने इसका खंडन किया है।
ED ने आरोप लगाया कि GMADA की जमीन की रिजर्व कीमत नीलामी से पहले कथित तौर पर कम की गई, जिससे पंजाब सरकार और GMADA को करीब 10 हजार करोड़ रुपए का अनुमानित नुकसान हुआ।
ED के मुताबिक, जांच CBI की FIR के आधार पर शुरू हुई थी। इसमें तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के प्रमोटरों से जुड़े 238 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड का आरोप है। एजेंसी ने सर्च से पहले की जांच में बड़े पैमाने पर नकद लेनदेन, फर्जी शेयर प्रीमियम और अन्य वित्तीय अनियमितताएं मिलने का दावा किया।
- 26 ठिकानों पर ED ने रेड की: ANI रिपोर्ट के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली, मोहाली, चंडीगढ़, पंचकूला और लुधियाना में 26 ठिकानों पर सर्च और सर्वे की कार्रवाई शुरू की थी, जो कि गुरवपर तक चली। मामला मैसर्स तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है।
- CBI की FIR से शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग की जांच: ED की यह जांच CBI की एक FIR के आधार पर शुरू हुई थी। FIR में तिरुपति इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटरों से जुड़े 238 करोड़ रुपए के बैंक फ्रॉड का मामला था। आरोप था कि इस रकम को निजी फायदे के लिए दूसरी जगह भेजा गया। ED ने बताया कि सर्च से पहले की जांच में बड़े पैमाने पर नकद लेनदेन, फर्जी शेयर प्रीमियम ट्रांजैक्शन और अन्य वित्तीय अनियमितताएं सामने आई थीं।
- जगमोहन और मनमोहन से जुड़े मामलों की जांच: ANI रिपोर्ट के अनुसार, ED ने कहा कि प्रमोटर जगमोहन गर्ग और मनमोहन गर्ग कई मामलों से जुड़े रहे हैं। इनमें NSEL घोटाला, रेमिगेट बिल्डस्टेट्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड के मामले में GMADA से वैधानिक बकाया की कथित अवैध माफी और रद्द किए गए प्लॉट का दोबारा आवंटन शामिल है। ED के अनुसार, उपलब्ध जानकारी से पता चला कि रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को वैधानिक बकाये में छूट के जरिए करीब 57 करोड़ रुपए का आर्थिक लाभ दिया गया।
- ये अफसर और लोग जांच में शामिल किए: ED के अनुसार, सर्च के दौरान शामिल प्रमुख लोगों में प्रधान सचिव विकास गर्ग IAS, मुख्य प्रशासक संदीप ऋषि IAS, अतिरिक्त मुख्य प्रशासक अमरिंदर मल्ही PCS, भूमि अधिग्रहण कलेक्टर रोहित जिंदल PCS, पूर्व GMADA मुख्य प्रशासक राजीव गुप्ता IAS, तिला कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड के किरीट साधु बास तथा रेमिगेट बिल्डस्टेट और तिरुपति इंफ्राप्रोजेक्ट्स के निदेशक और प्रमोटर शामिल थे।
- सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया लेते थे मीटिंग: एजेंसी ने आगे दावा किया कि नई नीलामियों, अधिग्रहण और मुआवजे से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय सत्येंद्र जैन के निर्देशों के तहत अनौपचारिक रूप से लिए गए थे। ED ने यह भी आरोप लगाया कि सत्येंद्र जैन के OSD अमरेंद्र झा बिना किसी आधिकारिक पद के PUDA भवन से अनौपचारिक रूप से काम करते थे और GMADA के प्रमुख फैसलों को प्रभावित करते थे।
- मोबाइल से हवाला चैट: ANI रिपोर्ट के अनुसार, ED ने कहा कि तलाशी के दौरान जब्त कुछ मोबाइल फोन से पंजाब सरकार के राजनेताओं के रिश्तेदारों को किए गए हवाला भुगतान से जुड़ी चैट मिली हैं। एजेंसी ने आरोप लगाया कि किरीट साधु बास और अर्चना झा के नियंत्रण वाली टिला कंसल्टेंसी लिमिटेड का संचालन GMADA और PUDA के भवन परिसरों से किया जाता था।
- मुआवजे के भुगतान में अनियमितताएंः कंपनी पर भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत भूमि अधिग्रहण के फैसलों और मुआवजे के भुगतान में अनियमितताओं में शामिल होने का आरोप है। ED के अनुसार, धारा 11 की अधिसूचनाएं जारी होने के बावजूद आशय पत्र जारी करने और हस्तांतरण विलेखों के निष्पादन में भी अनियमितताएं मिलीं।
- 10 हजार करोड़ के नुकसान का दावा: ANI रिपोर्ट के अनुसार, ED ने आरोप लगाया कि नीलामी से पहले GMADA की बिक्री न हो पाई भूमि के बैंक की रिजर्व कीमतों को कथित तौर पर धोखाधड़ी से कम किया गया। एजेंसी का दावा है कि इससे GMADA और पंजाब सरकार को करीब 10,000 करोड़ रुपए का अनुमानित नुकसान हुआ।
ED के खिलाफ सरकार हाईकोर्ट गई, जानिए उसमें क्या हुआ
- सरकार ने कहा- अफसर अवैध हिरासत में रखे: ED की दिन-रात लगातार 2 दिन तक रेड चलती रही। कई अफसरों व कर्मचारियों को पूछताछ के लिए गमाडा ऑफिस में ही रोक दिया गया। इसके बाद AAP सरकार ने बुधवार रात पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस(CRWP-11813-2026) दायर की। इसमें आरोप लगाया गया कि तलाशी के दौरान GMADA और राज्य सरकार के अधिकारियों को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। इसकी सुनवाई वॉट्सऐप के जरिए हुई।
- हाईकोर्ट ने वारंट अफसर नियुक्त किया: हाईकोर्ट ने परिसर का निरीक्षण कर स्थिति की जांच के लिए रजिस्ट्रार (प्रशासन-II) राजन नंदा को वारंट अधिकारी नियुक्त किया। उन्हें PMLA की धारा 16 और 17 के तहत हुई कार्रवाई की भी जांच करनी थी। वारंट अफसर से हाईकोर्ट ने गुरूवार दोपहर 2 बजे तक रिपोर्ट मांगी थी।
- रात ढ़ाई बजे वारंट अफसर पहुंचे: ED के अनुसार, वारंट अधिकारी ने 24 सितंबर को रात करीब 2:50 बजे परिसर का दौरा किया। उन्होंने वहां मौजूद संबंधित अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की और तलाशी के अधिकार पत्र, पंचनामा तथा अन्य संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। ED के अनुसार, अधिकारियों ने वारंट अधिकारी को बताया कि उन्हें अवैध रूप से हिरासत में नहीं रखा गया था और न ही उन पर किसी तरह का अनुचित दबाव बनाया गया। उन्हें परिवार के सदस्यों से संपर्क करने और भोजन की सुविधा दी गई थी।
- डेटा डाउनलोड करने को मुलाजिम-अफसर चाहिए थे: ED के मुताबिक उन्होंने वारंट अफसर को बताया कि महिला कर्मचारियों को शाम के समय कार्यालय से जाने की अनुमति थी। ED ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से डेटा डाउनलोड करने, उसकी कॉपी बनाने और क्लोन तैयार करने के लिए संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी जरूरी थी। अधिकारी किसी दूसरे अधिकारी को अपनी ओर से मौजूद रहने के लिए अधिकृत करने के बाद वहां से जा सकते थे।
- सर्च पूरी होने के बाद सरकार ने याचिका वापस ली: गुरूवार दोपहर 2 बजे इस मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी, इससे पहले ही करीब 1 बजे रेड खत्म हो गई। तलाशी की कार्रवाई पूरी होने के बाद पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका वापस लिए जाने के आधार पर इसे खारिज कर दिया।
सिसोदिया बोले- भाजपा पंजाब पर कब्जा करना चाहती मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि भाजपा की नीयत पंजाब पर कब्जा करने की है और इसी उद्देश्य से ED को पंजाब भेजा गया है। उन्होंने कहा कि ईडी पंजाब में रेड करके कुछ नहीं पा सकेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले अपने कैंपेन के जरिए राजनीतिक लाभ उठाने में नाकाम रहने के बाद भाजपा अब इस एजेंसी का सहारा ले रही है।