एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले निशानेबाज कमलजीत के भारत लौटने पर एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत किया गया। गांव सुलखा से रेवाड़ी कोचिंग के लिए जाते समय वर्ष 2019 में हुए सड़क हादसे के बाद भी कमलजीत ने हिम्मत नहीं हारी। हादसे में उनका पैर टूट गया था, लेकिन निशानेबाजी के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ।
उन्होंने बिस्तर पर रहते हुए भी निशानेबाजी का अभ्यास जारी रखा। दरअसल, वर्ष 2019 में कमलजीत जिस टैंपो से रेवाड़ी कोचिंग के लिए जा रहे थे, उसका एक्सीडेंट हो गया था। हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कमलजीत का पैर टूट गया था। गंभीर चोट के बावजूद उन्होंने खेल छोड़ने के बजाय अभ्यास जारी रखा।
हादसे के महज 20 दिन बाद ही कमलजीत ने ट्रायल दिया और सफल रहे। इसके बाद उन्होंने अपनी मेहनत और लगन के दम पर निशानेबाजी में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया और अब एशियन स्तर पर गोल्ड मेडल जीतकर देश और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। कमलजीत के भारत लौटने पर उनके समर्थकों और क्षेत्र के लोगों ने एयरपोर्ट पर पहुंचकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
लोगों ने उनकी उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का पल बताया।
एथलीट बनने का चोट ने तोड़ा था सपना
गांव सुलखा के कमलजीत का पहला सपना एथलीट बनने का था। वर्ष 2019 में लगी गंभीर चोट के बाद उनका एथलेटिक्स का सफर रुक गया। इसी दौरान उनके चाचा शक्ति पाल ने उन्हें निशानेबाजी की ओर आने के लिए प्रेरित किया। खेल बदला, लेकिन आगे बढ़ने का जज्बा नहीं। शुरुआत के कुछ ही महीनों में कमलजीत ने राज्य स्तर की प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन किया।
इसके बाद उन्होंने जूनियर विश्व चैंपियनशिप और विश्व कप स्तर पर पदक जीतकर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाई।
इलाज और खेल के लिए लिया कर्ज
कमलजीत के सफर में परिवार ने भी आर्थिक मुश्किलों का सामना किया। वर्ष 2019 में हुए सड़क हादसे में दो सहयात्रियों की मौत हुई और कमलजीत गंभीर रूप से घायल हुए। इलाज के साथ निशानेबाजी के उपकरण और प्रशिक्षण का खर्च भी परिवार पर पड़ा। पिता रतीराम फैक्ट्री में काम करते हैं और परिवार की आय सीमित है।
परिवार ने इलाज और खेल के जरूरी खर्च के लिए कर्ज तक लिया। इसके बावजूद परिवार ने कमलजीत का साथ नहीं छोड़ा।
महंगा खेल होने के कारण छोड़ने तक का मन बना लिया था
निशानेबाजी में प्रशिक्षण, उपकरण, यात्रा और प्रतियोगिताओं का खर्च परिवार के लिए बड़ी चुनौती रहा। आर्थिक दबाव के चलते एक समय कमलजीत ने शूटिंग छोड़ने के बारे में भी सोचा था। परिवार और कोच के सहयोग से उन्होंने अभ्यास जारी रखा।
पिता रतीराम ने बताया कि परिवार ने अपनी बचत का इस्तेमाल भी बेटे के खेल को जारी रखने में किया। आज उसी संघर्ष का परिणाम एशियन गेम्स के गोल्ड मेडल के रूप में सामने आया है।
5 एकड़ जमीन से भी परिवार चलता
कमलजीत के पिता रतीराम फैक्ट्री में काम करते हैं, जबकि परिवार के पास करीब पांच एकड़ खेती की जमीन भी है। सीमित संसाधनों के बीच बेटे के खेल करियर को आगे बढ़ाना परिवार के लिए आसान नहीं था। शूटिंग के खर्च को पूरा करने के लिए परिवार को कई बार आर्थिक दबाव झेलना पड़ा।
इसके बावजूद पिता और चाचा ने कमलजीत के अभ्यास और प्रतियोगिताओं में जाने का खर्च जुटाने में मदद की।
जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप से एशियन गोल्ड तक
कमलजीत ने वर्ष 2023 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप और जूनियर विश्व कप स्तर पर पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। इसके बाद वह भारतीय टीम के सीनियर सेटअप तक पहुंचे। एशियन गेम्स में उन्हें मिश्रित टीम स्पर्धा में आखिरी समय पर मौका मिला। कमलजीत ने इस मौके को गोल्ड मेडल में बदल दिया।
सुरुचि सिंह के साथ उनकी भारतीय जोड़ी ने दस मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता और एशियन गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया।
मां बोलीं- बेटे के लौटने पर बनाएंगी चूरमा-लड्डू
एशियन गेम्स में बेटे के गोल्ड जीतने के बाद गांव सुलखा में परिवार ने जमकर जश्न मनाया। मां राजबाला बेटे के भारत लौटने का इंतजार कर रही थीं। उन्होंने बताया कि कमलजीत को चूरमा पसंद है और उसके लौटने पर वह उसके लिए चूरमा और गोंद के लड्डू बनाएंगी। पिता रतीराम और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी बेटे की उपलब्धि पर खुशी जताई।