मध्यप्रदेश सरकार ने करीब 225 करोड़ रुपए का एयरबस ACH160 हेलीकॉप्टर खरीदा है। वहीं, करीब 350 करोड़ रुपए का बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 जेट बेड़े में शामिल होने वाला है। जेट की डिलीवरी सितंबर के आखिरी तक हो सकती है।
नए हेलीकॉप्टर और जेट का प्रदेशभर में इस्तेमाल हो सके, इसके लिए सरकार हेलीपैड और हवाई पट्टियां विकसित करेगी। सरकार अपने हवाई बेड़े को हाइटेक बनाने के साथ एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
हर 50 किलोमीटर पर हेलीपैड बनाने की तैयारी
प्रदेश में अभी करीब 250 हेलीपैड बताए जाते हैं। सरकार अगले दो साल में करीब 63 नए हेलीपैड बनाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इनका नेटवर्क हर 50 किलोमीटर के दायरे में बनाने की योजना है। इससे मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी के लिए जिलों तक पहुंचना आसान हो सकता है।
अभी कई दौरों में पहले विमान से एयरपोर्ट पहुंचना पड़ता है, फिर वहां से हेलीकॉप्टर या सड़क के रास्ते आगे जाना होता है। पर्याप्त हेलीपैड बनने के बाद संबंधित क्षेत्र के नजदीक हेलीकॉप्टर से सीधे पहुंचने का विकल्प मिलेगा।
अधिकतम उड़ान अवधि 4 घंटे 30 मिनट
मध्यप्रदेश सरकार फ्रांस की एयरबस से ACH160 हेलीकॉप्टर खरीद रही है। टैक्स और शुल्क समेत इसकी कीमत करीब 225 करोड़ रुपए बताई गई है। इसकी डिलीवरी नवंबर में प्रस्तावित है। सरकार के लिए तैयार हेलीकॉप्टर में दो पायलट समेत 9 लोग बैठ सकेंगे।
एयरबस के आधिकारिक दस्तावेज के मुताबिक ACH160 को अधिकतम 10 यात्रियों की क्षमता के साथ तैयार किया जा सकता है। इसकी अधिकतम उड़ान अवधि 4 घंटे 30 मिनट और क्रूज स्पीड 155 नॉट है। हेलीकॉप्टर में आधुनिक तकनीक और कैमरों की सुविधा भी रहेगी।
MP के पायलटों ने कनाडा में ली ट्रेनिंग
नए जेट के संचालन की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। मध्यप्रदेश के पायलट विश्वास राय और अरविंद सिंह जुलाई में कनाडा गए थे। दोनों ने बॉम्बार्डियर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया है।
सरकार नए हेलीकॉप्टर और जेट को बेड़े में शामिल करने के साथ उनके इस्तेमाल के लिए एयर कनेक्टिविटी का ढांचा भी तैयार कर रही है। एक तरफ 63 नए हेलीपैड बनाने की योजना है, वहीं दूसरी तरफ करीब 20 हवाई पट्टियों के विस्तार की तैयारी है।
नए जेट के लिए कम से कम 1800 मीटर रनवे चाहिए
सरकार के सामने नए बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 जेट को ज्यादा से ज्यादा एयरफील्ड पर उतारने की चुनौती है। यह मिड-साइज जेट है। इसके लिए कम से कम करीब 1800 मीटर और बेहतर संचालन के लिए करीब 2100 मीटर लंबे रनवे की जरूरत है।
विभागीय आकलन के मुताबिक प्रदेश के 28 एयरफील्ड में से करीब 10 जगहों पर यह जेट अभी उतर सकता है। इनमें 7 एयरपोर्ट और 3 हवाई पट्टियां शामिल हैं।
सिर्फ 3 हवाई पट्टियों पर 1800 मीटर से लंबा रनवे
प्रदेश की करीब 20 हवाई पट्टियों में फिलहाल सिर्फ तीन ऐसी हैं, जहां रनवे की लंबाई 1800 मीटर या उससे ज्यादा है। इनमें मंदसौर की नौलखा बीड, सिवनी और मंडला की कान्हा हवाई पट्टी शामिल हैं।
सतना में एयरपोर्ट बन चुका है, लेकिन यहां रनवे करीब 1300 मीटर लंबा है। इसलिए नया चैलेंजर-3500 यहां नहीं उतर पाएगा। एयरपोर्ट बन जाना ही काफी नहीं है। इस जेट के लिए रनवे की लंबाई और दूसरी जरूरी सुविधाएं भी बढ़ानी होंगी।
वीआईपी यात्राओं के लिए किया जाएगा इस्तेमाल करीब 350 करोड़ रुपए का बॉम्बार्डियर चैलेंजर-3500 जेट सरकार के लिए तैयार कराया जा रहा है। इसमें 9 यात्री और 2 पायलट बैठ सकेंगे। इसका इस्तेमाल मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी यात्राओं के लिए किया जाएगा। विमान का इंटीरियर मध्यप्रदेश सरकार की जरूरत के हिसाब से तैयार कराया गया है।
इसकी अधिकतम रेंज करीब 3500 समुद्री मील और क्रूज स्पीड करीब 870 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है। विभागीय जानकारी के मुताबिक इसकी फ्यूल क्षमता लंबी दूरी की उड़ान के लिए पर्याप्त है, जिससे बीच में ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
20 हवाई पट्टियों के विस्तार पर 300 से 400 करोड़ खर्च
विमानन विभाग ने हवाई पट्टियों वाले जिलों के कलेक्टरों को पत्र भेजकर विस्तार के लिए जमीन उपलब्ध होने की जानकारी मांगी है। एक हवाई पट्टी के विस्तार में औसतन 10 से 15 करोड़ रुपए खर्च हो सकते हैं।
विभाग के अनुमान के मुताबिक, अगर निजी जमीन लेनी पड़ी तो खर्च करीब 30 से 40 करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। रनवे बढ़ाने के साथ जमीन, एप्रोच रोड, सुरक्षा क्षेत्र और दूसरी जरूरी विमानन सुविधाओं पर काम करना होगा। करीब 20 हवाई पट्टियों के विस्तार पर 300 से 400 करोड़ रुपए तक खर्च का अनुमान है।
हर साल बचेंगे 60-70 करोड़ रुपए
ढाई साल में मोहन सरकार को विमान और हेलीकॉप्टर किराए पर औसतन 60-70 करोड़ रुपए सालाना खर्च करने पड़े। नया जेट और हेलीकॉप्टर आने के बाद यह किराया बचेगा।
सरकार के पास 13 साल पुराना हेलीकॉप्टर
मप्र सरकार का मौजूदा एयरबस EC155 B1 हेलीकॉप्टर 2011 में खरीदा गया था। करीब 13 साल पुराने इस हेलीकॉप्टर के बढ़ते मेंटेनेंस खर्च के चलते सरकार अब बेड़ा अपग्रेड कर रही है।