अनंत चतुर्दशी पर 50 हजार लोगों के लिए महाप्रसादी:पहली बार बन रही 2.5 फीट की झकोलमा पूड़ी, 5 सब्जियों के साथ परोसा जाएगा अचार

चित्तौड़गढ़ में अनंत चतुर्दशी पर आज महाप्रसादी में पहली बार सामान्य पूड़ी के साथ झकोलमा पूड़ी भी बनाई जा रही है। करीब दो से ढाई फीट आकार की यह पूड़ी अपने बड़े आकार और बनाने के अलग तरीके के कारण खास है। इसके लिए भीलवाड़ा से 15 हलवाइयों की अलग टीम बुलाई गई है।

आयोजन साल 2012 में महज 20 दानदाताओं और 7 हजार लोगों के लिए प्रसाद से शुरू हुआ था, अब करीब 400 भामाशाहों जुड़ चुके हैं। इस बार 45 क्विंटल आटे से पूड़ियां बनाई जा रही है।

पूड़ी के साथ आलू टमाटर की सब्जी, दाना मेथी की सब्जी, पकौड़ी की सब्जी, नमकीन की सब्जी, टमाटर मिर्ची के गट्टे और अचार परोसा जाएगा। तैयारी में करीब 140 हलवाई, 60 से 70 मजदूर और चित्तौड़गढ़ महोत्सव समिति के करीब 150 कार्यकर्ता दिन-रात जुटे हैं।

20 दानदाताओं से शुरू हुआ सफर, अब 400 भामाशाह निभा रहे जिम्मेदारी

आयोजन की शुरुआत साल 2012 में काफी छोटे स्तर से हुई थी। शुरुआत में केवल 20 दानदाता जुड़े थे और करीब 7 हजार लोगों के लिए प्रसाद बनाने का लक्ष्य रखा गया था। पहले ही साल उम्मीद से ज्यादा 12 हजार लोगों ने प्रसादी ली। इसके बाद हर साल आयोजन का दायरा बढ़ता गया।

धीरे-धीरे शहर के लोग इस सेवा से जुड़ते गए और दानदाताओं की संख्या भी बढ़ती गई। अब करीब 400 भामाशाहों के सहयोग से यह आयोजन किया जा रहा है। खास बात यह है कि कई लोग बिना अपना नाम बताए भी सहयोग करते हैं। कुछ लोग सामान पहुंचाकर चले जाते हैं तो कुछ आर्थिक सहयोग करते हैं। यही वजह है कि अब यह आयोजन केवल समिति का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे शहर की भागीदारी वाला आयोजन बन चुका है।

बचपन की एक घटना से आया सेवा का विचार

चित्तौड़गढ़ महोत्सव समिति के संस्थापक सुनील ढीलीवाल बताते हैं कि इस सेवा के पीछे बचपन की एक पुरानी याद जुड़ी हुई है। बचपन में वे गणपति विसर्जन देखने गए थे। उस समय यात्रा में शामिल लोगों के लिए भोजन की कोई व्यवस्था नहीं होती थी। उसी समय उनके मन में विचार आया कि भविष्य में ऐसा काम जरूर करेंगे, जिससे लोगों को इस मौके पर भोजन मिल सके।

आज यह आयोजन शहर के लोगों के सहयोग से चल रहा है। सभी धर्म और समाज के लोग अपनी क्षमता के अनुसार इसमें योगदान करते हैं। किसी का सहयोग छोटा है तो किसी का बड़ा, लेकिन सभी के सहयोग से यह व्यवस्था हर साल आगे बढ़ रही है।

45 क्विंटल आटा, 60 टीन तेल और हजारों किलो सामग्री से बनेगा भोजन

महाप्रसादी के लिए इस बार बड़ी मात्रा में सामग्री जुटाई गई है। कुल 45 क्विंटल आटे से डेढ़ लाख पूड़ियां तैयार की जा रही हैं। इसमें 23 क्विंटल आटे से सामान्य पूड़ी बनाई जाएगी, जबकि 15 बोरी आटे से झकोलमा पूड़ी तैयार होगी।

सब्जियों की व्यवस्था भी बड़े स्तर पर की गई है। करीब 12 क्विंटल आलू टमाटर की सब्जी, ढाई क्विंटल दाना मेथी की सब्जी, 5 क्विंटल पकौड़ी की सब्जी और ढाई क्विंटल नमकीन की सब्जी बनाई जाएगी। इसके अलावा 100 किलो टमाटर मिर्ची के गट्टे और 80 किलो अचार तैयार किया जाएगा।

इन सभी सब्जियों के लिए करीब 6.5 क्विंटल आलू, डेढ़ सौ किलो टमाटर, 100 किलो हरी मिर्च, 40 किलो धनिया, सवा क्विंटल बेसन, ढाई क्विंटल छाछ और 100 किलो नमकीन का उपयोग किया जाएगा। इतनी बड़ी मात्रा में भोजन तैयार करने के लिए हलवाई की टीम दिन-रात काम कर रही है।

दो जगहों पर तैयार हो रहा खाना, दोपहर 1 बजे शुरू होगी महाप्रसादी

इस बार खाना तैयार करने की व्यवस्था दो स्थानों पर की गई है। कुमावतों का नोहरा और सिंधी धर्मशाला में भोजन तैयार किया जा रहा है। समिति की ओर से 125 हलवाई लगाए गए हैं। इसके अलावा झकोलमा पूड़ी बनाने के लिए भीलवाड़ा से आई 15 हलवाइयों की टीम अलग से काम कर रही है।

महाप्रसादी का वितरण दोपहर 1 बजे से शुरू किया जाएगा। इसके लिए शहर के सूचना केंद्र के बाहर काउंटर लगाया गया है। वहीं नेहरू बाजार स्थित त्रिनेत्र गणेश चौक पर महिला काउंटर बनाया गया है। महिला काउंटर पर ATBF की महिलाएं ही सेवा देंगी। यह काउंटर शाम 5:30 बजे से शुरू होगा। दोनों काउंटर रात के 12 बजे तक चलेंगे।

प्रसाद वितरण की व्यवस्था भी तय तरीके से रहेगी। सबसे पहले आलू टमाटर की सब्जी परोसी जाएगी। इसके खत्म होने के बाद दाना मेथी की सब्जी दी जाएगी। इसके बाद पकौड़ी की सब्जी और फिर नमकीन की सब्जी परोसी जाएगी। वहीं टमाटर मिर्ची के गट्टे और अचार लगातार उपलब्ध रहेंगे।

गैस की कमी के बीच सात लकड़ी की भट्ठियों पर बन भोजन

इस बार गैस सिलेंडरों की कमी को देखते हुए समिति ने अलग व्यवस्था की है। भोजन तैयार करने के लिए सात लकड़ी की भट्ठियां बनाई गई हैं। इनमें करीब 40 क्विंटल लकड़ी का इस्तेमाल किया जाएगा। इनमें दो मूवेबल भट्ठियां भी शामिल हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार स्थान बदला जा सकेगा।

पिछले कुछ सालों से अनंत चतुर्दशी के समय बारिश होने के कारण इस बार आयोजन स्थल को पूरी तरह वाटरप्रूफ बनाया जा रहा है। खाना बनाने और वितरण स्थल पर ऐसे इंतजाम किए गए हैं, ताकि मौसम खराब होने पर भी व्यवस्था प्रभावित नहीं हो।

हर साल बढ़ता गया लोगों का भरोसा

चित्तौड़गढ़ महोत्सव समिति का कहना है कि यह आयोजन सिर्फ भोजन वितरण नहीं, बल्कि शहर की सेवा भावना का उदाहरण बन चुका है। 15 साल पहले कुछ लोगों के सहयोग से शुरू हुई यह पहल आज हजारों लोगों तक पहुंच चुकी है। इसके पीछे सैकड़ों लोगों की मेहनत होती है। कोई सामग्री की व्यवस्था करता है, कोई खाना बनाने में सहयोग देता है और कोई प्रसाद वितरण की जिम्मेदारी संभालता है।