टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले पात्र निजी वाहन मालिक सालाना लोकल पास बनवा सकेंगे। इसके लिए टोल प्लाजा की निर्धारित श्रेणी के अनुसार 1,500 या 3,000 रुपए सालाना देने होंगे। इससे रोजाना या बार-बार टोल प्लाजा से गुजरने वाले लोगों को हर यात्रा पर अलग-अलग टोल शुल्क नहीं देना पड़ेगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 26 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में संशोधन की अधिसूचना जारी की है। ये नियम 1 नवंबर 2026 से लागू होंगे।
अधिसूचना के मुताबिक, यह सुविधा उन पात्र निजी वाहन मालिकों के लिए है, जिनके पास वैध FASTag है और जो संबंधित टोल प्लाजा के निर्धारित दायरे में रहते हैं। पास केवल संबंधित टोल प्लाजा पर ही मान्य होगा।
यूपी के लोगों को कैसे मिलेगा फायदा?
उत्तर प्रदेश में NHAI के 135 टोल प्लाजा हैं। ऐसे में टोल के आसपास रहने वाले नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और अन्य निजी वाहन मालिकों को इस सुविधा से फायदा मिल सकता है। खासकर उन लोगों को राहत मिलेगी, जिन्हें रोजाना काम, पढ़ाई या दूसरे जरूरी कामों के लिए टोल प्लाजा पार करना पड़ता है।
हालांकि, यह पास सभी वाहन मालिकों के लिए मुफ्त या पूरे प्रदेश में एक समान मान्य नहीं होगा। इसका लाभ निर्धारित पात्रता और संबंधित टोल प्लाजा की शर्तें पूरी करने पर ही मिलेगा।
1,500 और 3,000 रुपए की दर किसके लिए?
- नए नियमों में टोल प्लाजा की स्थिति के आधार पर सालाना शुल्क तय किया गया है।
- 1,500 रुपए सालाना: जहां टोल प्लाजा नगर पालिका या स्थानीय नगरीय क्षेत्र की सीमा से बाहर स्थित है।
- 3,000 रुपए सालाना: जहां टोल प्लाजा नगर पालिका या स्थानीय नगरीय क्षेत्र की सीमा के भीतर स्थित है।
इन शर्तों का रखना होगा ध्यान
वाहन निजी इस्तेमाल के लिए पंजीकृत होना चाहिए, यानी वह कमर्शियल वाहन नहीं होना चाहिए। वाहन में वैध और चालू FASTag होना जरूरी है। वाहन मालिक का निवास संबंधित टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में होना चाहिए।
इसके लिए उसे आधार या अन्य कोई जरूरी दस्तावेज पास बनवाते समय देना होगा। पास केवल उसी टोल प्लाजा पर मान्य होगा, जिसके लिए इसे जारी किया गया है। अगर वाहन चालक के इस्तेमाल के लिए सर्विस रोड या वैकल्पिक सड़क उपलब्ध है, तो रियायती स्थानीय पास जारी नहीं किया जाएगा।