ट्रम्प बोले- ईरान को रातभर में खत्म कर सकते हैं:घायल पायलट की खबर लीक करने वाले पत्रकार की तलाश, उसे जेल भेजेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान जंग पर सोमवार रात (भारतीय समय के मुताबिक) प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की जंग अच्छी चल रही है। अमेरिका चाहे तो पूरे ईरान को एक रात में खत्म कर सकता है। जरूरत पड़ी तो वह रात कल भी हो सकती है।

ट्रम्प ने यहां तक कहा, “हमारे पास ऐसी प्लानिंग है कि कल रात 12 बजे तक (भारतीय समय के मुताबिक बुधवार सुबह 5:30 बजे) ईरान का हर पुल तोड़ दिया जाएगा और हर पावर प्लांट जला दिया जाएगा। पूरी तरह तबाही होगी।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान से सुरक्षित निकाले गए पायलट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी एजेंसियां उस शख्स की तलाश कर रही हैं, जिसने यह जानकारी लीक की कि पहले पायलट के बचाव के बाद दूसरा पायलट भी ईरान में फंसा हुआ है।

ट्रम्प के मुताबिक पहले ईरान को दूसरे पायलट के ईरान में फंसे होने की जानकारी नहीं थी, लेकिन खबर लीक होने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन और मुश्किल हो गया।

ट्रम्प के प्रेस कॉन्फ्रेंस की 5 बड़ी बातें…

  1. ईरान को धमकी- अमेरिका चाहे तो पूरे ईरान को एक रात में खत्म कर सकता है। जरूरत पड़ी तो यह कार्रवाई कल रात भी हो सकती है। अभी युद्ध अमेरिका के मुताबिक चल रहा है।
  2. रेस्क्यू ऑपरेशन- ईरान में फंसे सैनिक को बचाने के लिए अमेरिका ने 155 सैन्य विमानों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया था। इसमें फाइटर जेट, बॉम्बर्स और रेस्क्यू प्लेन शामिल थे।
  3. ईरान में हजारों हमले किए- अब तक अमेरिका ने ईरान के 13,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया है और पिछले 37 दिनों में 10,000 से ज्यादा लड़ाकू उड़ानें भरी हैं।
  4. खबर लीक करने वाले को धमकी- जिस इंसान ने मीडिया में ईरान में फंसे दूसरे पायलट के बारे में खबर लीक की है उसे ढूंढा जाएगा। जरूरत पड़ी तो मीडिया कंपनी पर भी कार्रवाई हो सकती है।
  5. अमेरिकी विमान गिरने की बात मानी- ट्रम्प ने माना कि ईरान ने एक अमेरिकी F-15 विमान गिराया था, लेकिन यह दुश्मन की किस्मत थी यानी ये सिर्फ एक लकी हिट थी।

ट्रम्प बोले- रेस्क्यू मिशन के दौरान दुश्मन को धोखे में रखा

ट्रम्प ने ईरान में फंसे अमेरिकी पायलट को बचाने वाले ऑपरेशन को ‘ऐतिहासिक’ बताया। उन्होंने कहा, “मैंने अमेरिकी सेना को आदेश दिया था कि हमारे बहादुर सैनिकों को सुरक्षित घर लाने के लिए जो भी जरूरी हो, वह किया जाए।”

उन्होंने कहा, ‘यह बहुत जोखिम भरा फैसला था, क्योंकि हमने 1-2 पायलट को निकालने के लिए 100 जान को दांव पर लगा दिया था।’ ट्रम्प ने इसे हाल के दशकों में सबसे खतरनाक ऑपरेशनों में से एक बताया।

ट्रम्प ने यह भी बताया कि दोनों पायलट को बचाने के लिए दो रेस्क्यू मिशन किए गए। पहले मिशन में 21 अमेरिकी सैन्य विमान लगाए गए थे। जबकि दूसरे रेस्क्यू मिशन में कुल 155 अमेरिकी विमान शामिल थे। इनमें 4 बॉम्बर विमान, 64 फाइटर जेट, 48 ईंधन भरने वाले टैंकर विमान और 13 रेस्क्यू विमान शामिल थे।

ट्रम्प के मुताबिक ये सभी कई घंटों तक ईरान के ऊपर ऑपरेशन करते रहे, कुछ समय तो दिन के उजाले में भी। इस मिशन में धोखे की रणनीति (डिकॉय) का भी इस्तेमाल किया गया। कई विमानों को अलग-अलग रास्तों पर भेजा गया ताकि दुश्मन भ्रमित हो जाए।

ट्रम्प ने कहा, ‘हमने सात अलग-अलग जगहों पर ऐसा माहौल बनाया, जहां उन्हें लगा कि हम अपने सैनिक को ढूंढ रहे हैं।’

ट्रम्प ने पायलट की बहादुरी का भी जिक्र किया

ट्रम्प ने एक घायल पालयट की बहादुरी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब F-15E फाइटर जेट गिराया गया तो उसमें मौजूद अधिकारी पैराशूट से नीचे उतरा और गंभीर हालत में भी खुद को बचाने की कोशिश करता रहा।

उन्होंने कहा, ‘वह पहाड़ी इलाके में घायल होने के बावजूद चढ़ाई करता रहा, उसके चेहरे से काफी खून बह रहा था। लेकिन फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपनी ट्रेनिंग के अनुसार खतरनाक पहाड़ी इलाके में ऊपर की ओर चढ़ता गया, ताकि दुश्मन से बच सके और पकड़ा न जाए।’

ट्रम्प के मुताबिक घायल अफसर ने खुद ही अपने जख्मों का इलाज किया और अमेरिकी फोर्स से संपर्क बनाए रखा। बाद में उसे हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित निकाल लिया गया। उन्होंने कहा यह हैरान करने वाली बात है कि पूरे ऑपरेशन में कोई भी घायल नहीं हुआ

ट्रम्प बोले- ऑपरेशन के लिए सभी सहमत नहीं थे

ट्रम्प ने कहा कि ईरान में गिराए गए F-15E फाइटर जेट के क्रू को बचाने वाले ऑपरेशन को लेकर उनके सभी सैन्य सलाहकार एकमत नहीं थे। उन्होंने कहा, “हर कोई इसके पक्ष में नहीं था। कुछ बहुत प्रोफेशनल सैन्य अधिकारी ऐसे थे, जो इस ऑपरेशन को करने के पक्ष में नहीं थे।”

ट्रम्प के मुताबिक इस मिशन में जान का बड़ा खतरा था, इसी वजह से कुछ सलाहकार इसे सही नहीं मान रहे थे। उन्होंने कहा, ‘सेना के अंदर कुछ लोगों का मानना था कि यह समझदारी भरा फैसला नहीं है। सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी।’

हालांकि, ट्रम्प के मुताबिक रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन इस मिशन के समर्थन में थे। ट्रम्प ने कहा कि उन्हें इस ऑपरेशन के खतरे के बारे में पूरी जानकारी दी गई थी।

उन्होंने बताया, “मुझे कहा गया कि यह बहुत खतरनाक मिशन है। मैंने इसे समझा। उन्होंने यह नहीं कहा कि यह बेवकूफी है, बल्कि कहा कि इसमें सैकड़ों लोगों की जान जा सकती है।”

ट्रम्प ने पहली बार अमेरिकी प्लेन गिरने की बात मानी

ट्रम्प कहा कि पिछले 37 दिनों में अमेरिकी सेना ने ईरान के ऊपर 10,000 से ज्यादा कॉम्बैट फ्लाइट्स की हैं। उन्होंने यह भी माना कि पिछले हफ्ते ईरान में एक अमेरिकी F-15 विमान गिराया गया। ट्रम्प ने कहा कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान दुश्मन ने पहली बार कोई मानव संचालित विमान गिराया।

ट्रम्प ने आगे कहा, “एक हेलिकॉप्टर गोलियों से बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर वापस लौटा। यह कमाल की बात है कि हमारे हेलिकॉप्टर ने यह सब झेल लिया। हमारी मशीन बहुत जबर्दस्त है।”

पायलट की खबर लीक करने वाले पत्रकार की तलाश

ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी एजेंसियां उस शख्स की तलाश कर रही हैं, जिसने यह जानकारी लीक की कि पहले पायलट के बचाव के बाद दूसरा पायलट भी ईरान में फंसा हुआ है।

उनके मुताबिक, इस खबर से पहले ईरान को दूसरे पायलट की स्थिति की जानकारी नहीं थी, लेकिन लीक होने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन और मुश्किल हो गया।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि जिस पत्रकार ने इस खबर को प्रकाशित किया, अगर वह अपने सोर्स (सूचना देने वाले) का नाम नहीं बताएगा, तो उसे जेल भेजा जा सकता है।

उन्होंने कहा, “हम उस लीक करने वाले को ढूंढने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हमें लगता है कि हम उसे ढूंढ लेंगे, क्योंकि हम उस मीडिया कंपनी के पास जाएंगे और कहेंगे। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, जानकारी दो या जेल जाने के लिए तैयार रहो।”

ट्रम्प बोले- आजादी के लिए ईरान के लोग थोड़ा दर्द सहेंगे

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक पत्रकार ने ट्रम्प से सवाल पूछा कि ईरान में ऊर्जा ठिकाने और इंफ्रास्क्ट्रक्चर पर हमला करना क्या आम नागरिकों को सजा देना नहीं है? इस पर उन्होंने कहा कि अगर ईरान पर हमले से वहां के लोगों को आजादी मिलती है, तो वे “इस दर्द को सहने के लिए तैयार होंगे।”

ट्रम्प ने यह भी दावा किया कि ईरान के लोग चाहते हैं कि अमेरिकी सेना अपनी बमबारी जारी रखे। उन्होंने कहा, “हमें कई मैसेज मिले हैं। जिन इलाकों में बम गिर रहे हैं, वहीं रहने वाले लोग भी कह रहे हैं, ‘बमबारी जारी रखो।’ और जब हम वहां से हटते हैं, तो वे कहते हैं- वापस आओ, वापस आओ”

जंग खत्म होने या बढ़ने पर कहा- यह ईरान तय करेगा

ट्रम्प ने यह साफ नहीं किया कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध खत्म होने की ओर है या और बढ़ सकता है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे युद्ध को कम कर रहे हैं या बढ़ा रहे हैं, तो ट्रम्प ने कहा, “मैं यह नहीं बता सकता। यह इस पर निर्भर करता है कि वे क्या करते हैं। यह बहुत अहम समय है।”

ट्रम्प ने ईरान को दिए गए अल्टीमेटम का भी जिक्र किया, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए समय सीमा तय की गई है। उन्होंने कहा, “उनके पास कल रात 8 बजे (अमेरिकी समय के मुताबिक) तक का समय है। मैंने उन्हें थोड़ा ज्यादा समय दिया है।”

उन्होंने बताया कि पहले यह समय सीमा सोमवार के लिए तय थी, लेकिन ईस्टर (ईसाईयों का त्योहार) के अगले दिन इसे लागू करना ठीक नहीं लगा। ट्रम्प ने कहा, “सोमवार की डेडलाइन ठीक नहीं थी क्योंकि वह ईस्टर के अगले दिन थी। मैं अच्छा इंसान बनना चाहता हूं।”