चानू ने भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स का पहला गोल्ड दिलाया:190 kg वजन उठाया, लगातार तीसरी बार चैंपियन बनीं; ऋषिकांत और मुथुपांडी को सिल्वर

मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहला गोल्ड मेडल दिला दिया है। उन्होंने विमेंस वेटलिफ्टिंग की 48 kg वेट कैटेगरी में कुल 190 किलो वजन उठाया। भारतीय वेटलिफ्टर ने स्नैच में 85 किलो और क्लीन एंड जर्क में 105 किलो वजन उठाया।

मीराबाई का यह लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड है। उन्होंने 2018 के गोल्डकोस्ट और 2022 के बर्मिंघम गेम्स में भी गोल्ड जीता था। वे ग्लासगो गेम्स 2014 में सिल्वर भी जीत चुकी हैं।

रविवार को ही ऋषिकांत सिंह ने मेंस 60 kg और राजा मुथुपांडी ने मेंस 65 kg वेट कैटेगरी में सिल्वर मेडल अपने नाम किए। ऋषिकांत ने 264 kg (121+143) और राजा ने 286 kg (126+160) वजन उठाया। झंडू कुमार ने शुक्रवार को पैरा पावरलिफ्टिंग में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

ग्लासगो गेम्स में भारत के अब 4 मेडल (1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज) हो गए हैं। भारत मेडल टैली में आठवें स्थान पर है। ऑस्ट्रेलिया 17 गोल्ड सहित 39 मेडल के साथ टॉप पर बना हुआ है।

चानू ने गेम्स रिकॉर्ड बनाया

टोक्यो ओलिंपिक की सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई स्नैच के पहले प्रयास में 82 किलो वजन नहीं उठा पाई। इसके बाद उन्होंने दूसरे में 82 और तीसरे में 85 किलो उठाकर कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड बना दिया। चानू क्लीन एंड जर्क में भी पहला प्रयास चूक गईं। उन्होंने दूसरे प्रयास में 105 किलो उठाकर गोल्ड अपने नाम किया।

ऋषिकांत का दूसरा कॉमनवेल्थ गेम्स

यह ऋषिकांत का दूसरा कॉमनवेल्थ गेम्स था। उन्होंने ग्लासगो में पुरुषों के 60kg वेट में सिल्वर मेडल जीता। गोल्ड मलेशिया के अनीक कसदान के नाम रहा। इससे पहले वह बर्मिंघम 2022 में 55kg वेट में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। ऋषिकांत मौजूदा कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप के चैंपियन भी हैं।

2009 में मणिपुर स्पोर्ट्स अकादमी से शुरुआत की थी

मणिपुर वेटलिफ्टिंग एसोसिएशन के सेक्रेटरी और ऋषिकांत सिंह के शुरुआती कोच ब्रोजेंद्रो सिंह ने बताया कि ऋषिकांत ने 2009 में मणिपुर स्पोर्ट्स अकादमी से वेटलिफ्टिंग की शुरुआत की थी। इसके बाद उनका चयन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के सेंटर में हुआ। बाद में वे भारतीय नौसेना से जुड़े और वहां ट्रेनिंग लेने के बाद भारतीय सेना के स्पोर्ट्स सेट-अप का हिस्सा बने।

ब्रोजेंद्रो सिंह ने बताया कि ऋषिकांत के परिवार में दो भाई हैं। उनके बड़े भाई भारतीय सेना में हैं।

राजा मुथुपंडी का चोट के बाद शानदार वापसी, अब कॉमनवेल्थ में सिल्वर जीता

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के राजा मुथुपंडी ने पुरुषों के 65kg वेटलिफ्टिंग इवेंट में सिल्वर मेडल जीता। उन्होंने स्नैच में 126kg और क्लीन एंड जर्क में 160kg समेत कुल 286kg वजन उठाया। यह भारत का दिन का तीसरा और वेटलिफ्टिंग में चौथा मेडल रहा।

मलेशिया के अजनील बिन बिदिन मोहम्मद ने कुल 299kg वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने गोल्ड कोस्ट 2018, बर्मिंघम 2022 और अब ग्लासगो 2026 में लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गेम्स खिताब अपने नाम किया।

2019 में चोटिल हो गए थे राजा का करियर 2019 में कोहनी के लिगामेंट की गंभीर चोट से पटरी से उतर गया था। कोविड-19 के कारण उनकी वापसी में और देरी हुई। इसी दौरान जेरेमी लालरिनुंगा के उभरने से वह बर्मिंघम 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स नहीं खेल सके।

65kg वेट कैटेगरी शुरू होने के बाद उन्होंने भारतीय टीम में वापसी की। 2025 वर्ल्ड चैंपियनशिप में 299kg के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ नौवें स्थान पर रहे। अब ग्लासगो में सिल्वर जीतकर उन्होंने वापसी की कहानी को यादगार बना दिया।

राजा के सिल्वर के साथ वेटलिफ्टिंग में भारत के चार मेडल हो गए हैं। टीम अब तक 1 गोल्ड, 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज जीत चुकी है।

ग्लासगो में वेटलिफ्टिंग में 11 कोटा मिला

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को वेटलिफ्टिंग के लिए 11 कोटा मिला है। डोपिंग रोधी नियमों (ADRV) के कई उल्लंघनों के कारण यह संख्या 16 से घटकर 11 रह गई। वहीं, पीठ की चोट के कारण वेटलिफ्टर दिलबाग सिंह टीम का हिस्सा नहीं बन सके।

बर्मिंघम गेम्स 2022 में 10 मेडल मिले थे

बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारत के 15 वेटलिफ्टरों ने हिस्सा लिया था। भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 मेडल जीते थे। इनमें 3 गोल्ड, 3 सिल्वर और 4 ब्रॉन्ज शामिल थे।

वेटलिफ्टिंग में मेडल कैसे जीतते हैं?

वेटलिफ्टिंग में दो इवेंट होते हैं। स्नैच और क्लीन एंड जर्क दोनों में खिलाड़ी को बारबेल को जमीन से सिर के ऊपर तक उठाना होता है, लेकिन दोनों की तकनीक अलग होती है।

1. स्नैच : स्नैच में खिलाड़ी एक ही मूवमेंट में बारबेल को जमीन से उठाकर सीधे सिर के ऊपर ले जाता है। इस दौरान वह बारबेल के नीचे स्क्वाट की स्थिति में आता है और फिर खड़ा होकर वजन को नियंत्रित करता है। इस इवेंट में गति, संतुलन, ताकत और लचीलेपन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।

2. क्लीन एंड जर्क : यह इवेंट दो चरणों में पूरा होता है।

क्लीन: खिलाड़ी बारबेल को जमीन से उठाकर अपने कंधों तक लाता है।

जर्क: इसके बाद पैरों और कंधों की ताकत की मदद से बारबेल को सिर के ऊपर ले जाकर हाथ पूरी तरह सीधे करता है।

विजेता कैसे तय होता है?

दोनों इवेंट में खिलाड़ी को तीन-तीन प्रयास मिलते हैं। स्नैच और क्लीन एंड जर्क में सफल सबसे ज्यादा वजन को जोड़कर कुल वजन (टोटल) निकाला जाता है। सबसे अधिक कुल वजन उठाने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है।

उदाहरण: अगर किसी खिलाड़ी ने स्नैच में 120kg और क्लीन एंड जर्क में 151kg वजन उठाया, तो उसका कुल 271kg माना जाएगा। यही उसका आधिकारिक टोटल होता है।

1934 में भारत पहली बार खेला था