अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को दावा किया कि गाजा में हमास और इजराइल के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। हमास और दूसरे सभी हथियारबंद संगठनों ने हथियार छोड़ने पर सहमति जताई है। इसके बाद इजराइली सेना भी गाजा से पीछे हटेगी।
कई स्टेप्स में लागू होगा समझौता
ट्रम्प के मुताबिक समझौता कई चरणों में लागू होगा। जैसे-जैसे हमास अपने हथियार छोड़ेगा, वैसे-वैसे इजराइली सेना गाजा से हटेगी। इसके बाद एक इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स और नई फिलिस्तीनी पुलिस गाजा की सुरक्षा संभालेंगे।
द टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, हमास के हथियार छोड़ने की मंजूरी के बाद अब 14 दिन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसके तहत समझौते के हर चरण को लागू करने की टाइमलाइन तय की जाएगी।
ट्रम्प ने कहा,
यह डील अमेरिका के 20-पॉइंट गाजा प्लान का सबसे अहम हिस्सा है और गाजा में स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम है।
दावा- ईरान ने हमास को प्रस्ताव न मानने को कहा
एक सीनियर अमेरिकी अधिकारी ने दावा किया है कि ईरान चाहता था कि हमास यह समझौता न करे। हालांकि, अब ईरान पहले की तरह हमास की मदद करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए हमास ने अपने और गाजा के लोगों के हित को देखते हुए फैसला लिया।
द टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) के अधिकारियों ने पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में पहुंचे हमास डेलिगेशन से जल्दबाजी में प्रस्ताव स्वीकार नहीं करने को कहा था। हालांकि, आखिरकार हमास ने यह प्रस्ताव मान लिया।
समझौता लागू करने में 5 बड़ी चुनौतियां
1. हमास का हथियार छोड़ना सबसे बड़ी चुनौती- हमास और दूसरे सभी हथियारबंद गुटों को चरणबद्ध तरीके से हथियार सौंपने होंगे। अगर कोई गुट नहीं माना, तो पूरा समझौता प्रभावित हो सकता है।
2. इजराइली सेना की वापसी चरणों में होगी- हमास के हथियार छोड़ने की पुष्टि के बाद ही इजराइली सेना धीरे-धीरे गाजा से पीछे हटेगी। दोनों पक्षों को साथ-साथ कदम उठाने होंगे।
3. नई सुरक्षा व्यवस्था बनाना आसान नहीं- इजराइली सेना के हटने के बाद गाजा की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल और नई फिलिस्तीनी पुलिस संभालेगी। इसके लिए बड़ी तैयारी और तालमेल की जरूरत होगी।
4. नई फिलिस्तीनी सरकार को समर्थन चाहिए- गाजा का प्रशासन नई तकनीकी फिलिस्तीनी सरकार संभालेगी। लेकिन उसे स्थानीय लोगों, फिलिस्तीनी गुटों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भरोसा जीतना होगा।
5. जमीन पर लागू होने में समय लगेगा- हथियारों की जांच, सेना की वापसी, नई सरकार का गठन और सुरक्षा व्यवस्था लागू होने जैसी प्रक्रियाओं में कई महीने लग सकते हैं।
बोर्ड ऑफ पीस क्या है?
- ट्रम्प ने पहली बार सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा था।
- इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने का भी काम करेगा।
- बोर्ड ऑफ पीस चार्टर के मुताबिक, जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा।