पंजाब विधानसभा चुनाव से करीब 7 महीने पहले कांग्रेस में गुटबाजी तेज हो गई है। इस तनातनी के बीच प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा रील ज्यादा डालने से कोई नहीं जीतता। पंजाब में कोई किसी को जीता या हरा नहीं सकता। अगर लीडर काम का नहीं है तो वह नहीं जीतेगा, चाहे सोशल मीडिया पर जितनी भी पोस्ट कर ले या रील डाल ले।
वड़िंग के इस बयान को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके छोटे बेटे रिदमजीत सिंह द्वारा हाल ही में सोशल मीडिया पर शेयर की गई रील से जोड़कर देखा जा रहा है। कुछ दिन पहले रिदमजीत ने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक रील शेयर की थी। इसमें चन्नी और उनके पीछे समर्थक दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में डायलॉग है- कुछ लोग गलतफहमी में हैं कि हम जवाब नहीं देंगे। तैयारी थोड़ी बड़ी है, सब्र रखो, पल-पल का हिसाब लेंगे।
एक दिन (1 अगस्त) पहले संगरूर और पटियाला में हुए दो अलग-अलग कार्यक्रमों में पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और वड़िंग गुट आमने-सामने आ गए। पटियाला के समाना में कार्यक्रम के दौरान चन्नी समर्थकों ने राजा वड़िंग का विरोध कर दिया। उन्होंने वड़िंग की हूटिंग करते हुए चन्नी के समर्थन में जमकर नारेबाजी की।
इसके बाद संगरूर के कैलिफोर्निया रिजॉर्ट में कांग्रेस वर्करों में झड़प हो गई। भूपेश बघेल मुर्दाबाद के नारे लगाए। एक-दूसरे पर कुर्सियां मारीं और चरणजीत चन्नी जिंदाबाद के नारे लगाए। आज प्रभारी भूपेश बघेल की बरनाला और मानसा में मीटिंग्स हैं। इनमें भी हंगामे के असार हैं।
सस्पेंड पूर्व MLA ने कहा- वड़िंग को हटाकर रहेंगे सस्पेंड किए गए पटियाला की घनौर सीट के पूर्व एमएलए मदनलाल जलालपुर ने कहा कि अब राजा वड़िंग का बदलना तय है। जलालपुर ने साफ कहा कि भूपेश बघेल ने पूरी कांग्रेस लीडरशिप से बात के बाद कहा था कि प्रधान बदलना खेल नहीं है, लेकिन वड़िंग अब प्रधान नहीं रहेगा।
चन्नी ने प्रभारी के दौरे का बायकॉट किया पूर्व CM चरणजीत चन्नी ने प्रभारी भूपेश बघेल के दौरे का बायकॉट कर रखा है। पंजाब में हर बूथ कांग्रेस मजबूत करने की मुहिम राजा वड़िंग की अगुआई में चलाई जा रही है। जिस वजह से चन्नी और उनके साथ चल रहे सांसद सुखजिंदर रंधावा भी इस मुहिम से दूर हैं।
कल शुक्रवार को भी फतेहगढ़ साहिब में हुए कार्यक्रम में चन्नी नहीं पहुंचे थे। यहां सिर्फ राजा वड़िंग व उनके गुट के नेता ही मौजूद थे। यहां प्रधान राजा वड़िंग ने दावा किया था कि AAP के 6 सांसदों के बाद अब 40 से 45 विधायक भी पार्टी छोड़ सकते हैं, उन्हें लग रहा है कि 2027 के चुनाव में उनकी टिकट काटी जा सकती है। इस बारे में सीक्रेट मीटिंग भी हो चुकी है।
चन्नी और वड़िंग में CM फेस और वर्चस्व की लड़ाई राजा वड़िंग को दोबारा पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपे जाने के बाद से पंजाब कांग्रेस की अंतरकलह सार्वजनिक मंचों पर सामने आई। पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं का मानना है कि पंजाब में लगभग 32 फीसदी दलित आबादी को ध्यान में रखते हुए पार्टी को आगामी चुनावों से पहले मुख्यमंत्री के चेहरे या मजबूत नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हाल ही में बंद कमरे में भूपेश बघेल के साथ हुई बैठकों के बाद चन्नी के बयानों ने इस गुटबाजी को और सार्वजनिक कर दिया।
दूसरी ओर, आक्रामक शैली और युवाओं में पकड़ रखने वाले राजा वड़िंग का तर्क है कि पार्टी आलाकमान का निर्णय सर्वोपरि है। उन्होंने हालिया बयानों में यह स्पष्ट किया कि यदि आलाकमान कल उन्हें पद से हटा भी दे या टिकट न दे, तब भी वे सच्चे सिपाही की तरह कांग्रेस के साथ रहेंगे।
जानें ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ से पार्टी को क्या फायदा
- निराश हो चुके काडर का पुनर्गठन: सूबा स्तर के नेताओं की आपसी जंग से नीचे का कार्यकर्ता हताश न हो, इसके लिए पार्टी सीधे ब्लॉक और बूथ स्तर के पदाधिकारियों से संवाद साध रही है। भूपेश बघेल पंजाब में इस बार 2 पार्टियों नहीं बल्कि 5 पार्टियों के बीच मुकाबला मान रहे हैं। फतेहगढ़ साहिब की मीटिंग में बघेल ने कहा कि अगर कांग्रेस का कार्यकर्ता बूथ पर रहेगा तो उनको पीएम नरेंद्र मोदी या होम मिनिस्टर अमित शाह खुद भी नहीं हरा सकते।
- गुटबाजी से ध्यान हटाकर ग्राउंड कनेक्ट बढ़ाना: पार्टी के सोशल मीडिया हैंडल्स और आधिकारिक मंचों के जरिए संदेश दिया जा रहा है कि नेताओं से बड़ा संगठन है। बूथ-स्तर पर मजबूती से नेताओं की आपसी खींचतान का असर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर कम पड़ेगा। मंच से कांग्रेस प्रधान राजा वड़िंग ने साफ कर दिया कि 2027 का चुनाव बड़े मंचों से नहीं बल्कि बूथ और मोबाइल पर लड़ा जाएगा।
- सत्तारूढ़ AAP और BJP को चुनौती: पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ बन रहे माहौल (नशा, कानून-व्यवस्था, गैंगस्टर नेटवर्क) को सीधे बूथ स्तर पर भुनाने के लिए कांग्रेस इस अभियान को धार दे रही है। इसके साथ ही भाजपा पहले ही डेरों और बूथ लेवल पर माइक्रोमैनेजमेंट कर रही है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी में बीते 5 साल में हर जिले में अपने प्रभारी लगाए हैं। कांग्रेस ने गुटबाजी से ध्यान हटाने और इन सबकी काट के लिए ही थी हर बूथ मजबूत अभियान लांच किया है।
- अनुशासन का कड़ा संदेश: अभियान के दौरान आजाद चुनाव लड़ चुके कई कांग्रेस नेताओं को शामिल नहीं किया गया है। इनमें पूर्व सीएम चरनजीत चन्नी के भाई डॉ. मनोहर सिंह भी शामिल हैं। डॉ. मनोहर को न बुलाने के सवाल पर बघेल ने कहा कि कहा कि जो लोग कांग्रेस का हिस्सा नहीं हैं, उन्हें बैठक में नहीं बुलाया गया। ऐसे करके पार्टी ने यूथ को संदेश दिया है कि जो पार्टी लाइन से अलग चलेगा वह हमेशा पार्टी से दूर हो जाएगा। पुराने नेताओं के जरिए नए और मौजूदा नेताओं को अनुशासन का भी कड़ा संदेश दिया जा रहा है।