दतिया उपचुनाव की मतगणना से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस से निष्कासित पूर्व विधायक राजेंद्र भारती ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में कई बड़े राजनीतिक दावे किए।
उन्होंने कांग्रेस के नवनिर्वाचित विधायक घनश्याम सिंह पर भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा के “रिमोट कंट्रोल” पर काम करने का आरोप लगाया।
दावा किया कि उनकी विधानसभा सदस्यता बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से स्थगन (स्टे) दिलाने का प्रस्ताव भी उन्हें दिया गया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। निष्कासन, भितरघात के आरोप, उपचुनाव और अपनी राजनीतिक रणनीति पर राजेंद्र भारती ने खुलकर बात की।
सवाल: आपके निष्कासन को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। क्या आपको लगता है कि आपको बलि का बकरा बनाया गया?
राजेंद्र भारती: हमें बलि का बकरा बनने से कोई परेशानी नहीं है। हमारा लक्ष्य उस व्यक्ति की राजनीति को खत्म करना था, जिसने वर्षों तक दतिया में भय और दबाव का माहौल बनाया। 2023 में जनता ने अपना जनादेश देकर उसे नकार दिया। हमारे खिलाफ साजिश रची गई, फर्जी मामलों में फंसाकर अयोग्य कराया गया, लेकिन हमारी राजनीति खत्म नहीं हुई। विधायक रहना या न रहना हमारे लिए सबसे बड़ी बात नहीं है।
सवाल: कांग्रेस का आरोप है कि आपने पार्टी के खिलाफ काम किया और भीतरघात किया।
राजेंद्र भारती: यह पूरी तरह बेबुनियाद और मनगढ़ंत आरोप है। हमने 2013 से कांग्रेस के लिए संघर्ष किया। अगर हमने पार्टी के खिलाफ काम किया होता तो इतने वर्षों तक संघर्ष क्यों करते? जिन लोगों ने आरोप लगाए हैं, पहले वे बताएं कि उनके चुनावों में फंडिंग किसने की। हमारा आरोप है कि उनके डॉ. नरोत्तम मिश्रा से पुराने संबंध रहे हैं।
सवाल: आप घनश्याम सिंह और डॉ. नरोत्तम मिश्रा की सांठगांठ की बात किस आधार पर कह रहे हैं?
राजेंद्र भारती: जब हमने डॉ. नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ पेड न्यूज का मामला चुनाव आयोग में लगाया था, तब घनश्याम सिंह का नाम गवाह के रूप में दिया था, लेकिन उन्होंने गवाही देने से इनकार कर दिया। इससे उनके संबंधों का अंदाजा लगाया जा सकता है। आज भी वे डॉ. मिश्रा की तारीफ करते हैं। मेरे मुताबिक वे उनके रिमोट कंट्रोल पर काम कर रहे हैं।
सवाल: उपचुनाव में कांग्रेस की जीत को आप किस रूप में देखते हैं?
राजेंद्र भारती: यह जनता का जनादेश हमारे वर्षों के संघर्ष का परिणाम था। 2009 से हम लगातार डॉ. नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ लड़ते रहे। घनश्याम सिंह का इसमें क्या योगदान रहा? वे वर्षों तक दतिया से दूर रहे और चुनाव भी हारते रहे। मजबूत भाजपा नेता को हराने का काम हमने किया।
सवाल: आपने दावा किया है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने आपको सुप्रीम कोर्ट से स्टे दिलाने का प्रस्ताव दिया था। पूरा मामला क्या है?
राजेंद्र भारती: हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद हमने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। उसी दौरान डॉ. नरोत्तम मिश्रा की टिकट कट गई थी। हमारे वकील के पास उनके दो वकील पहुंचे। संदेश यह था कि सुप्रीम कोर्ट से स्टे दिला दिया जाएगा, बस तकनीकी आपत्तियां हटवा दीजिए। उनका मकसद चुनाव रुकवाना था। उन्होंने कहा कि आप ढाई साल विधायक बने रहिए, लेकिन हमने साफ मना कर दिया। समय आने पर संबंधित वकीलों के नाम भी सार्वजनिक करेंगे।
सवाल: क्या कांग्रेस नेतृत्व ने टिकट को लेकर आपसे राय ली थी?
राजेंद्र भारती: पार्टी नेताओं ने कहा था कि आप चुनाव मत लड़िए। हमारे साथ जो हुआ था, उसके बाद जनता में हमारे प्रति सहानुभूति थी। हमने परिवार से किसी को टिकट दिलाने की भी जिद नहीं की। हमारी इच्छा थी कि किसी योग्य ओबीसी चेहरे को मौका मिले।
सवाल: आपका कहना है कि घनश्याम सिंह को टिकट दिलाने के पीछे राजनीतिक गणित था?
राजेंद्र भारती: हमने पहले ही कहा था कि हम चुनाव नहीं लड़ना चाहते। हमारा सुझाव था कि आदेश या किसी अन्य ओबीसी नेता को टिकट दिया जाए। लेकिन जैसे ही डॉ. नरोत्तम मिश्रा की टिकट कटी, घनश्याम सिंह चुनाव लड़ने पर अड़ गए। हमें लगता है कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि सहयोग मिलेगा।
सवाल: क्या आपको निष्कासन की प्रक्रिया पर भी आपत्ति है?
राजेंद्र भारती: बिल्कुल। कांग्रेस के संविधान में अनुशासन समिति का प्रावधान है। किसी भी कार्रवाई से पहले नोटिस देना चाहिए, दोनों पक्षों को सुनना चाहिए और फिर फैसला होना चाहिए। मेरे मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया गया।
सवाल: क्या आपको लगता है कि यह फैसला किसी दबाव में लिया गया?
राजेंद्र भारती: मुझे ऐसा लगता है। आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों हुई? किसके प्रभाव में निर्णय लिया गया, इसका जवाब पार्टी नेतृत्व ही दे सकता है।
सवाल: आपका आरोप है कि दतिया कांग्रेस पर डॉ. नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव रहा है?
राजेंद्र भारती: मैं यही कह रहा हूं कि जो लोग संघर्ष कर रहे थे, उन्हें लगातार परेशान किया गया। हमारे साथी जेल गए, राजनीतिक और आर्थिक नुकसान उठाया, लेकिन कुछ लोगों पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जनता खुद समझ सकती है कि इसका क्या मतलब है।