कश्मीर के कुलगाम में 4 दिन पहले दो बाहरी मजदूरों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। इस हत्या के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने नई सुरक्षा रणनीति पर चर्चा तेज कर दी है।
कश्मीर घाटी में इस वक्त करीब 4 लाख प्रवासी मजदूर रहते हैं। LG मनोज सिन्हा ने इनकी सुरक्षा को लेकर अहम बैठक की है। इसमें कुछ निर्देश तय हुए हैं।
प्रशासन से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इन निर्देशों में दो बातें सबसे अहम हैं।
- पहली- घाटी में जहां प्रवासी मजदूर बिखरे हैं, असुरक्षित जगहों पर रह रहे हैं, उन्हें एक ही जगह ठहराने के लिए क्लस्टर बनाए जाएं। बाहरी मजदूरों को अलग-अलग नहीं रहने दिया जाएगा
- दूसरा- घाटी आने वाले हर नए मजदूर को पास के पुलिस स्टेशन में जानकारी देनी होगी। जहां नया मजदूर रहेगा, पुलिस उस इलाके का सिक्योरिटी वैरिफिकेशन करेगी। उसके बाद मजदूर को वहां रुकने दिया जाएगा।
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बडगाम और दक्षिण कश्मीर पर मुख्य फोकस
घाटी में सैकड़ों ईंट-भट्ठे हैं, अकेले 199 रजिस्टर्ड भट्ठे। ज्यादातर मध्य कश्मीर के बडगाम और दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, कुलगाम और पुलवामा में हैं। पुलिस के अनुसार प्रवासियों को व्यक्तिगत सुरक्षा देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
इसलिए ईंट-भट्टों और बागानों में काम करने वाले यूपी, बिहार और छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को बिखरी हुई झोपड़ियों के बजाय ‘नामित सुरक्षित क्लस्टरों’ में भेजना शुरु कर दिया है।
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बाहरियों की सुरक्षा चुनौती बनी
2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से घाटी में गैर स्थानीय प्रवासियों पर हमले बढ़े हैं। संसदीय आंकड़ों और गृह मंत्रालय के आधिकारिक बयानों के अनुसार इन सात साल में आतंकवादी अब तक करीब 23 प्रवासियों की टारगेट किलिंग कर चुके हैं।
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जम्मू-कश्मीर में जुलाई में हुई दो आतंकी घटनाएं
- 18 जुलाई: राजौरी LoC पर घुसपैठ की कोशिश: जम्मू-कश्मीर के राजौरी में LoC पर 17 जुलाई की रात संदिग्ध गतिविधि देख भारतीय सेना ने फायरिंग की। तारकुंडी फॉरवर्ड इलाके में करीब डेढ़ घंटे तक रुक-रुककर गोलीबारी हुई। सेना का दावा था कि आतंकी घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे।
- 8 जुलाई: शोपियां लश्कर कमांडर जाकिर अहमद ढेर: सुरक्षाबलों ने शोपियां में मुठभेड़ के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर जाकिर अहमद गनी को मार गिराया। वह पहलगाम आतंकी हमले के बाद जारी 14 मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में शामिल था। यह सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF का जॉइंट ऑपरेशन था।