पंचकूला की स्पेशल CBI कोर्ट ने 560 करोड़ रुपए से अधिक के सरकारी फंड घोटाले में IAS अफसर पंकज अग्रवाल की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। सीबीआई ने 22 जून को अग्रवाल को अरेस्ट किया था। गुरुवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुनाया।
अग्रवाल की ओर से वकीलों ने दलील दी कि केस की मूल FIR में उनका नाम नहीं था। न तो कोई रिश्वत मांगी या स्वीकार की। न ही जांच में उनके खिलाफ किसी तरह की मनी ट्रेल या अवैध संपत्ति की बरामदगी हुई है।
दूसरी तरफ सीबीआई ने बेल एप्लीकेशन के विरोध में तर्क दिया कि अग्रवाल के इस फ्रॉड के मास्टर माइंड आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व अधिकारी रिभव ऋषि के करीबी संपर्क थे। इसके बदले अफसर को आर्थिक और अन्य अनुचित लाभ मिले। सरकारी पैसा इधर से उधर करने में सक्रिय भूमिका रही।
उल्लेखनीय है कि पंकज अग्रवाल 10 दिसंबर 2024 से 16 जून 2025 तक स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रहे। इसी दौरान हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) का खाता आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में खुलवाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। फिर 31 दिसंबर 2024 को कोटक महिंद्रा बैंक से 100 करोड़ रुपये इस खाते में ट्रांसफर करने की मंजूरी दी।
बचाव पक्ष: सभी सबूत पुलिस के पास, जेल में रखने का औचित्य नहीं
पंकज अग्रवाल 22 जून 2026 से हिरासत में हैं और उनकी जमानत अर्जी में बचाव पक्ष ने मुख्य तर्क दिया है कि जांच एजेंसी के पास मामले से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक व दस्तावेजी साक्ष्य पहले से मौजूद हैं, इसलिए अब उन्हें जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं बनता। 100 करोड़ रुपए के ट्रांसफर को लेकर सफाई देते हुए वकील ने कहा कि हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) का पैसा किसी गैर-कानूनी या अप्रमाणित बैंक में नहीं भेजा गया था।
यह राशि पहले से ही सरकार द्वारा सूचीबद्ध कोटक महिंद्रा बैंक में जमा थी, जिसे नियमानुसार दूसरे सूचीबद्ध IDFC फर्स्ट बैंक में ट्रांसफर किया गया। IDFC फर्स्ट बैंक अधिक ब्याज की पेशकश कर रहा था और सरकारी नीति में भी अधिक ब्याज देने वाले बैंक का चयन करने का स्पष्ट प्रावधान है। इसी नीति के तहत पंकज अग्रवाल ने केवल अपने अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा तैयार करके भेजे गए प्रस्ताव पर प्रशासनिक मंजूरी दी थी, इसलिए उन पर लगाए गए आरोप निराधार हैं।
पंकज अग्रवाल की हरियाणा, पंजाब व झारखंड में प्रॉपर्टी
सरकार को दाखिल इमूवेबल प्रॉपर्टी रिटर्न (IPR) में पंकज अग्रवाल ने अपनी कुल 3 प्रॉपर्टी दिखाई हैं। ये प्रॉपर्टी पंचकूला, मोहाली (पंजाब) और धनबाद (झारखंड) में हैं। इनमें से सिर्फ एक का मार्केट वैल्यू शो की है। उनकी बेसिक सैलरी 2026 में 2.11 लाख रुपए रुपए है।
पंचकूला के एमडीसी सेक्टर-2 स्थित द हाइलैंड्स सोसाइटी के अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ 59 लाख 72 हजार दिखाई। पंजाब के मोहाली में IAS-PCS को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में प्लॉट नंबर-403 इनके नाम है। हालांकि इसकी मार्केट वैल्यू नहीं दर्शाई है। तीसरी प्रॉपर्टी झारखंड के धनबाद में पैतृक मकान में आधी हिस्सेदारी दिखाई है। मकान के साइज व वैल्यू का ब्योरा नहीं दिया।
क्या है बैंक घोटाला और पंकज अग्रवाल पर क्या आरोप….
फरवरी 2026 में सामने आया था घोटाला
बैंक घोटाले का मामला फरवरी 2026 में सामने आया था। IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के कुछ अधिकारियों ने हरियाणा सरकार के 8 विभागों के पैसे को फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट और डेबिट नोट्स के जरिए निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया।
हरियाणा सरकार के अनुरोध पर CBI ने यह जांच राज्य विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो से अपने हाथ में ली थी। अब तक एजेंसी इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 कर्मचारी, 2 कंपनियां और 6 निजी व्यक्ति शामिल बताए गए हैं। इस घोटाले का मास्टरमाइंड IDFC फर्स्ट बैंक का तत्कालीन मैनेजर रिभव ऋषि है। वह पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।
- खाता खोलने में नियमों की अनदेखी का आरोप : CBI का दावा है कि स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रहते हुए पंकज अग्रवाल ने IDFC फर्स्ट बैंक में खाता खोलने की मंजूरी देते समय निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया। जब विभाग के एक जूनियर अधिकारी ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FDR) संबंधी नियमों का हवाला देते हुए आपत्ति जताई, तब भी अग्रवाल ने दबाव बनाकर खाता खुलवाया।
- 50 करोड़ की सीमा थी, 100 करोड़ ट्रांसफर कराए : CBI के मुताबिक, नियमों के अनुसार संबंधित खाते में अधिकतम 50 करोड़ रुपए ही जमा किए जा सकते थे। इसके बावजूद पंकज अग्रवाल की कथित मंजूरी से कोटक महिंद्रा बैंक से सीधे 100 करोड़ रुपए नए खाते में ट्रांसफर करा दिए गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान वित्तीय नियमों और प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई।