क्या बेमन से दीपक प्रकाश बनाए गए MLC:NDA का कोई बड़ा नेता शपथ ग्रहण में शामिल नहीं हुआ; किसी ने बधाई तक नहीं दी

पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने बिहार विधान परिषद (MLC) के सदस्य के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने उन्हें शपथ दिलाई।

शपथ ग्रहण समारोह में उपेंद्र कुशवाहा, RLM के प्रदेश अध्यक्ष आलोक सिंह, विधायक दल के नेता माधव आनंद, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रमेश्वर महतो समेत पार्टी के अन्य नेता मौजूद रहे।

हालांकि, भाजपा की ओर से केवल पूर्व मंत्री हरि सहनी कार्यक्रम में शामिल हुए। बिहार NDA के शीर्ष नेताओं में से कोई भी इस समारोह में नजर नहीं आया।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री और भाजपा-जदयू के अन्य प्रमुख नेता कार्यक्रम से दूर रहे। हाल के महीनों में हुए अन्य शपथ ग्रहण समारोहों में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्वयं मौजूद रहे थे।

ऐसे में दीपक प्रकाश के कार्यक्रम से NDA के बड़े नेताओं की अनुपस्थिति ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि कहीं उन्हें MLC बनाने का फैसला बेमन से तो नहीं लिया गया था। इतना ही नहीं किसी ने बधाई तक नहीं दी।

जब 9 एमएलसी ने ली थी शपथ, तब मौजूद थे मुख्यमंत्री

जुलाई 2026 की शुरुआत में बिहार विधान परिषद सभागार में नवनिर्वाचित और मनोनीत नौ विधान पार्षदों का भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया था। उस कार्यक्रम को एनडीए के शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया था। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी खुद समारोह में पहुंचे थे और सभी नए सदस्यों को शुभकामनाएं दी थीं।

उस समारोह में भाजपा के पवन सिंह, संजय मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित ने शपथ ली थी। वहीं जदयू की ओर से निशांत कुमार, ललन कुमार, शिवरानी देवी और भारती मेहता तथा एलजेपी (रामविलास) से अशरफ अंसारी ने भी सदस्यता की शपथ ली थी।

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला बड़ा शपथ ग्रहण समारोह था, जिसमें उनकी मौजूदगी को एनडीए की एकजुटता का संदेश माना गया था।

आरजेडी एमएलसी सोनू कुमार राय के शपथ ग्रहण में भी पहुंचे थे मुख्यमंत्री

21 मई 2026 को भोजपुर-बक्सर क्षेत्र से आरजेडी के नवनिर्वाचित एमएलसी सोनू कुमार राय के शपथ ग्रहण समारोह में भी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मौजूद रहे थे। उस दौरान मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एक ही मंच पर बैठे, दोनों के बीच अनौपचारिक बातचीत भी हुई। यह तस्वीर काफी चर्चा में रही थी।

शपथ लेने के बाद सोनू कुमार राय ने तेजस्वी यादव का अभिवादन करने के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया था।

ऐसे में दीपक प्रकाश के कार्यक्रम से दूरी क्यों?

दीपक प्रकाश का शपथ ग्रहण अलग नजर आया। दीपक प्रकाश न केवल बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, बल्कि एनडीए के सहयोगी दल राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे भी हैं। इसके बावजूद समारोह में गठबंधन के शीर्ष नेताओं की अनुपस्थिति ने कई तरह की राजनीतिक अटकलों को जन्म दे दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद तेज हुई थी प्रक्रिया

दीपक प्रकाश पिछले कई महीनों से बिना किसी सदन के सदस्य बने मंत्री पद पर कार्य कर रहे थे। संविधान के अनुच्छेद 164(4) के अनुसार कोई भी व्यक्ति बिना विधायक या विधान पार्षद बने अधिकतम छह महीने तक ही मंत्री रह सकता है।

इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई थी, जिस पर सुनवाई के दौरान अदालत ने बिहार सरकार से सवाल भी पूछे थे। इसके बाद सरकार ने तेजी से संवैधानिक प्रक्रिया पूरी की।

भाजपा एमएलसी के इस्तीफे से खाली हुई थी सीट

दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने के लिए भाजपा के विधान पार्षद देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दिया। उनके इस्तीफे से सीट खाली हुई, जिसके बाद राज्य सरकार की अनुशंसा पर राज्यपाल ने दीपक प्रकाश को 16 मार्च 2027 तक के लिए विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया।

इसी मनोनयन के बाद उन्होंने एमएलसी के रूप में शपथ ली और मंत्री पद पर बने रहने का संवैधानिक रास्ता साफ हुआ।

इससे पहले जून 2026 में हुए विधान परिषद चुनाव के दौरान भी दीपक प्रकाश को टिकट नहीं मिलने पर उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी और एनडीए के भीतर सीटों को लेकर खींचतान की चर्चाएं सामने आई थीं।