आज से इंदौर में दूध महंगा, किसान-संघ आमने-सामने:विक्रेता संघ ने ₹65 का नया रेट तय किया, किसान बोले- ₹70 से कम मंजूर नहीं

इंदौर में 1 अक्टूबर से दूध की कीमत बढ़ने जा रही है। इंदौर दूध विक्रेता संघ ने घर पहुंच दूध का रेट 63 से बढ़ाकर 65 रुपए प्रति लीटर और दुकानों पर खुले दूध का रेट 68 रुपए प्रति लीटर करने का ऐलान किया है।

दूसरी ओर, मध्यप्रदेश दूध किसान संघ ने इस बढ़ोतरी को नाकाफी बताते हुए किसानों को 70 रुपए प्रति लीटर खरीद मूल्य देने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि मांग नहीं मानी गई तो दूध की सप्लाई रोकने पर फैसला लिया जा सकता है।

किसानों की मांग-खरीद रेट 70 रुपए हो

मध्यप्रदेश दूध किसान संघ के अध्यक्ष दिलीप सिंह पंवार ने कहा कि हाल में हुई 3 रुपए की बढ़ोतरी में भी 1 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल है।

किसानों के लिए वास्तविक बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। उनकी मांग है कि दूध का खरीद मूल्य 70 रुपए प्रति लीटर किया जाए। फैट के आधार पर भुगतान की व्यवस्था होने पर किसान तैयार हैं, लेकिन इसके लिए 12 रुपए प्रति फैट के हिसाब से भुगतान की मांग है।

पंवार ने कहा कि इंदौर में कुछ अन्य दूध व्यापारियों के यहां 65 से 68 रुपए तक खरीद और 70 से 72 रुपए तक बिक्री की बात सामने आती है। ऐसे में किसानों को भी 68 से 70 रुपए तक उचित खरीद मूल्य मिलना चाहिए।

विक्रेता संघ बोला- उपभोक्ता पर ज्यादा बोझ नहीं डाल सकते

इंदौर दूध विक्रेता संघ के अध्यक्ष भरत मथुरावाला ने बताया कि अभी घर पहुंच दूध के 63 रुपए में 62 रुपए दूध और 1 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल है। 1 अक्टूबर से यह 64 रुपए दूध + 1 रुपए डिलीवरी होकर कुल 65 रुपए होगा। दुकानों पर खुले दूध की कीमत 68 रुपए प्रति लीटर रहेगी।

मथुरावाला ने कहा कि संघ पिछले 38 वर्षों से काम कर रहा है और पंजीकृत संस्था है। संघ की जिम्मेदारी किसानों को उत्पादन लागत के अनुरूप भुगतान दिलाने के साथ उपभोक्ताओं पर अनावश्यक बोझ नहीं डालना भी है।

फैट के हिसाब से भुगतान 9.23 रुपए तक पहुंचा

मथुरावाला के मुताबिक किसानों को फैट के आधार पर भुगतान किया जाता है। पहले 8.90 रुपए प्रति फैट दिया जा रहा था, जिसे बढ़ाकर 9.23 रुपए प्रति फैट किया गया है। उनका दावा है कि यह भुगतान सांची से अधिक है। उन्होंने कहा कि देवास, उज्जैन, धार और खंडवा सहित आसपास के क्षेत्रों में भी दूध के दाम में करीब 2 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है।

सप्लाई रुकी तो क्या होगा?

किसान संगठन ने मांग पूरी नहीं होने पर दूध की सप्लाई रोकने की संभावना जताई है। हालांकि अभी सप्लाई बंद करने का कोई फैसला नहीं हुआ है। इसलिए 1 अक्टूबर से तय नए रेट लागू होंगे या नहीं, यह स्थिति आगे की बातचीत पर निर्भर करेगी।

किस बात पर टकराव?

विवाद मुख्य रूप से दूध के खरीद मूल्य, फैट के हिसाब से भुगतान और किसानों की उत्पादन लागत को लेकर है। दूध विक्रेता संघ का कहना है कि उपभोक्ताओं पर भी कीमत का असर पड़ता है, जबकि किसान संगठन का तर्क है कि मौजूदा खरीद मूल्य उनकी लागत के अनुरूप नहीं है। दोनों पक्ष अपने-अपने स्तर पर किसानों और उपभोक्ताओं के हित की बात कर रहे हैं।