मुजफ्फरपुर के जिला स्कूल मैदान में चल रहे जिला स्तरीय विद्यालय खेलकूद प्रतियोगिता के क्रिकेट ट्रायल की चयन प्रक्रिया को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को एआईडीएसओ के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्याध्यक्ष विजय कुमार के नेतृत्व में डीएम से मुलाकात कर ट्रायल की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। डीएम ने मामले में जांच का आश्वासन दिया है।
संगठन ने आरोप लगाया कि सरकारी स्तर पर आयोजित क्रिकेट ट्रायल में निजी क्रिकेट एकेडमी से जुड़े लोगों को चयन प्रक्रिया में जिम्मेदारी दी गई थी। वहीं, उसी एकेडमी के खिलाड़ी भी ट्रायल में शामिल हुए। ऐसे में चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। संगठन ने चयनकर्ताओं की भूमिका और निजी एकेडमी से उनके संबंधों की जांच कराने की मांग की है।
दो गेंद और चार ओवर को लेकर भी उठे थे सवाल
ट्रायल के दौरान कई अभिभावकों ने खिलाड़ियों को दिए जा रहे मौके को लेकर भी सवाल उठाए थे। एक अभिभावक ने आरोप लगाया था कि उनके बच्चे को बल्लेबाजी के लिए महज दो गेंदों का मौका दिया गया, जबकि कुछ पसंदीदा या पहचान वाले खिलाड़ियों को तीन से चार ओवर तक खेलने का अवसर दिया गया।
अभिभावकों का सवाल था कि महज दो गेंदों में किसी खिलाड़ी की बल्लेबाजी क्षमता का सही आकलन कैसे किया जा सकता है। उनका कहना था कि जिला स्तर की टीम के चयन में सभी खिलाड़ियों को समान अवसर मिलना चाहिए।
ट्रायल स्थल पर निजी एकेडमी का बैनर भी बना सवाल
ट्रायल के दौरान मैदान में एक निजी क्रिकेट एकेडमी का बैनर लगाए जाने को लेकर भी अभिभावकों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि जब चयन सरकारी स्तर पर जिला स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हो रहा है तो ट्रायल स्थल पर किसी निजी एकेडमी का प्रचारात्मक बैनर क्यों लगाया गया।
एआईडीएसओ ने इसी मुद्दे को लेकर भी जांच की मांग की है। संगठन का कहना है कि चयनकर्ताओं और किसी निजी एकेडमी के बीच संबंध होने की स्थिति में हितों के टकराव की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
एआईडीएसओ ने रखीं ये मांगें
एआईडीएसओ के राज्याध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने डीएम से क्रिकेट ट्रायल की गहन जांच, चयनकर्ताओं की भूमिका और निजी एकेडमी से उनके संबंधों की जांच कराने की मांग की।
संगठन ने अनियमितता मिलने पर कार्रवाई, स्वतंत्र चयन समिति गठित कर दोबारा पारदर्शी ट्रायल कराने और सभी योग्य खिलाड़ियों को समान अवसर देने की मांग की है।
प्रतिनिधिमंडल में राज्याध्यक्ष विजय कुमार, जिला अध्यक्ष शिव कुमार, अभिषेक कुमार और अली अख्तर शामिल थे।
जिला खेल पदाधिकारी बोले- संघ से मिले नाम पर ही बनाए गए थे चयनकर्ता
जिला खेल पदाधिकारी राजेंद्र कुमार ने कहा कि सभी खेलों के लिए निर्णायक समिति बनाई गई थी। क्रिकेट के लिए जिला क्रिकेट संघ से चयनकर्ताओं के नाम मांगे गए थे और संघ की ओर से दिए गए नाम के आधार पर ही ट्रायल में चयनकर्ताओं को रखा गया था।
उन्होंने यह भी कहा कि ट्रायल के दौरान नेट के अंदर किसी निजी एकेडमी का बैनर नहीं रहना चाहिए था। उन्होंने स्वीकार किया कि इस बिंदु पर उनका ध्यान नहीं गया था और इसे ठीक नहीं माना जा सकता।
अब डीएम के स्तर से जांच का आश्वासन मिलने के बाद क्रिकेट ट्रायल की चयन प्रक्रिया, चयनकर्ताओं की भूमिका और निजी एकेडमी से जुड़े आरोपों की जांच पर अभिभावकों और खिलाड़ियों की नजर है।