आने वाले दिनों में बैंक से लोन लेना महंगा हो जाएगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि RBI ने रेपो रेट 5.25% से बढ़ाकर 5.50% कर दी है। रेपो रेट वो ब्याज दर होती है जिस पर बैंकों को रिजर्व बैंक से कर्ज मिलता है। RBI ने फरवरी 2023 यानी करीब 4 साल बाद ये बढ़ोतरी की है।
RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी, यानी MPC की तीन दिन चली बैठक के बाद गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आज 7 अक्टूबर को नई ब्याज दरों की जानकारी दी।
महंगाई को कंट्रोल में रखने के लिए रिजर्व बैंक ने ये फैसला लिया है। RBI ने 2026-2027 के लिए महंगाई अनुमान को भी 5.0% से बढ़ाकर 5.2% कर दिया है। वहीं जीडीपी अनुमान को भी 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है।
2026-2027 में GDP ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान
रिजर्व बैंक ने देश की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। इसमें दूसरी तिमाही (Q2) की ग्रोथ 7.2% और तीसरी तिमाही (Q3) की ग्रोथ 6.9% रहने की उम्मीद है। चौथी तिमाही का अनुमान 6.8% पर बरकरार रखा गया है
अब 4 सवालों के जवाब से जानिए रेपो रेट से जुड़ी जरूरी बातें
सवाल 1: रेपो रेट क्या होता है?
जवाब: रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर RBI बैंकों को कम समय के लिए कर्ज देता है। इसी दर के आधार पर बैंक अपने लोन की ब्याज दर तय करते हैं। RBI की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी, यानी MPC हर दो महीने में इसकी समीक्षा करती है।
सवाल 2: RBI ने रेपो रेट 0.25% क्यों बढ़ाया?
जवाब: महंगाई पर काबू पाने के लिए RBI ने रेपो रेट बढ़ाया है। रेपो रेट बढ़ने से बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है। फिर बैंक भी ग्राहकों के लोन की दर बढ़ा दते हैं।
महंगे लोन के कारण लोग घर, कार या कारोबार के लिए कम कर्ज लेते हैं। इससे बाजार में मांग कम होती है, जिससे महंगाई पर काबू पाने में मदद मिलती है।
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक दबाव और खराब मौसम से खाद्य महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
महंगाई को बेकाबू होने से रोकने के लिए RBI ने अब अपना रुख सख्त कर लिया है। इसका उद्देश्य ब्याज दरें बढ़ाकर महंगाई पर समय रहते लगाम लगाना और अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना है।
सवाल 3: रेपो रेट बढ़ने से आम लोगों पर क्या असर होगा?
जवाब: होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन महंगे हो जाएंगे। EMI बढ़ जाएगी और पहले से चल रहे कुछ लोन पर भी ब्याज बढ़ने का असर पड़ेगा। दूसरी तरफ, बैंक FD और दूसरी जमा योजनाओं पर ब्याज बढ़ा सकते हैं।
सवाल 4: आगे रेपो रेट कब घट सकता है?
जवाब: अगर महंगाई लगातार काबू में रहती है और आर्थिक हालात इसकी इजाजत देते हैं, तो RBI आगे रेपो रेट में कटौती कर सकता है। RBI हर बैठक में महंगाई, आर्थिक विकास और घरेलू-वैश्विक हालात को देखते हुए ब्याज दर पर फैसला करता है।
नॉलेज बॉक्स: रेपो रेट का कॉन्सेप्ट कहां से आया
1917 में पहले विश्व युद्ध के समय बैंकों पर टैक्स का बोझ बढ़ गया था, जिससे उन्हें कर्ज लेना महंगा पड़ रहा था। टैक्स से बचने और बैंकों को आसानी से पैसा देने के लिए फेड ने रेपो सिस्टम शुरू किया।
समय के साथ नियम बदले:
कौन ले सकता है: शुरुआत में सिर्फ सदस्य बैंक शामिल थे, फिर 1950 के दशक में प्राइमरी डीलर्स आए और आज बैंक व डीलर्स दोनों इसमें शामिल हैं।
ब्याज दरें: पहले यह फिक्स्ड डिस्काउंट रेट पर निर्भर था, फिर बाजार की दरों से जुड़ा और अब अमेरिका की FOMC कमेटी इसे तय करती है।
जमानत: शुरुआत में सरकारी और वॉर बॉन्ड्स गिरवी रखे जाते थे, बाद में ट्रेजरी सिक्योरिटीज और 1999 के बाद मॉर्गेज से जुड़े बॉन्ड्स भी स्वीकार किए जाने लगे।
आज का स्टेटस: 1917 से लेकर आज तक रेपो का स्ट्रक्चर पूरी तरह बदल चुका है। अब यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था और बैंकिंग सिस्टम में पैसों के बहाव यानी लिक्विडिटी को कंट्रोल करने का सबसे अहम जरिया है। अन्य देशों ने भी अब रेपो रेट को अपना लिया है।