सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस ‘स्टारलिंक’ की भारत में एंट्री को लेकर चल रहे विवाद के बीच रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को कहा कि वह कॉम्पिटिशन से नहीं डरते। कंपनी ने X पर पोस्ट कर कहा कि असली मुकाबला वही है, जिससे यह पता चले कि सबसे अच्छी सर्विस कौन दे रहा है।
कंपनी ने यह बयान इलॉन मस्क की ओर से लगाए गए उन आरोपों के बाद जारी किया, जिनमें उन्होंने भारतीय टेलिकॉम कंपनियों पर स्टारलिंक का रास्ता रोकने का दावा किया था।
मस्क vs अंबानी… समझिए पूरा विवाद
इलॉन मस्क भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग में हो रही देरी को लेकर पिछले कुछ दिनों से नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। इस देरी के लिए वो रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी को जिम्मेदार बता रहे हैं और उनके खिलाफ लगातार सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं।
हाल ही में मस्क ने अपने एक पोस्ट में मुकेश अंबानी पर तंज कसते हुए उन्हें ‘प्राइम मिनिस्टर अंबानी’ लिखा था। इस पोस्ट में उन्होंने अंबानी को भारत का रियल बॉस बताया था।
भारत में ₹2200 महीने का डेटा कौन खरीदेगा
मस्क की पोस्ट के बाद कुछ लोगों ने कहा कि भारत में दुनिया का सबसे सस्ता और तेज इंटरनेट मौजूद है। यहां सिर्फ ₹300-400 महीने में 60GB डेटा मिल जाता है, जो दूरदराज के गांवों में भी बेहतरीन काम करता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि जब स्टारलिंक अन्य देशों में करीब ₹2,200 महीने चार्ज करता है तो भारत में इसे कौन खरीदेगा।
इस तर्क का जवाब देते गुए मस्क ने कहा कि एक तरफ वे दावा करते हैं कि स्टारलिंक भारत में जियो के सस्ते प्लान्स का मुकाबला नहीं कर पाएगी। दूसरी तरफ वे यह भी कहते हैं कि स्टारलिंक के आने से कॉम्पिटिशन बढ़ जाएगा। ये दोनों बातें एक साथ सही नहीं हो सकतीं।
सच्चाई यह है कि मार्केट में कॉम्पिटिशन बढ़ने से हमेशा आम ग्राहकों को ही फायदा मिलता है। स्टारलिंक के आने से अंबानी की कंपनी का मुनाफा थोड़ा घट सकता है, लेकिन उनका कारोबार बंद नहीं होगा। जाहिर है, अगर स्टारलिंक भारत में बहुत महंगी होगी तो उसे कोई नहीं खरीदेगा, इसलिए स्पेसएक्स को यहां टिकने के लिए अपनी कीमतें सस्ती रखनी ही पड़ेंगी।
सरकार बोली स्टारलिंक सहित 3 कंपनियों को लाइसेंस दिए
‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026’ में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सरकार का रुख साफ किया। उन्होंने बताया कि देश में तीन सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों को लाइसेंस मिल चुके हैं।
1. रिलायंस जियो सैटकॉम
2. भारती एयरटेल सपोर्टेड यूटेलसेट वनवेब
3. इलॉन मस्क की स्टारलिंक
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि लाइसेंस पाने वाली इन सभी कंपनियों की सिक्योरिटी क्लीयरेंस अभी बाकी है। इसके अलावा सैटेलाइट स्पेक्ट्रम का प्राइसिंग फ्रेमवर्क भी तय किया जा रहा है। सभी जरूरी शर्तें पूरी होने के बाद ही भारत में ये सेवाएं शुरू हो सकेंगी।
- स्पेक्ट्रम का आवंटन- सैटेलाइट इंटरनेट चलाने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी यानी स्पेक्ट्रम की जरूरत होती है। सरकार को तय करना होता है कि कंपनियों को यह कैसे मिलेगा और इसके लिए कितना पैसा देना होगा। जियो चाहती थी कि स्पेक्ट्रम की नीलामी हो, जबकि एयरटेल और वनवेब चाहती थीं कि सरकार इसे सीधे आवंटित करे। आखिरकार सरकार ने टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 के तहत सीधे आवंटन का रास्ता चुना।
- सुरक्षा और निगरानी- सरकार यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि स्टारलिंक भारतीय कानूनों का पालन करे। जरूरत पड़ने पर एजेंसियां नेटवर्क पर नजर रख सकें, कानूनी प्रक्रिया के तहत बातचीत या डेटा को इंटरसेप्ट कर सकें और सुरक्षा से जुड़े निर्देश लागू करा सकें। सैटेलाइट इंटरनेट में डेटा का रास्ता सामान्य मोबाइल नेटवर्क से अलग हो सकता है, इसलिए सरकार के लिए इन नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है।
अंडमान में ड्रग्स तस्करी और मणिपुर हिंसा में मिले थे स्टारलिंक इक्विपमेंट्स
साल 2024 में भारतीय एजेंसियों ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में ड्रग्स तस्करी की जांच के दौरान और मणिपुर में सेना के एक ऑपरेशन के समय स्टारलिंक के उपकरण बरामद किए थे।
इलॉन मस्क ने तब कहा था कि स्टारलिंक की सर्विस भारत में कभी एक्टिव ही नहीं थी। जो उपकरण मिले हैं, वे स्टारलिंक के सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल कर ही नहीं सकते थे।
स्टारलिंक किट में स्टारलिंक डिश, एक वाई-फाई राउटर, पॉवर सप्लाई केबल्स और माउंटिंग ट्राइपॉड होता है। हाई-स्पीड इंटरनेट के लिए डिश को खुले आसमान के नीचे रखते हैं। iOS और एंड्रॉइड पर स्टारलिंक का एप मौजूद है, जो सेटअप से लेकर मॉनिटरिंग करता है।
लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद सैटेलाइट से इंटरनेट देती है स्टारलिंक
स्टारलिंक लो अर्थ ऑर्बिट में अपने सैटेलाइट को तैनात कर इंटरनेट सर्विस देती है। इसके जरिए उन दूर-दराज के इलाकों में भी इंटरनेट मिलता है, जहां मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड नहीं है। कंपनी 2021 से ही भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की कोशिश कर रही है।