चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने महाकुंभ-2025 की यात्रा के दौरान वादा की गई सुविधाएं नहीं देने और यात्रियों को हुई परेशानी के मामले में विजय टूर एंड ट्रैवल और गजराज टूर एंड ट्रैवल, कजहेड़ी को मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।
आयोग ने शिकायतकर्ता अमित शर्मा को मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 10 हजार रुपए तथा वापसी यात्रा के दौरान बोर्डिंग प्वाइंट बदलने के कारण हुए अतिरिक्त ऑटो खर्च के 2 हजार रुपए देने को कहा है। इसके अलावा, टूर ऑपरेटरों को मुकदमेबाजी का खर्च भी देना होगा।
- निर्धारित समय से 30 घंटे देरी से पहुंचे प्रयागराज: अमित शर्मा ने शिकायत में बताया कि उन्होंने अपने दोस्त के साथ महाकुंभ जाने के लिए चंडीगढ़ के टूर ऑपरेटरों से बस टिकट बुक कराए थे। 7 फरवरी 2025 को दोपहर 3 बजे रवाना होने वाली बस करीब एक घंटे की देरी से चली। यात्रा में लगभग 15 घंटे लगने की जानकारी दी गई थी, लेकिन बस 9 फरवरी की रात करीब 10 बजे प्रयागराज पहुंची। इस तरह यात्रियों को पहुंचने में तय समय से करीब 30 घंटे ज्यादा लगे।
- उचित रास्तों का इस्तेमाल करने का भरोसा दिया था: शिकायतकर्ता के अनुसार टूर ऑपरेटरों ने महाकुंभ के ट्रैफिक से बचने के लिए उचित रास्तों का इस्तेमाल करने का भरोसा दिया था। इसके बावजूद यात्रा के दौरान लंबे समय तक देरी हुई। यात्रियों को पर्याप्त ठहराव, साफ शौचालय और आराम करने की सुविधाएं नहीं मिलीं। पानी की बोतलें और वाई-फाई देने का वादा भी पूरा नहीं किया गया। बस में दो के बजाय केवल एक चार्जिंग प्वाइंट उपलब्ध था।
- वापसी में 45 किमी दूर बुलाया: अमित शर्मा के मुताबिक प्रयागराज पहुंचने पर यात्रियों को तय गंतव्य से करीब 15 किलोमीटर पहले सड़क किनारे उतार दिया गया। इससे उन्हें परेशानी के साथ अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ा। 9 फरवरी को वापसी यात्रा के लिए उन्हें बिना पहले सूचना दिए कोखराज थाने से बस में सवार होने को कहा गया। यह जगह प्रयागराज के नेहरू पार्क स्थित तय पिकअप प्वाइंट से करीब 45 किलोमीटर दूर थी। वहां पहुंचने के लिए उन्हें ऑटो पर 2 हजार रुपए खर्च करने पड़े।
- शिकायतकर्ता के आधिकारिक कामकाज पर भी असर पड़ा: शिकायत के अनुसार बस को 10 फरवरी की शाम 7 बजे रवाना होकर अगले दिन सुबह 10 बजे चंडीगढ़ पहुंचना था। हालांकि, बस रात 9:15 बजे रवाना हुई और दोपहर करीब 2 बजे चंडीगढ़ पहुंची। इससे शिकायतकर्ता के आधिकारिक कामकाज पर भी असर पड़ा।
- बस की हालत-सुविधाओं पर सवाल उठाए: शिकायतकर्ता ने बस की हालत पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि बस में एयर कंडीशनिंग की डक्टिंग टेप से चिपकाई गई थी और वेंटिलेशन भी पर्याप्त नहीं था। पानी की बोतलें और वाई-फाई उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई और कानूनी नोटिस भी भेजा, लेकिन संतोषजनक समाधान नहीं मिला।
टूर ऑपरेटरों ने आरोपों को नकारा
वहीं दूसरी तरफ टूर ऑपरेटरों ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वे वोल्वो स्लीपर एसी बसें चलाते हैं और किसी अनुचित व्यापारिक गतिविधि में शामिल नहीं हुए। उनका कहना था कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज के आसपास प्रशासन की ओर से यातायात प्रतिबंध, बैरिकेडिंग, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण के उपाय लागू किए गए थे। ये परिस्थितियां उनके नियंत्रण से बाहर थीं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने टूर ऑपरेटरों को शिकायतकर्ता को मुआवजा और मुकदमेबाजी का खर्च देने के निर्देश दिए।