मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण विवाद अब अंतिम दौर में पहुंच गया है। हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्यपीठ ने साफ संकेत दे दिए हैं कि इस लंबे समय से लंबित मामले में अब फैसला टालना संभव नहीं होगा। गुरुवार को सुनवाई में चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने स्पष्ट कहा कि अब किसी भी स्थिति में सुनवाई स्थगित नहीं की जाएगी।
कोर्ट लगातार तीन दिन 27, 28 और 29 अप्रैल को इस केस की सुनवाई करेगा। इसमें ओबीसी आरक्षण से जुड़ी सभी याचिकाओं पर विस्तार से एक साथ सुनवाई होगी। अदालत ने सभी पक्षों को निर्देश दिए हैं कि वे पूरी तैयारी के साथ आएं, ताकि सुनवाई में कोई रुकावट न आए।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पहले दायर हस्तक्षेप याचिकाओं के कारण जो देरी हुई, वैसी स्थिति अब स्वीकार नहीं की जाएगी। इससे पहले कोर्ट ने 16 अप्रैल से लगातार सुनवाई का संकेत दिया था, लेकिन अब इसे संशोधित कर 27-29 अप्रैल तय किया गया है।
बता दें कि प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% किए जाने के बाद यह विवाद शुरू हुआ था। इसी वजह से सरकारी नौकरियों की हजारों भर्तियां अटकी हुई हैं।
सुप्रीम कोर्ट के 3 माह में निपटारे के निर्देश के बाद सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के निराकरण के लिए तीन महीने की समय-सीमा तय की थी। इसके बाद ओबीसी आरक्षण से जुड़े कई मामले हाई कोर्ट को वापस भेजे गए। कुछ याचिकाएं अब भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, जबकि बाकी मामलों को एक साथ क्लब कर हाई कोर्ट में सुनवाई की तैयारी की जा रही है।
भोजशाला विवाद
हाई कोर्ट में 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई होगी
भोजशाला विवाद में जल्द फैसला आ सकता है। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने आदेश दिया है कि 6 अप्रैल से दोपहर 2:30 बजे सभी संबंधित याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई होगी। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि सभी आपत्तियों पर सुनवाई होगी। इसमें दस्तावेजों के साथ वीडियोग्राफी से जुड़े मुद्दे भी रहेंगे।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने सुप्रीम कोर्ट के सिविल अपील आदेश की ओर ध्यान दिलाया। केंद्र की ओर से एएसजी सुनील जैन, राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह, जबकि याचिकाकर्ता की ओर से विष्णु शंकर जैन, विनय जोशी समेत अन्य वकील मौजूद रहे। हस्तक्षेपकर्ताओं ने भी अपने-अपने पक्ष रखे।