Petrol-Diesel से सुधर रही राजस्व की सेहत, केंद्र को अपने बजट अनुमान से 1.3 लाख करोड़ रुपये अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद

कोरोना काल में पेट्रोल व डीजल की बिक्री पर लगने वाले उत्पाद शुल्क व वैट केंद्र और राज्य दोनों की राजस्व प्राप्ति का प्रमुख माध्यम बनते दिख रहे हैं। चालू वित्त वर्ष 2021-22 में केंद्र को पेट्रोल व डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क से 4.67 लाख करोड़ रुपये राजस्व के रूप में मिलने का अनुमान है, इस मद के बजट अनुमान से 1.32 लाख करोड़ रुपये अधिक है। इस साल के बजट में चालू वित्त वर्ष में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क से 3.35 लाख करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति का अनुमान लगाया गया है। पिछले वित्त वर्ष में भी केंद्र सरकार को पेट्रोल व डीजल की बिक्री पर उत्पाद शुल्क से बजट अनुमान से 94,000 करोड़ रुपये अधिक राजस्व की प्राप्ति हुई थी।

इसी तरह, चालू वित्त वर्ष में राज्यों को वैट के रूप में 2.71 लाख करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। एसबीआइ इकोरैप की हालिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है। हालांकि पेट्रोल व डीजल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी का रुख है, जिससे आम जनता की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है।

पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के अनुमान के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले पेट्रोल की बिक्री में 12.2 फीसद और डीजल की बिक्री में 15.1 फीसद की बढ़ोतरी हो सकती है। पीपीएसी के डाटा के मुताबिक, अनब्रांडेड पेट्रोल व डीजल पर प्रति लीटर क्रमश: 32.9 रुपये और 31.8 रुपये उत्पाद शुल्क के तौर पर वसूले जाते हैं। एसबीआइ इकोरैप के मुताबिक पीपीएसी के डाटा के आधार पर चालू वित्त वर्ष में पेट्रोल व डीजल की होने वाली खपत को देखते हुए केंद्र सरकार को उत्पाद शुल्क से 4.67 लाख करोड़ रुपये की राजस्व प्राप्ति होगी।

अगर कच्चे तेल की कीमत को पूरे वित्त वर्ष के लिए 74 डॉलर प्रति बैरल मान लिया जाए और तेल खरीदने में इस्तेमाल होने वाले एक डॉलर के मूल्य को 75 रुपये के बराबर माना जाए तो राज्यों को वैट या बिक्री कर के रूप में 2.71 लाख करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति होगी। केंद्र सरकार का उत्पाद शुल्क निर्धारित होता है जबकि राज्यों का वैट पेट्रोल व डीजल की कीमत के साथ घटता-बढ़ता रहता है।

वहीं, चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीनों में कर व गैर कर दोनों मदों से मिलने वाला राजस्व भी पिछले साल अप्रैल-मई के मुकाबले अधिक है। इस साल अप्रैल-मई में केंद्र को टैक्स के रूप में 2.34 लाख करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई जबकि पिछले साल मात्र 33,850 करोड़ रुपये मिले थे। वित्त मंत्रालय के मुताबिक इस साल गैर कर राजस्व की प्राप्ति में पिछले साल अप्रैल-मई के मुकाबले 976.2 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीने में केंद्र सरकार की वित्तीय स्थिति पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर है। इस साल अप्रैल-मई में केंद्र का राजकोषीय घाटा 1.23 लाख करोड़ है, जो बजट अनुमान का सिर्फ 8.2 फीसद है, जबकि विगत पांच वर्षो में इन दो महीनों में यह घाटा बजट अनुमान के औसतन 55.4 फीसद तक पहुंच जाता रहा है।