भागलपुर-15 मौत के 2 दोषियों को 10-10 साल की सजा:4 साल पहले अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुआ था ब्लास्ट; 5km तक दहला था इलाका

3 मार्च 2022

चार साल पहले आधी रात को भागलपुर में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए धमाकों के बाद काजवलीचक इलाका दहल गया था। ब्लास्ट की गूंज 5 किलोमीटर दूर तक सुनाई दी थी। हादसे में एक ही परिवार के 5 लोगों समेत 15 लोगों की मौत हुई थी। घटनास्थल के पास तीन मकान मलबे में तब्दील हो गए थे।

भागलपुर सिविल कोर्ट के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज-11 ज्योति कुमार कश्यप की अदालत ने तातारपुर थाना क्षेत्र के काजवलीचक बम ब्लास्ट मामले में दो दोषियों को 10-10 साल की सजा सुनाई है।

कोर्ट ने हबीबपुर के चमेलीचक के रहने वाले मोहम्मद आजाद और काजवलीचक के ही रहने वाले नवीन मंडल को दोषी करार दिया था। मामले में आरोपी आशीष कुमार गुप्ता, अशोक मंडल उर्फ गुड्डू और धनंजय मंडल को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।

जांच के दौरान पुलिस ने पाया था कि विस्फोटक सामग्री को पटाखा बनाने के उद्देश्य से अवैध रूप से रखा गया था, जिससे धमाका हुआ था। घटना के बाद तातारपुर थाने के तत्कालीन ASI पूर्णेंदु कुमार ने FIR दर्ज कराई थी। सुनवाई के दौरान कुल 13 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

सबसे पहले जानिए 3 मार्च 2022 की आधी रात क्या हुआ था?

काजवलीचक इलाके के लोग खाना खाकर सो चुके थे। हर ओर अंधेरा पसरा था। तभी आधी रात को 10 मिनट के अंदर ताबड़तोड़ धमाके हुए। धमाके से एक दाे मंजिला मकान और तीन पक्के घर मलबे में तब्दील हो गए। धमाका इतना जोरदार था कि 3 किलोमीटर के दायरे में मलबा बिखर गया। 4 परिवार पूरी तरह से तबाह हो गए थे।

धमाके में नवजात समेत एक ही परिवार के 5 लोगों समेत कुल 14 लोगों की मौत हो गई। 15वीं मौत 23 साल की आयशा की सिलीगुड़ी के अस्पताल में इलाज के दौरान हुई थी। हादसे में 10 से अधिक लोग घायल भी हुए थे, जिन्हें मायागंज अस्पताल में एडमिट कराया गया था। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस माैके पर पहुंची। पुलिस के पहुंचने से पहले आसपास के लाेगाें ने मकान के मलबे के नीचे दबे लाेगाें काे बाहर निकालना शुरू कर दिया था।

‘ब्लास्ट के बाद लगा भूकंप आया है, चारों ओर सिर्फ धुआं ही धुआं था’

घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया था कि बम धमाके के बाद कुछ देर के लिए समझ में नहीं आया कि हुआ क्या है। धमाका इतना जाेरदार था कि लगा भूकंप आया है। जिस मकान में धमाका हुआ था, वहां आधे घंटे तक सिर्फ धुआं ही दिख रहा था। सड़क पर साफ-साफ कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। स्टेशन चाैक से लेकर उर्दू बाजार तक करीब 5 किलोमीटर के इलाके में आवाज गूंजी थी।

शीला देवी ने दैनिक भास्कर को बताया था कि धमाके के बाद मैं तीसरी मंजिल से नीचे उतरी तो देखा कि सब कुछ खत्म हो चुका था। मेरा लाल सोनू कहां है, उसका कुछ पता नहीं चल पा रहा है। वो गोतनी का बेटा है, उसकी मां नहीं है। मैं ही उसकी मां हूं। मैं ही उसकी देखभाल करती हूं। एक मंजिल पर बेटा रिंकू और बहू थे। अभी दोनों कहां है, कुछ मालूम नहीं। बेटी जया का भी कुछ पता नहीं चल पा रहा है। छोटा बेटा भी रूम में था। बीच वाला और नीचे का फ्लोर गिर गया। पति ओमप्रकाश बीमार हैं। घर में हैं। बाकी कुछ लोग अस्पताल गए हैं। पता नहीं वह लोग किस हाल में होंगे।

‘नींद खुली तो लगा कि कहीं दूसरी जगह गिरा हुआ हूं’

घायल सुमित ने बताया था, ‘रात में खाना खाकर सो गया था। अचानक तेज धमाके से जब नींद खुली तो लगा कि कहीं दूसरी जगह गिरा हुआ हूं। देखते ही देखते इलाके में चीख पुकार मच गई। बारूद की गंध से लगा कि धमाका हुआ है। धुएं का गुबारा जैसे-जैसे कम हुआ सड़क पर धमाके का असर दिखने लगा। सामने के मकान और शटर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके थे।’

बारूद की गंध भी आसपास के इलाके में तेजी से फैल गई

मोहम्मद शकील ने बताया था, ‘धमाके के साथ बारूद की गंध भी आसपास के इलाके में तेजी से फैल गई। इसके बाद लगा कि यह बम का धमाका हुआ है। अगर धमाका रात 7 से 8 बजे या सुबह होती तो हालत और भी मुश्किल हो सकते थे।’

ततारपुर के अजहर अख्तर शकील ने बताया था, ‘बेड पर सोने के लिए कहा गया था कि धमाके की गूंज सुनाई दी। ऐसा लगा कि घर के बगल में किसी ने धमाका किया है। जब आसपास के लोगों को भागते देखा तो पता चला कि काजवली चक में धमाका हुआ है।’

करीब 18 घंटे तक मलबा साफ करती रही थी एसडीआरएफ और निगम की टीम

ब्लास्ट के बाद करीब 3 किलोमीटर के एरिया में फैले मलबे को एसडीआरएफ और नगर निगम की टीम करीब 18 घंटे तक साफ करती रही थी। तत्कालीन डीआईजी सुजीत कुमार ने बताया था कि अवैध पटाखा निर्माण और स्टोरेज के कारण ब्लास्ट हुआ है। इस मामले में तातारपुर थानेदार संजय कुमार सुधांशु को सस्पेंड किया गया है। डीआईजी ने बताया था कि तातारपुर थानेदार को ये पता नहीं था कि अवैध तरीके से मोहल्ले में पटाखा बनाने का धंधा हो रहा था। घटना की जांच के लिए सदर डीएसपी के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया गया था। एफएसएल की टीम ने घटनास्थल से करीब आधा किलो बारूद भी घटनास्थल से जब्त किया था।

इस मामले में हबीबपुर के मोअज्ज्मचक निवासी मो. आजाद, ब्लास्ट में मारे गए महेंद्र मंडल, लीलावती देवी और दोनों के पूरे परिवार पर पुलिस ने एक्सप्लोसिव एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया था। इस मामले में पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में भी लिया था, जिसके आधार पर पुलिस ने हबीबपुर इलाके में छापेमारी की तो मुख्य आरोपी मो. आजाद घर से फरार मिला था।

डीआईजी ने बताया था कि पहले में भी इस तरह की घटना यहां हो चुकी है। 2002 में पटाखा ब्लास्ट में 4 लोगों की मौत हुई थी।

घटना की एटीएस ने भी जांच की थी, महिला के घर था बारुद का अवैध स्टोरेज

डीजीपी एसके सिंघल ने बताया था कि पूरे मामले की जांच एटीएस को सौंपी गई है। जांच में सामने आया था कि अवैध तरीके से पटाखा बनाने के दौरान घर में ब्लास्ट हुआ। घर में पटाखा का स्टोरेज भी किया गया था। जांच में पता चला था कि काजवलीचक की लीलावती देवी (ब्लास्ट में मौत) के घर अवैध तरीके से पटाखा बनाया जा रहा था। इसी दौरान ब्लास्ट हुआ था।