लुधियाना कोर्ट में पेश हुआ असली हरविंदर:गुहार लगाई- मेरे दस्तावेजों से फर्जी किरायानामा बनाया, स्टे खत्म करने की मांग; अब जान को खतरा

वाराणसी में फर्जी बिलिंग के जरिए सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाने वाले मामले में नया मोड़ आया है। लुधियाना के चेत सिंह नगर में जिस हरविंदर के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर किरायानामा तैयार कर दफ्तर किराए पर लिया गया था, वह अब कोर्ट में पेश हो गया है।

हरविंदर सिंह ने कोर्ट से अपील की कि उसके नाम और दस्तावेजों के आधार पर दायर की गई याचिका, जिस पर कोर्ट ने स्टे दिया है, उसे तत्काल खत्म किया जाए। साथ ही, उसके नाम और दस्तावेजों का दुरुपयोग करने वालों से जवाब-तलब करने की मांग की।

हरविंदर ने यह भी आरोप लगाया कि फ्रॉड करने वाले लोगों से उसे जान का खतरा है। एडवोकेट सर्वजीत सिंह ने बताया कि हरविंदर सिंह की अर्जी पर कोर्ट ने सर्च वारंट से संबंधित स्टे हटा दिया है। साथ ही, याचिका दायर करने वाले एडवोकेट से मामले में जवाब मांगा गया है।

हरविंदर ने कोर्ट में दायर याचिका में क्या कहा, सिलसिलेवार जानिए:

  • नाम और पहचान का गलत इस्तेमाल: हरविंदर सिंह (पुत्र श्री उमेश पाल सिंह) ने अदालत के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होकर बताया कि वह एक वास्तविक व्यक्ति है। उसे 28 जुलाई 2026 को ही पता चला कि उसके नाम और पहचान का गलत फायदा उठाकर यह केस (CRR No. 464/2026) कोर्ट में चलाया जा रहा है।
  • बिना जानकारी व सहमति के ली गई स्टे: हरविंदर ने बताया कि 27 जुलाई 2026 को माननीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) सुमित भल्ला की कोर्ट से उसके नाम पर जो अंतरिम राहत (स्टे) हासिल की गई है, वह उसकी जानकारी, सहमति या अनुमति के बिना ली गई है।
  • वकील और वकालतनामा दोनों फर्जी: उसने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस केस के सिलसिले में एडवोकेट मतिल मित्तल या एडवोकेट लोकेश बत्ता समेत किसी भी वकील को कभी नियुक्त नहीं किया है। कोर्ट रिकॉर्ड में मौजूद पुनरीक्षण याचिका, हलफनामा, शिकायत की प्रति और वकालतनामा पर किए गए दस्तखत पूरी तरह से जाली, मनगढ़ंत और फर्जी हैं।
  • 90 करोड़ रुपए के GST घोटाले से जुड़ा मामला: याचिका में खुलासा किया गया कि यह पूरा मामला लगभग 90 करोड़ रुपए की जीएसटी (GST) कर चोरी, भारी वित्तीय धोखाधड़ी और छद्म वेश (Impersonation) से जुड़ा है, जिससे केंद्र व राज्य सरकार के खजाने को सीधा चूना लगाया जा रहा है।
  • असली मास्टरमाइंड को बचाने की साजिश: अज्ञात शातिर अपराधियों ने असली मास्टरमाइंड और बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी करने वालों को कानूनी कार्रवाई से बचाने तथा कोर्ट के साथ धोखाधड़ी करके ‘स्टे’ हासिल करने के उद्देश्य से हरविंदर के नाम और पहचान का दुरुपयोग किया।
  • अंतरिम राहत तुरंत रद्द करने की मांग: हरविंदर ने गुहार लगाई कि फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी से ली गई इस अंतरिम राहत को प्रभावहीन (Non-est) और शुरुआत से ही शून्य (Void ab-initio) घोषित कर तत्काल प्रभाव से रद्द (Vacate) किया जाए, क्योंकि धोखाधड़ी से प्राप्त कोई भी आदेश कानूनन मान्य नहीं होता।
  • जांच और मुख्य सरगनाओं पर कार्रवाई की अपील: उसने अदालत से मांग की है कि केस फाइल पर आज ही सुनवाई कर उसका शपथ पत्र पर बयान दर्ज किया जाए। फर्जी वकालतनामा और दस्तावेजों की जांच कर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाए। इस पूरी आपराधिक साजिश और आर्थिक अपराध के पीछे छिपे मुख्य सरगना का पता लगाने के लिए किसी सक्षम एजेंसी से निष्पक्ष जांच के आदेश दिए जाएं।
  • जीवन पर खतरा: हरविंदर ने ‘सर्टिफिकेट ऑफ अर्जेंसी’ दाखिल करते हुए बताया कि स्टे के कारण असली अपराधी सबूत मिटाने और फरार होने की फिराक में हैं। साथ ही, इस घोटाले के मुख्य सरगनाओं से उसके जीवन और स्वतंत्रता को गंभीर खतरा बना हुआ है, इसलिए सरकारी खजाने और उसकी सुरक्षा के लिए मामले पर तुरंत एक्शन लिया जाए।

सर्च वारंट से लेकर स्टे तक की कहानी, जानिए…

  • निचली अदालत से सर्च वारंट मिला: यूपी पुलिस के जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर कपिल देव यादव जब सबूत जुटाकर लुधियाना पहुंचे, तो कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत से सर्च करने की अनुमति मांगी।
  • यूपी पुलिस की दलील- इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिलने का जताया शकः जांच अधिकारी एसआई कपिल देव यादव ने कोर्ट से चेत सिंह नगर के मकान की तलाशी के लिए अर्जी दी। पुलिस ने कहा कि यहां से लैपटॉप, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, सिम कार्ड और फर्जी बिलिंग से जुड़े दस्तावेज मिल सकते हैं। कोर्ट ने पंजाब पुलिस और दो स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में तलाशी का सर्च वारंट जारी कर दिया।
  • सेशन कोर्ट ने सर्च वारंट पर लगाई रोकः सर्च वारंट जारी होने के बाद हरविंदर सिंह के नाम पर सेशन कोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की गई। कहा गया कि उन्हें बिना सुने वारंट जारी किया गया, जबकि वे न तो एफआईआर में आरोपी हैं और न ही वांछित। आरोप लगाया कि यूपी पुलिस सीसीटीवी फुटेज के बहाने उन्हें बेवजह परेशान और डराने की कोशिश कर रही है, जबकि मुख्य आरोपी बिजनौर निवासी सोहन कुमार है।
  • सेशन कोर्ट का फैसला: एडिशनल सेशन जज सुमित भल्ला ने दलीलों को सुनने के बाद 25 जुलाई 2026 के सर्च वारंट पर तुरंत रोक लगा दी। अदालत ने निचली अदालत से केस की पूरी फाइल मंगवाई है और यूपी पुलिस को 14 अगस्त 2026 के लिए नोटिस जारी कर दिया है।

फेक कंपनियों से फर्जी बिलिंग का खेल

यूपी स्टेट टैक्स डिपार्टमेंट, वाराणसी रेंज-बी के अधिकारी कृपा कांत की शिकायत पर थाना चेतगंज (वाराणसी) में मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान टैक्स विभाग को एक फर्जी कंपनी M/s सोहन एंटरप्राइजेज का पता चला। इसके बाद कंपनी के कथित मालिक बिजनौर निवासी सोहन कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। जांच में सामने आया कि वाराणसी के चेतगंज स्थित लहुराबीर दुकान नंबर 121 के पते पर M/s सोहन एंटरप्राइजेज (GSTIN: 09JQWPK7794A1ZW) के नाम से कंपनी पंजीकृत कराई गई थी। दस्तावेजों में इसका मालिक सोहन कुमार को दर्शाया गया था।

वहां कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं मिली

FIR के मुताबिक, 16 अप्रैल 2025 को जब टैक्स अधिकारियों ने दुकान के पते पर जाकर जांच की, तो वहां कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं मिली। दुकान का कब्जा फर्जी किरायानामे के आधार पर दिखाया गया था। मौके पर न कोई सामान मिला और न ही कोई कर्मचारी मौजूद था। कंपनी केवल कागजों पर चल रही थी। वास्तविक खरीद-बिक्री नहीं हो रही थी।

आगे की जांच में कंपनी का आईपी एड्रेस लुधियाना के चेत सिंह नगर का पाया गया, जो संदीप के नाम पर रजिस्टर्ड था। इसके बाद पता चला कि चेत सिंह नगर स्थित जिस घर से कथित तौर पर दफ्तर संचालित किया जा रहा था, उसका किरायानामा हरविंदर के नाम से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया था।

वकालतनामा और अन्य दस्तावेज उसने कभी जारी नहीं कि

मामले की जांच के दौरान यूपी पुलिस सर्च के लिए पहुंची और कोर्ट से अनुमति भी ली गई। हालांकि, सेशन कोर्ट में हरविंदर के नाम से एक याचिका दायर कर सर्च पर स्टे ले लिया गया। इसके बाद वास्तविक हरविंदर सामने आया और उसने कोर्ट में बताया कि किरायानामे में इस्तेमाल किया गया आधार कार्ड उसका है, लेकिन उसमें केवल फोटो बदलकर दुरुपयोग किया गया है। उसने यह भी कहा कि स्टे लेने के लिए इस्तेमाल किए गए वकालतनामा और अन्य दस्तावेज उसने कभी जारी नहीं किए।