33 साल के सारांश टीम इंडिया में चुने गए:बोले- उम्र नहीं, प्रदर्शन मायने रखता है; पिता को कैंसर हुआ, तो क्रिकेट छोड़ दिया था

मध्यप्रदेश के स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन 33 साल की उम्र में भारतीय टेस्ट टीम में चुने गए हैं। चयन के बाद सारांश ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में कहा कि क्रिकेट में उम्र नहीं, बल्कि प्रदर्शन और फिटनेस मायने रखते हैं।

सारांश ने बताया कि 2014-15 में पिता को कैंसर होने के बाद उन्होंने क्रिकेट छोड़ दिया था। हालांकि, पिता ने सर्जरी के बाद एक पर्ची लिखकर उन्हें क्रिकेट जारी रखने के लिए प्रेरित किया। सारांश आज भी उस संदेश को अपने साथ रखते हैं।

सारांश ने श्रीलंका दौरे की तैयारी, परिवार के योगदान, फिटनेस और टेस्ट डेब्यू की उम्मीदों पर बात की।

सवाल: भारतीय टेस्ट टीम में चयन की खबर आपको कैसे मिली?

जवाब: जब भारतीय टीम का ऐलान हुआ, तब मैं सुबह हनुमान मंदिर में था। मुझे पता था कि टीम दोपहर में घोषित होनी है। मंदिर से बाहर निकला तो कई मिस्ड कॉल और मैसेज थे। तभी टीममेट पार्थ साहनी का फोन आया। उन्होंने बधाई दी और बताया कि सिलेक्शन हो गया है।

पहले तो मुझे विश्वास नहीं हुआ। पार्थ ने मुझे स्क्रीनशॉट भी भेजा। अपना नाम देखकर मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया। कई सालों से मैं और मेरा परिवार इस पल का सपना देख रहे थे। वह मेरी जिंदगी के सबसे खुशी भरे पलों में से एक था।

सवाल: सीधे टेस्ट टीम में जगह मिली है। क्या इसकी उम्मीद थी?

जवाब: पिछले तीन-चार साल से मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा है। सिलेक्टर्स ने उस प्रदर्शन को नोटिस किया और उसी का मुझे इनाम मिला।

सवाल: 33 साल की उम्र में टेस्ट टीम में जगह मिलने की काफी चर्चा हो रही है, क्या कहेंगे?

सारांश: मैं हमेशा कहता हूं कि उम्र सिर्फ एक नंबर है। आज के समय में अगर आप फिट हैं और मेहनत करते हैं तो मैदान पर उम्र दिखाई नहीं देती। मुझे भरोसा था कि आज नहीं, तो एक-दो साल में मैं भारत के लिए जरूर खेलूंगा।

सवाल: आपका फिटनेस रूटीन और डाइट क्या है?

जवाब : कुछ खास नहीं, हमारे ट्रेनर मयंक अग्रवाल जो भी बताते हैं, उसी के अनुसार ट्रेनिंग करता हूं। डाइट में भी उनकी सलाह मानता हूं। ज्यादा मीठा और ऑयली खाना नहीं खाता।

सवाल: आपके करियर में चंद्रकांत पंडित की भूमिका कितनी अहम रही?

जवाब: उन्होंने मुझे लगातार मौके दिए। जब वे एमपी के कोच बने तो उन्होंने मुझ पर भरोसा दिखाया। उन्होंने मंच दिया और मैंने उनको निराश नहीं किया।

सवाल: टेस्ट टीम में जगह मिल गई है। डेब्यू को लेकर क्या सोच रहे हैं?

जवाब: डेब्यू मेरे हाथ में नहीं है। यह फैसला कोच और कप्तान का होगा। हेड कोच गौतम भाई और शुभमन गिल दोनों काफी ओपन माइंडेड हैं। उनका जो भी फैसला होगा, मैं उसे खुशी-खुशी स्वीकार करूंगा।

सवाल: अगर आपको डेब्यू कैप मिलती है तो आप इस सदी में भारत के लिए टेस्ट डेब्यू करने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी होंगे?

जवाब: मेरे लिए यह बहुत गर्व की बात होगी। इससे उन घरेलू खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी, जिनकी उम्र थोड़ी ज्यादा हो गई है।

सवाल: मौजूदा भारतीय टीम में कई स्पिन ऑलराउंडर हैं। आप खुद को कहां देखते हैं?

जवाब: जहां भी टीम मुझे मौका देगी, मैं वहां अपना 100% दूंगा। किसी भी नंबर पर बल्लेबाजी करनी पड़े, मैं तैयार हूं।

सवाल: रजत पाटीदार, वेंकटेश अय्यर और आवेश खान से कितनी प्रेरणा मिली?

जवाब: बिल्कुल। जब आप उसी टीम में खेल रहे हों, जहां वेंकटेश अय्यर, आवेश खान, रजत पाटीदार जैसे खिलाड़ी हों, तो उन्हें देखकर काफी मोटिवेशन मिलता है। अगर वे यहां से भारतीय टीम तक पहुंच सकते हैं तो मैं भी पहुंच सकता हूं।

सवाल: आपकी सफलता का सबसे बड़ा क्रेडिट किसे जाता है?

जवाब: मैं अपनी सफलता का श्रेय परिवार और पत्नी को देता हूं। माता-पिता, भाई-बहनों ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। शादी 2022 में हुई और उसके बाद जिंदगी में काफी बदलाव आए। मैं मजाक में पत्नी को अपना ‘लेडी लक’ कहता हूं।

शादी के अगले ही दिन मुझे रणजी ट्रॉफी के मैच के लिए जाना पड़ा। क्रिकेट की वजह से हम साथ ज्यादा समय नहीं बिता सके, लेकिन उन्होंने कभी शिकायत नहीं की और हमेशा मेरा साथ दिया।

सवाल: आपके जीवन का सबसे कठिन दौर कौन सा था?

जवाब: 2014-15 में पिता को मुंह का कैंसर हो गया था। उस समय परिवार और क्रिकेट के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो गया था। हालात ऐसे थे कि मैंने क्रिकेट छोड़ने तक का मन बना लिया था।

सर्जरी के बाद पिता बोल नहीं सकते थे। उन्होंने एक कागज पर लिखकर मुझे संदेश दिया- ‘मैं ठीक हूं बेटा, तुम बस अच्छा क्रिकेट खेलो, मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगा।’ वही चिट्ठी मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन गई। उसकी तस्वीर आज भी मेरे फोन में है।

सवाल: क्रिकेट की शुरुआत कैसे हुई, किससे प्रेरित हुए?

जवाब: मेरे पिता भी रणजी क्रिकेटर रहे हैं। क्रिकेट खेलने की प्रेरणा मुझे उन्हीं से मिली। वह भारत के लिए नहीं खेल पाए, इसलिए हमेशा चाहते थे कि मैं टीम इंडिया को रिप्रेजेंट करूं। भारतीय टीम में चयन मेरे साथ-साथ उनके सपने के पूरा होने जैसा भी है।