आस्था का जुनून जब सिर चढ़कर बोलने लगे, तो मुश्किलें भी रास्ता नहीं रोक पातीं। झज्जर जिले में कांवड़ यात्रा पूरी कर गांव पहुंची ‘लिटिल राइडर’ दीक्षा ने कुछ ऐसा ही जज्बा दिखाया। कांवड़ यात्रा के दौरान 105 डिग्री तक तेज बुखार होने के बावजूद दीक्षा ने हिम्मत नहीं छोड़ी। रास्ते में उसकी बाइक भी खराब हो गई, लेकिन उसने कांवड़ को अधूरा छोड़ने के बजाय होवर बोर्ड का सहारा लिया और अपनी यात्रा पूरी कर गांव पहुंची।
दीक्षा के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने उसका जोरदार स्वागत किया। डीजे, ढोल और नगाड़ों के साथ कांवड़ लेकर पहुंची दीक्षा की अगवानी की गई। जगह-जगह फूल बरसाए गए। ग्रामीणों ने उसे फूलों और पैसों की मालाएं पहनाकर सम्मानित किया। गांव की गलियां ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंज उठीं।
105 डिग्री बुखार में भी जारी रखी कांवड़ यात्रा
दीक्षा की कांवड़ यात्रा आसान नहीं थी। यात्रा के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे 105 डिग्री तक तेज बुखार रहा। इसके बावजूद उसकी आस्था और कांवड़ को मंजिल तक पहुंचाने का संकल्प कमजोर नहीं पड़ा। उसने मुश्किल परिस्थितियों में भी यात्रा जारी रखी।
यात्रा के अंतिम पड़ाव से पहले उसकी बाइक खराब हो गई। उस समय उसके सामने कांवड़ को लेकर आगे बढ़ने की चुनौती थी। लेकिन दीक्षा ने हार नहीं मानी। बाइक का साथ छूटा तो उसने होवर बोर्ड को सहारा बनाया और कांवड़ लेकर गांव की ओर निकल पड़ी। उसका यह जज्बा देखकर रास्ते में मौजूद लोगों ने भी उसकी हौसला अफजाई की।
गांव की सीमा में पहुंचते ही हुआ जोरदार स्वागत
जैसे ही दीक्षा गांव की सीमा में पहुंची, पहले से मौजूद ग्रामीणों में उत्साह छा गया। डीजे और ढोल-नगाड़ों की धुन के बीच दीक्षा का स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने फूल बरसाए और उसे फूलों व पैसों की मालाएं पहनाईं। इस दौरान पूरा माहौल शिवमय हो गया। हर-हर महादेव और भोलेनाथ के जयकारों से गांव की गलियां गूंजती रहीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई दीक्षा के हौसले की तारीफ करता नजर आया।
ग्रामीणों ने कहा कि तेज बुखार जैसी परेशानी और रास्ते में बाइक खराब होने के बावजूद दीक्षा ने जिस तरह कांवड़ को अपनी मंजिल तक पहुंचाया, वह उसके मजबूत इरादों और आस्था को दर्शाता है।
जलाभिषेक करते समय छलक आए दीक्षा के आंसू
गांव पहुंचने के बाद दीक्षा ने भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से जलाभिषेक किया। लंबे सफर के बाद जब उसने भगवान शिव को कांवड़ का जल अर्पित किया तो वह भावुक हो गई। चेहरे पर थकान के साथ यात्रा पूरी होने की खुशी भी साफ दिखाई दे रही थी।
जलाभिषेक के दौरान दीक्षा ने भगवान शिव से गांव की खुशहाली, सुख-समृद्धि और सभी के मंगल की कामना की। साथ ही लोगों को हर जीव-जंतु के प्रति दया और करुणा रखने का संदेश भी दिया।
बाइक ने साथ छोड़ा, लेकिन दीक्षा का हौसला नहीं
दीक्षा की कांवड़ यात्रा सिर्फ आस्था की यात्रा नहीं रही, बल्कि हिम्मत और जिद की कहानी भी बन गई। तेज बुखार ने शरीर को कमजोर किया, बाइक खराब होने से रास्ता मुश्किल हुआ, लेकिन दीक्षा ने अपना संकल्प नहीं छोड़ा। बाइक ने साथ छोड़ा तो होवर बोर्ड सहारा बना, लेकिन दीक्षा का हौसला आखिरी कदम तक कायम रहा। गांव में हुए भव्य स्वागत और जलाभिषेक के साथ उसकी यह कांवड़ यात्रा यादगार बन गई।