अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में गिनी जाने वाली व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 28 साल की लेविट इस महीने के आखिर में व्हाइट हाउस छोड़ देंगी।
ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि लेविट अब अपने परिवार और दो छोटे बच्चों को ज्यादा समय देना चाहती हैं। हालांकि, वह ट्रम्प की बाहरी सलाहकार बनी रहेंगी और रिपब्लिकन पार्टी के लिए काम करती रहेंगी।
लेविट 27 साल की उम्र में अमेरिका के इतिहास की सबसे कम उम्र की व्हाइट हाउस प्रेस सचिव बनी थीं। मई में बेटी के जन्म के बाद वह कुछ समय के मातृत्व अवकाश पर गई थीं और कुछ दिन पहले काम पर लौटी थीं। उनका एक दो साल का बेटा भी है।
डिलीवरी से ठीक पहले भी ड्यूटी निभाई
अप्रैल 2026 में जब व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर के दौरान हुई गोलीबारी पर पूरी दुनिया की नजर थी, तब कैरोलिन लेविट ने अपना मातृत्व अवकाश शुरू करने के बजाय खुद कैमरे के सामने आकर ट्रम्प प्रशासन की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया दी। इसके बाद ही वह मातृत्व अवकाश पर गईं।
मई 2026 में बेटी के जन्म के बाद करीब दो महीने छुट्टी पर रहीं, जुलाई में काम पर लौटीं और एक महीने बाद इस्तीफे का ऐलान कर दिया।
प्रेस सचिव रहते हुए कई बार विवादों में रहीं लेविट
करीब 20 महीने तक कैरोलिन लेविट व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सबसे भरोसेमंद प्रवक्ता रहीं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब भी ट्रम्प की नीतियों, फैसलों या विवादों पर मुश्किल सवाल पूछे जाते, तो उनका जवाब देने की जिम्मेदारी अक्सर लेविट ही संभालती थीं। उन्होंने कई बार ट्रम्प का आक्रामक तरीके से बचाव किया और मीडिया के सवालों का तीखे अंदाज में जवाब दिया।
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पत्रकारों के साथ उनकी कई बार तीखी नोकझोंक हुई, जो सुर्खियों में रही। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने सवाल पूछने वाले एक रिपोर्टर को ‘वामपंथी सोच वाला’ और ‘पत्रकार के नाम पर कलंक’ तक कह दिया था। इस बयान के बाद काफी विवाद हुआ।
लेविट कई बार मेनस्ट्रीम मीडिया पर पक्षपात का आरोप भी लगाती थीं। उनका कहना था कि कुछ मीडिया संस्थान ट्रम्प सरकार के खिलाफ एजेंडा चलाते हैं। वहीं, उन पर आरोप लगता था कि वे पत्रकारों के सवालों से बचने के लिए उन पर व्यक्तिगत हमले करती हैं।
प्रेस ब्रीफिंग में पहली बार यूट्यूबर्स को एंट्री दिलाई
लेविट ने व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग का तरीका भी काफी बदला। उनके कार्यकाल में पहली बार सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, पॉडकास्ट होस्ट, यूट्यूब क्रिएटर्स और ट्रम्प समर्थक डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भी प्रेस ब्रीफिंग में सवाल पूछने का मौका मिला।
ट्रम्प सरकार का कहना था कि इससे ऐसे लोगों तक भी सरकार की बात पहुंचेगी, जो मेन स्ट्रीम मीडिया नहीं देखते। हालांकि, इस फैसले की काफी आलोचना भी हुई। पत्रकारों का कहना था कि सरकार अपनी आलोचना से डरती है और ट्रम्प समर्थकों को ज्यादा अहमियत दी जा रही है।
ट्रम्प की बात नहीं मानी तो AP को प्रेस पूल से बाहर किया
लेविट उस समय भी विवादों में आ गई थीं, जब व्हाइट हाउस ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) को प्रेस पूल से बाहर कर दिया।
यह विवाद इसलिए हुआ क्योंकि एजेंसी ने ट्रम्प सरकार की इच्छा के बावजूद ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ नाम इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया था और अपनी रिपोर्टों में पहले से चल रहे नाम ‘गल्फ ऑफ मेक्सिको’ का ही इस्तेमाल जारी रखा।
अमेरिकी राष्ट्रपति हर जगह सैकड़ों पत्रकारों को साथ नहीं ले जा सकते। इसलिए कुछ चुनिंदा पत्रकारों और मीडिया संस्थानों का एक छोटा समूह बनाया जाता है। इसे प्रेस पूल कहा जाता है।
यह टीम राष्ट्रपति के साथ यात्रा करती है और उनकी बैठकों, कार्यक्रमों और बयानों को सबसे पहले कवर करती है। इसके बाद यही जानकारी बाकी मीडिया संस्थानों के साथ भी साझा की जाती है। यानी प्रेस पूल की खबरें पूरे मीडिया तक पहुंचती हैं।