2025 में पीएम केयर्स फंड में घरेलू दान 30% घटकर करीब 479 करोड़ रुपए रहा। विदेशी दान में भी कमी आई। यह 18% घटकर 92.8 लाख रुपए रह गया है।
2023 में घरेलू दान 681 करोड़ और विदेशी दान 1.13 करोड़ रुपए था। ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में फंड में टोटल रकम 7,173 करोड़ रुपए थी। 2025 में यह 8,452 करोड़ रुपए हो गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2020 में कोविड महामारी फैलने के बाद पीएम केयर्स फंड बनाया था। प्रधानमंत्री ही इस फंड के अध्यक्ष होते हैं। इस फंड में पूरी राशि दान के रूप में आती है और इसे सरकार के बजट से कोई पैसा नहीं मिलता।
पीएम केयर्स में फॉरेन फंडिंग घटी
- इस फंड में फॉरेन फंडिंग 2020-21 में 495 करोड़ रुपए थी, जो अगले दो वित्त वर्षों में घटकर 40 करोड़ रुपए और 2.57 करोड़ रुपए रह गई।
- 2023-24 में विदेशी दान से 1.13 करोड़ रुपए मिले थे। 2024-25 में विदेशी योगदान 92.8 लाख रुपए रहा। यह 2019-20 में मिले 39.7 लाख रुपए के बाद यह सबसे कम डोनेशन रहा।
- 2023 में पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन स्कीम पर पिछले साल 15.37 करोड़ रुपए खर्च हुए। 2024 में यह रकम 15.6 करोड़ रुपए थी।
कोविड में ऑक्सीजन प्लांट-वेंटिलेटर पर हुआ खर्च
- पीएम केयर फंड का इस्तेमाल समय-समय पर इमरजेंसी केयर बढ़ाने के लिए किया गया। केंद्र और राज्य सरकारों के अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने और वेंटिलेटर खरीदने पर पैसा खर्च किया गया।
- 2021-22 में प्रेशर स्विंग ऑक्सीजन प्लांट पर 1,703 करोड़ रुपए खर्च किए गए। वेंटिलेटर पर 835 करोड़ रुपए खर्च हुए। 2021-22 में फंड का कुल खर्च करीब 1,938 करोड़ रुपए था।
RTI के दायरे में नहीं पीएम केयर्स
- पीएम केयर्स फंड को सरकारी फंड नहीं माना गया है। सरकार पहले ही कह चुकी है कि यह एक चैरिटेबल फंड है और यह सीधे RTI के दायरे में नहीं आता है। हालांकि, इस फंड और RTI के दायरे पर सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है।
- पीएम केयर्स फंड का ऑडिट भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक CAG नहीं करता। एक इंडिपेंडेंट चार्टर्ड अकाउंटेंट इसका ऑडिट करता है।
- इस फंड का इस्तेमाल केवल कोविड जैसी महामारी तक सीमित नहीं। इसका इस्तेमाल मेडिकल इमरजेंसी, नेचुरल डिजास्टर या किसी अन्य गंभीर संकट में राहत और सहायता के लिए किया जा सकता है।