PM मोदी ने उज्बेकिस्तान में लोगों को योग सिखाया, ताशकंद में गांधी-शास्त्री स्मारक जाएंगे, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे

पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के उज्बेकिस्तान दौरे पर हैं। उन्होंने रविवार सुबह ताशकंद में एक योग सेशन में हिस्सा लिया। पीएम ने वहां मौजूद लोगों को योग करना भी सिखाया।

पीएम ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर भी जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा है।

ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी।

बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्केक रवाना होंगे।

31 अगस्त को पीएम किर्गिस्तान जाएंगे: SCO समिट में शामिल होंगे

उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे।

भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है।

मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे।

किर्गिस्तान में मोदी के लिए गुजराती खाना; थेपला, खिचड़ी और कढ़ी बनेगी

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में गांधी रेस्टोरेंट के हेड शेफ चिन्मय बडोदेकर ने बताया कि PM मोदी का स्वागत करते हुए कहा कि उनके लिए घर जैसा ताजा गुजराती खाना तैयार किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि नाश्ते में पोहा, उपमा और इडली-सांभर रखा जाएगा। लंच में थेपला, दाल-चावल और गुजराती सब्जियां परोसी जाएंगी। वहीं डिनर में PM मोदी के लिए खिचड़ी-कढ़ी बनाई जाएगी।

भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट

1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है।

2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है।

3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है।

4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे

2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था।

2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना।

2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था।

अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना।

SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है।