PMCH में अब किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू करने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन ने एक सप्ताह पहले हुई बैठक में यह फैसला लिया। मंजूरी मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं।
पीएमसीएच प्रशासन ने फरवरी तक किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट समेत कई तरह के ट्रांसप्लांट शुरू करने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन जरूरी तैयारियों को पूरा करने में जुटा है।
अगर तय समय-सीमा में यह सुविधा शुरू होती है तो यह बिहार के सरकारी स्वास्थ्य ढांचे में एक महत्वपूर्ण विस्तार होगा। खासकर उन मरीजों के लिए इसका महत्व अधिक होगा, जिन्हें ट्रांसप्लांट के लिए लंबे समय से राज्य के बाहर इलाज कराना पड़ता है।
पीएमसीएच अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि फरवरी तक किडनी ट्रांसप्लांट और बोन मैरो ट्रांसप्लांट समेत कई तरह के ट्रांसप्लांट शुरू करने का लक्ष्य है।
अस्पताल में अन्य ट्रांसप्लांट सेवाएं भी शुरू करने की तैयारी
इस सुविधा से बिहार के उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली, मुंबई या कोलकाता जैसे बड़े शहरों में जाना पड़ता था। राज्य के सरकारी अस्पताल में यह सुविधा मिलने से मरीजों और उनके परिजनों का इलाज के साथ-साथ आने-जाने और रहने का खर्च भी बचेगा।
डॉ. राजीव कुमार सिंह ने यह भी बताया कि स्वास्थ्य विभाग से ट्रांसप्लांट सेवाएं शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। अस्पताल की योजना है कि तय समय-सीमा के भीतर सभी जरूरी व्यवस्थाएं पूरी कर इन सेवाओं को शुरू किया जाए।
किडनी ट्रांसप्लांट और बोन मैरो ट्रांसप्लांट इनमें मुख्य हैं। इसके अलावा अस्पताल में अन्य ट्रांसप्लांट सेवाएं भी शुरू करने की तैयारी है। अधीक्षक के अनुसार, फरवरी तक एक साथ कई तरह के ट्रांसप्लांट शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।
8 सितंबर को हुई थी स्वास्थ्य विभाग की बैठक
पीएमसीएच के नेफ्रोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. गोपाल प्रसाद ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर स्वास्थ्य विभाग के सचिव और चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। चिकित्सा विस्तार पर मंथन किया गया था।
बैठक में पीएमसीएच में ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू करने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। इसके बाद विभाग की ओर से हरी झंडी मिलने पर अस्पताल प्रशासन ने तैयारियों को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है।
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए नेफ्रोलॉजी विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, जबकि बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए संबंधित विशेषज्ञ विभागों और जरूरी चिकित्सा व्यवस्थाओं को विकसित करना होगा।
अभी इलाज के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता
बिहार में ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले कई मरीज इलाज के लिए राज्य से बाहर जाते हैं। किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए मरीजों को बड़े चिकित्सा केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है।
बाहर इलाज कराने में सिर्फ ट्रांसप्लांट का खर्च ही नहीं, बल्कि मरीज और उसके परिजनों के रहने, खाने और आने-जाने का खर्च भी जुड़ जाता है। लंबे इलाज के दौरान यह आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है।
पीएमसीएच में स्वास्थ सेवा में विस्तार और ट्रांस्प्लांट सुविधा शुरू होने से ऐसे मरीजों को राज्य के भीतर ही इलाज उपलब्ध कराने का रास्ता खुल सकता है।
गरीब मरीजों को सबसे ज्यादा फायदा
पीएमसीएच प्रशासन के अनुसार, ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने के बाद मरीजों को मुफ्त में ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
किडनी और बोन मैरो ट्रांसप्लांट सामान्य इलाज की तुलना में काफी जटिल प्रक्रियाएं हैं। इनके लिए लंबे समय तक जांच, विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी, ऑपरेशन और बाद की देखभाल की जरूरत होती है।
निजी अस्पतालों में इसका खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे में पीएमसीएच में सरकारी स्तर पर सुविधा मिलने से उन मरीजों को फायदा हो सकता है, जो आर्थिक कारणों से ट्रांसप्लांट का इलाज कराने में परेशानी का सामना करते हैं।