मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने में तैनात दरोगा अंकित सागर और मुख्य आरक्षी नीरज कुमार को गुरुवार शाम निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही मुजफ्फरनगर के पमनावली चौकी प्रभारी आरिफ अली पर भी गाज गिरी है। इन तीनों पर नोएडा के फर्नीचर कारोबारी शाहिद चौधरी से बैंक खाता खुलवाने के नाम पर 4.72 लाख रुपए वसूलने का आरोप है।
कारोबारी ने डीआईजी कलानिधि नैथानी से शिकायत की थी। जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने दोनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। उनके खिलाफ विभागीय जांच एसपी सिटी को सौंपी गई है।
शाहिद ने शिकायत में हिरासत में रखने, मारपीट करने और उनका आईफोन, घड़ी व बेल्ट कब्जे में लेने का भी आरोप लगाया है। मामले में खतौली थाने में तैनात रहे दरोगा आरिफ अली समेत अन्य लोगों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। मेरठ में जांच सीओ साइबर क्राइम सौम्या अस्थाना को सौंपी गई है, जबकि लिसाड़ी गेट प्रकरण की शुरुआती जांच में लापरवाही पर सीओ कोतवाली संग्राम सिंह को अंतिम चेतावनी दी गई है।
थाने बुलाकर हिरासत में रखने और वसूली का आरोप
गौतमबुद्धनगर के गेझा, सेक्टर-93 निवासी फर्नीचर कारोबारी शाहिद चौधरी के मुताबिक, 2 अगस्त को लिसाड़ी गेट थाने के दरोगा अंकित सागर और कांस्टेबल नीरज कुमार ने दानिश नाम के युवक की शिकायत पर उन्हें थाने बुलाया था। आरोप है कि वहां उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखकर मारपीट की गई। इस दौरान उनका आईफोन, घड़ी और बेल्ट भी ले ली गई।
शाहिद ने आरोप लगाया कि बैंक खाता खुलवाने के नाम पर उनसे रकम मांगी गई। उन्होंने डीआईजी कार्यालय पहुंचकर तीन पन्नों की शिकायत दी और मामले से जुड़े साक्ष्य उपलब्ध कराए। शिकायत में खतौली थाने में तैनात दरोगा आरिफ अली पर भी आरोप लगाए गए हैं। शाहिद के मुताबिक, उनकी पत्नी का बैंक खाता फ्रीज होने के मामले में भी रकम मांगी गई थी।
पुलिस ने प्रेसनोट जारी कर निलंबन की पुष्टि की
मेरठ पुलिस की ओर से जारी प्रेसनोट में बताया गया कि लिसाड़ी गेट थाने में तैनात उपनिरीक्षक अंकित सागर और मुख्य आरक्षी नीरज कुमार को साइबर अपराध पीड़ित के साथ अनुचित आचरण और पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने के मामले में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
प्रेसनोट के मुताबिक, दोनों के खिलाफ विभागीय जांच एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले को सौंपी गई है। कारोबारी ने अपनी शिकायत में 4.72 लाख रुपए की वसूली का आरोप लगाया है। मामले में शादाब राव उर्फ शालू समेत अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
बिना पीड़ित से बात किए जांच पूरी करने पर सीओ को चेतावनी डीआईजी कलानिधि नैथानी ने शिकायत मिलने के बाद एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति को मामले की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। डीआईजी के मुताबिक, सीओ कोतवाली संग्राम सिंह ने शुरुआती जांच में गंभीरता नहीं दिखाई और पीड़ित से बात किए बिना ही जांच पूरी कर दी। इस पर डीआईजी ने नाराजगी जताते हुए सीओ से जवाब तलब किया और अंतिम चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि आगे कोई गलती पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीआईजी ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्त पुलिसकर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा और सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई की जाएगी।
पत्नी का खाता अनफ्रीज के नाम पर एक लाख रुपये लेने का आरोप मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र में पमनावली चौकी प्रभारी आरिफ अली पर भी शाहिद चौधरी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, उनकी पत्नी का बैंक खाता धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए जाने की बात कहकर फ्रीज कर दिया गया था। इसे अनफ्रीज कराने के बदले मुजफ्फरनगर और मेरठ के पुलिसकर्मियों ने अलग-अलग मामलों में रकम मांगी। शाहिद का आरोप है कि दरोगा आरिफ अली ने उनकी पत्नी के बैंक खाते के फ्रीज होने का हवाला देकर धनराशि मांगी। दबाव बनाकर उनके भाई से एक लाख रुपये वसूल लिए गए। रकम लेने के बाद भी शेष धनराशि देने के लिए लगातार दबाव बनाया गया।
शाहिद ने एक लाख रुपये दिए जाने से संबंधित वीडियो साक्ष्य मौजूद होने का दावा भी किया है। शिकायत के बाद मामले की जांच शुरू हुई। मुजफ्फरनगर के एसएसपी सूरज राय ने बताया कि आरोपों से घिरे पमनावली चौकी प्रभारी आरिफ अली को निलंबित कर दिया गया है। मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है।
अभद्रता की और लॉकअप में बंद कर दिया
शाहिद के मुताबिक, मेरठ पहुंचने पर दरोगा अंकित सागर और हेड कांस्टेबल नीरज कुमार ने उनके साथ अभद्रता की और लॉकअप में बंद कर दिया। उनका आईफोन, घड़ी और बेल्ट भी ले ली गई। भाई सन्नवर और जाबिर थाने पहुंचे तो उनसे रकम मांगी गई।
4 अगस्त को 1.20 लाख रुपए शादाब राव के खाते में ट्रांसफर कराए गए। इसके बाद 2.80 लाख रुपए नकद दिए गए। रकम मिलने पर आईफोन 17 लौटा दिया गया, लेकिन घड़ी और बेल्ट नहीं दी गईं। अगले दिन दोनों पुलिसकर्मियों ने अफसर को देने के नाम पर सोफा मांगा। इसके लिए सोफे की फोटो और दो क्यूआर कोड भेजे। फिर मोहम्मद इमरान और सुशीला के नाम वाले खातों में 36-36 हजार रुपए भेजने को कहा गया।
जनसुविधा केंद्र संचालक और पूर्व दरोगा पर भी आरोप
शाहिद ने आरोप लगाया कि उनका बैंक खाता फ्रीज कर रकम देने का दबाव बनाया गया। उनके मुताबिक, 7 अगस्त को शादाब राव ने ईमेल भेजकर खाता दोबारा चालू कराने के लिए बैंक से किए गए पत्राचार की जानकारी दी थी।
कारोबारी ने शादाब पर पुलिसकर्मियों के साथ मिलकर अवैध वसूली करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि शादाब थाने के सामने जनसुविधा केंद्र चलाता है और पुलिसकर्मियों के संपर्क में रहता है। शाहिद ने डीआईजी को कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और अन्य दस्तावेज सौंपने की बात कही है।
शाहिद ने पत्नी से जुड़े एक पुराने मामले में भी वसूली का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, उस समय पत्नी का बैंक खाता फ्रीज कर एक लाख रुपए मांगे गए थे। उन्होंने पूर्व दरोगा आरिफ अली पर मामले में हस्तक्षेप करने और डराने-धमकाने का आरोप लगाया। शाहिद के मुताबिक, आरिफ पहले मेरठ में तैनात था और शादाब से उसके संबंध थे। एसएसपी ने मामले की जांच एसपी सिटी विनायक गोपाल भोंसले को सौंपी है।