8 गांवों में भूमि अधिग्रहण ठप:यमुना जल प्रोजेक्ट के विरोध में किसानों का चूरू के तांबाखेड़ी में 72 दिन से धरना

सीकर, झुंझुनूं और चूरू की 50 लाख से अधिक आबादी की प्यास बुझाने वाली यमुना जल परियोजना भूमि अधिग्रहण के विवाद में उलझ गई है। 34 हजार करोड़ रुपए की इस परियोजना के तहत चूरू जिले के हांसियावास क्षेत्र में तीन रिजर्वायर बनाने के लिए करीब 5 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि अधिग्रहित की जानी है। लेकिन 8 गांवों के किसानों ने उपजाऊ जमीन देने से इनकार कर दिया है। तांबाखेड़ी बस स्टैंड पर 72 दिन से अनिश्चितकालीन धरना जारी है। किसानों और प्रशासन के बीच सहमति नहीं बनने से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अटक गई है। किसानों का कहना है कि यमुना का पानी संरक्षित करने के लिए सरकारी जमीन पर रिजर्वायर बनाए जाएं, खेती की जमीन किसी कीमत पर नहीं दी जाएगी। विवाद की सबसे बड़ी वजह मुआवजे की राशि है।

किसानों का आरोप है कि सरकार 2013 की डीएलसी दरों के आधार पर प्रति बीघा 2 से 5 लाख रुपए दे रही है, जबकि बाजार में जमीन की कीमत 10 से 14 लाख रुपए प्रति बीघा है। वहीं, प्रशासन का दावा है कि 2013 की 2 लाख रुपए प्रति बीघा डीएलसी दर के आधार पर 3.25 से 4 गुना तक मुआवजा दिया जा रहा है। परियोजना के लिए हांसियावास, ढिगारला, चुबकियागढ़, रामसरा टीबा, तांबाखेड़ी, धाणोती छोटी, धाणोती बड़ी और धूमकी गांवों की करीब 5 हजार हैक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि अधिग्रहित की जानी है। किसान नेताओं के अनुसार, इससे करीब 10 हजार किसान परिवारों की आजीविका पर सीधा संकट आएगा। इन परिवारों की निर्भरता खेती पर है और जमीन उनके लिए रोजी-रोटी का प्रमुख आधार है।