1,000 वर्षों में सबसे कमजोर हुई गल्फ स्ट्रीम, भारतीय मानसून होगा प्रभावित

जलवायु पर्वितन के गंभीर असर सामने आने लगे हैं। गल्फ स्ट्रीम को नियंत्रित करने वाली अटलांटिक सागर की धारा 1,000 वर्षो में सबसे कमजोर हो गई है। यह धारा अपने साथ मेक्सिको की खाड़ी से ब्रिटेन तक गर्म जल ले जाती है, जिसके कारण पश्चिमी यूरोप में ठंड कम पड़ती है। विज्ञानियों का मानना है कि अगर यह धारा कमजोर होती रही तो यूरोप में हिम युग आ जाएगा। आइए जानते हैं कि गल्फ स्ट्रीम क्या है, अटलांटिक सागर की धारा इसे कैसे नियंत्रित करती है और इसके कमजोर पड़ने से यूरोप व भारत के साथ दुनिया के अन्य हिस्से कैसे प्रभावित होंगे..

कब से कम हो रही एएमओसी की रफ्तार

अटलांटिक महासागर की धारा को अटलांटिक मेरिडिओनल ओवरटर्निग सकरुलेशन (एएमओसी) के रूप में जाना जाता है। वर्ष 2018 में हुए एक अध्ययन में पाया गया था कि एएमओसी की गति 20वीं सदी के मध्य के बाद 15 फीसद कम हुई। हालांकि, वर्ष 1850 में कथित लघु हिम युग के खात्मे के बाद से ही इसका प्रवाह धीमा पड़ने लगा था।

ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से हो रहा बड़ा नुकसान

नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित अध्ययन से जुड़े पोट्सडैम इंस्टीट्यूट, आयरलैंड की मेनूथ यूनिवर्सिटी व यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के विज्ञानी कहते हैं कि अगर ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं रोका गया तो धारा का पूरी तरह रुक जाना बहुत हद तक संभव है। अध्ययन के लेखक स्टीफन आर. कहते हैं, ‘गल्फ स्ट्रीम एक बड़े कन्वेयर बेल्ट की तरह है, जो भूमध्य रेखा से समुद्र की सतह पर स्थित गर्म पानी को उत्तर की तरफ ले जाती है और बादलों तथा गहरे खारे पानी को दक्षिण की तरफ धकेल देती है। इसकी रफ्तार करीब दो करोड़ क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड होती है जो अमेजन की धारा से 100 गुना तेज है।’

अमेरिका में बढ़ जाएगा समुद्र का जलस्तर, यूरोप पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

वर्ष 1950 से 2015 के बीच एएमओसी की रफ्तार 15 फीसद कम हुई है, लेकिन विशेषज्ञों की राय है कि वर्ष 2100 तक यह 45 फीसद कमजोर हो सकती है। इसके बाद स्थितियां बेहद खराब हो जाएंगी और मानवता खतरे में पड़ जाएगी। इससे पश्चिमी यूरोप में अधिक ठंड पड़ने लगेगी और सूखा, तूफान व लू आम बात हो जाएगी। पूर्वी अमेरिकी तट के पास समुद्र का स्तर बढ़ जाएगा।

औद्योगिक क्रांति का भी असर

वर्ष 1950 के आसपास एएमओसी की गति इसलिए भी कम हुई, क्योंकि तब उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण ने उसके निर्माण का रास्ता रोकना शुरू कर दिया। ग्रीनलैंड में बर्फ पिघलने लगी और उसका पानी समुद्र में समाने लगा। इससे समुद्र की लवणता व पानी का घनत्व कम होता गया। गर्म पानी का प्रवाह उत्तर की ओर बाधित हुआ और एएमओसी कमजोर होती गई।

बिगड़ जाएगा मौसम का मिजाज

पृथ्वी के नियमन में समुद्री धाराओं की अहम भूमिका होती है। उत्तरी अटलांटिक के कमजोर प्रवाह का न सिर्फ उत्तरी अमेरिका व यूरोप की जलवायु, बल्कि अफ्रीका और एशिया के मानसून पर भी प्रभाव पड़ता है। यह समुद्री सतह के तापमान, जल विज्ञान चक्र, वायुमंडलीय परिसंचरण आदि पर भी गहरा प्रभाव छोड़ती है।