बस कहने भर की देर, रोहतक में निशुल्‍क घर पहुंचते हैं दूध, ऑक्‍सीनज, एंबुलेंस और पीपीई किट

कोरोना काल में सेवा भाव से लोग जुटे हुए हैं। लोगों की हर संभव मदद कर रहे हैं। रोहतक में सलाह नहीं, साथ चाहिए नाम से इंटरनेट मीडिया पर ग्रुप है, जो कोरोना संक्रमित मरीजों की सेवा में जुटा है। ग्रुप में शहर के अलग-अलग वर्गों के लोग जुड़े हैं, जो एक-दूसरे को सलाह देने की बजाय लोगों की मदद करने में विश्वास रखते हैं। एक सप्ताह से भी कम समय हुआ है, लेकिन काफी लोगों को उनके घर में ही मदद पहुंचा चुके हैं। इस ग्रुप को दस लोगों ने शुरू किया था, जिसके अब 30 से अधिक सदस्य बन चुके हैं।

किसी को गाय का दूध तो किसी के लिए डोनेट करवा रहे प्लाज्मा

कोरोना संक्रमित लोगों की जल्दी रिकवरी के लिए गाय का दूध व घी भी निश्शुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए ग्रुप में कोई भी सूचना मिलती है तो तुरंत सभी सदस्य सक्रिय हो जाते हैं। गाय

का दूध पहरावर गोशाला से उपलब्ध कराया जाता है। दूध ही नहीं बल्कि कोरोना के गंभीर मरीजों को प्लाज्मा तक डोनेट करवाया जा रहा है। इस ग्रुप में कई रक्तदान करवाने वाले संगठनों के प्रतिनिधि हैं, जो बिना देरी किए हरसंभव प्रयास में जुट जाते हैं।

कोरोना संक्रमित व्यक्ति के परिवार को दे रहे पीपीइ किट

शहर में जो भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो जाता है, उनके परिवार के सदस्यों की बचाव के लिए जरूरत के मुताबिक पीपीइ किट, सैनिटाइजर, ग्लब्ज व अन्य सामान उपलब्ध कराया जाता है। कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए आयुर्वेदिक काढा, दवा, स्टीमर, थर्मामीटर भी दिया जाता है। जो व्यक्ति निशुल्ल नहीं लेना चाहते, उनको बहुत ही कम रेट पर पीपीइ किट व अन्य सामान दिलाने की व्यवस्था भी की गई है।

फ्री एंबुलेंस व निश्शुल्क आक्सीजन लंगर

कोरोना महामारी को देखते हुए मरीजों को अस्पताल ले जाने और अस्पताल से घर ले जाने के लिए एंबुलेंस संचालक मोटी रकम ले रहे हैं। ऐसे में जनसेवा संस्थान की तरफ से 24 घंटे निश्शुल्क एंबुलेंस शहर को दी है। इस एंबुलेंस की सेवाएं कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति ले सकता है। इसके लिए ग्रुप के सदस्यों तक सूचना पहुंचाने की देर है। साथ ही, कुछ ऐसे लोग भी शामिल हो गए हैं, जो निशशुल्क ऑक्सीजन लंगर भी लगवा रहे हैं।

इस ग्रुप बनाने का उद्देश बिना देर किए लोगों तक मदद पहुंचाना है। इसलिए सलाह नहीं, साथ चाहिए ग्रुप को नाम दिया है। इसमें धर्म गुरु, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, व्यापारी, शिक्षक व अन्य प्रबुद्ध लोग शामिल हैं। आठ मई को ग्रुप बनाया था, जो काफी लोगों तक मदद पहुंचा चुका है।