मिनटों में फिनिश कर देते हैं लंच हो या डिनर? बहुत जल्दी-जल्दी खाने की आदत है तो सावधान

शरीर को स्वस्थ और फिट रखना चाहते हैं तो आहार में सुधार करना इसके लिए सबसे जरूरी माना जाता है। हम जो कुछ भी खाते-पीते हैं उसका सेहत पर सीधा असर होता है। हम क्या खा रहे हैं इसका ध्यान रखना तो जरूरी है ही, इससे भी ज्यादा जरूरी है इस बात का ध्यान रखना कि हम उसे कैसे खा रहे हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बढ़ती भाग-दौड़, ऑफिस की जल्दी में लोगों की खाने की आदतें काफी बदलती जा रही हैं। लोगों के पास शांति से खाना खाने का वक्त नहीं है, लिहाजा जल्दी-जल्दी में खाने की आदत होती जा रही है। हालांकि ये आदत सेहत के लिए कई तरह की दिक्कतें बढ़ाने वाली मानी जाती है।

अगर आप भी बहुत जल्दी-जल्दी खाना खाते हैं तो सावधान हो जाइए, इसके कई नुकसान हो सकते हैं। 

बिना ठीक से चबाए खाना खाना ठीक नहीं

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, बहुत तेजी से या बिना ठीक से चबाए खाना खाना और जल्दी-जल्दी निगलना, पाचन तंत्र पर सीधा असर डालता है।

  • जब हम खाना ठीक से नहीं चबाते तो लार पर्याप्त मात्रा में नहीं बनती, जिससे पाचन में समस्या हो सकती है।
  • आमतौर पर दिमाग को पेट भरने का संकेत मिलने में लगभग 20 मिनट का समय लगता है, इसलिए जल्दी खाने वाले लोग अक्सर जरूरत से ज्यादा खा लेते हैं।

जल्दी-जल्दी खाना सिर्फ पाचन स्वास्थ्य के लिए ही नहीं बल्कि हृदय की सेहत और कई अन्य समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है।

पेट से जुड़ी दिक्कतों का खतरा

बहुत तेजी से खाना खाने की आदत आपके पाचन तंत्र को प्रभावित करने वाली हो सकती है।

  • पाचन की प्रक्रिया मुंह से शुरू होती है, जहां लार में मौजूद एंजाइम कार्बोहाइड्रेट को तोड़ना शुरू कर देते हैं।
  • जब हम बिना ठीक से चबाए खाना निगल लेते हैं, तो यह प्रक्रिया अधूरी रह जाती है।
  • इससे पेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और एसिडिटी, गैस, अपच, पेट फूलना और भारीपन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
  • तेजी से खाने वाले लोगों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं ज्यादा देखी जाती हैं। इसके अलावा जल्दी खाने से हवा भी ज्यादा मात्रा में निगल ली जाती है, जिससे ब्लोटिंग और डकार की समस्या हो सकती है।

क्रॉनिक बीमारियों का भी हो सकता है खतरा

बहुत तेजी से खाना खाने की आदत आपमें मोटापे और मेटाबॉलिक बीमारियों के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।  यदि आप बहुत तेजी से खाते हैं, तो इससे दिमाग को पेट भरने का संकेत न मिलने से आप जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने लगते हैं।

इससे वजन बढ़ने का खतरा रहता है जिससे टाइप-2 डायबिटीज और इंसुलिन रेसिस्टेंस का जोखिम हो सकता है। इसके अलावा यह आदत मेटाबॉलिक सिंड्रोम का कारण बन सकती है जो आगे चलकर हृदय रोग का कारण बन सकते हैं। 

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