उत्तर कोरिया में 2026 के संसदीय चुनावों ने एक बार फिर वैश्विक ध्यान खींचा है। सरकारी मीडिया केसीएनए के अनुसार, देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन और उनकी वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया ने एक बार फिर लगभग सभी वोट और सभी सीटें अपने नाम करते हुए भारी बहुमत से जीत हासिल की। 15 मार्च को आयोजित इन चुनावों में 15वीं सर्वोच्च जनसभा के सदस्यों का चयन हुआ। मतदान प्रतिशत लगभग पूर्ण रहा, जिससे सरकार ने इसे जनता के समर्थन का प्रतीक बताया।
चूकी किम जोंग उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता हैं और वहां लोकतंत्र नहीं है, तो जाहिर सी बात है कि जीत उनकी ही होनी थीं। हालांकि इन सभी चिजों के बीच ध्यान खींचने वाली बात यह है कि किम की पार्टी और उसके सहयोगी दलों को 99.93 प्रतिशत वोट मिले। इसके बाद सवाल यह उठ रहा है कि आखिर 0.7 प्रतिशत मतदाता कौन हैं, जिन्होंने किम जोंग या उनकी पार्टी को वोट नहीं दिया। ये बात सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा में है।
किम को क्यों नहीं पड़े 0.7 प्रतिशत वोट?
इस बात को समझने के लिए पहले ये समझना होता कि आखिर उत्तर कोरिया में चुनाव कैसे होता है? उत्तर कोरिया में चुनाव की प्रक्रिया दुनिया के अन्य लोकतांत्रिक देशों से बहुत अलग है। यहां के चुनाव में मतदाताओं को केवल एक उम्मीदवार का नाम वाला मतपत्र दिया जाता है। इसके बाद अगर कोई व्यक्ति उम्मीदवार का विरोध करना चाहता है, तो उसे अलग बूथ में जाकर नाम काटना पड़ता है। यह प्रक्रिया गुप्त नहीं होती और इसे कभी-कभी राजद्रोह जैसा माना जा सकता है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के चुनाव में जनता के लिए वास्तविक विकल्प बहुत कम होते हैं और अधिकांश लोग केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए ही वोट डालते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पंजीकृत मतदाताओं में से 99.99% लोगों ने वोट डाला। केवल 0.0037% लोग विदेश में होने या समुद्र में काम करने के कारण मतदान नहीं कर सके, जबकि सिर्फ 0.00003% लोगों ने वोट डालने से परहेज किया। मतदान करने वालों में से 99.93% ने उम्मीदवारों का समर्थन किया, जबकि 0.07% ने विरोध में वोट दिया।
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