राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था को अधिक छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि अब बोर्ड परीक्षाओं में छात्रों को दो बार मौका देने की व्यवस्था लागू की जा रही है, साथ ही विद्यार्थियों के नामों को अधिक सम्मानजनक बनाने पर भी काम हो रहा है।
सरकार का मानना है कि ये कदम छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ शिक्षा प्रणाली को अधिक संवेदनशील बनाएंगे, वहीं पेपर लीक और फर्जी तरीके से नौकरी पाने वालों पर सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
दिलावर ने गलत तरीके से सरकारी नौकरी पाने वालों को लेकर कहा कि SOG इस पूरे मामले की जांच कर रही है। हम किसी को छोड़ेंगे नहीं, हमारे यहां दया का भाव नहीं है। हम तो सौभाग्य से ऐसी जाति में पैदा हुए हैं, जहां दया का भाव होता ही नहीं है।
बुधवार को जयपुर शिक्षा संकुल में मीडिया से बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री दिलावर ने बताया कि राजस्थान में इस बार बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों ने सरकारी स्कूलों की तस्वीर बदल दी है। पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों में बड़ी संख्या सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों की है।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि भले ही शिक्षा विभाग मेरिट सूची जारी नहीं करता, लेकिन आंकड़ों के विश्लेषण में सरकारी स्कूलों के छात्रों का प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है।
दिव्यांग छात्र ने पूरे नंबर हासिल कर की मिसाल कायम
उन्होंने बताया कि इस साल कक्षा 12वीं में करीब 12 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से लगभग 11,500 विद्यार्थियों ने 90% से अधिक अंक हासिल किए। वहीं कक्षा 10वीं में एक दिव्यांग छात्र ने दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद 600 में से 600 अंक प्राप्त कर मिसाल कायम की है।
दिलावर ने बताया कि अब इन होनहार छात्रों को जिला और ब्लॉक स्तर पर होर्डिंग, बैनर और पोस्टर के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। इससे सरकारी स्कूलों में हो रहे सकारात्मक बदलाव की जानकारी आमजन तक पहुंचेगी। शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि अब कई अभिभावक निजी स्कूलों से अपने बच्चों को निकालकर सरकारी स्कूलों में प्रवेश दिला रहे हैं।
शिक्षा विभाग की छात्रों के नामों को लेकर भी नई पहल
दिलावर ने बताया कि शिक्षा विभाग ने छात्रों के नामों को लेकर भी नई पहल की है। ऐसे लगभग 2 से 3 हजार नाम चिन्हित किए गए है, जो निरर्थक या असम्मानजनक है। स्कूलों को सूची उपलब्ध करवाई जाएगी और शिक्षकों के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों के लिए सम्मानजनक नाम रखने के सुझाव दिए जाएंगे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह बाध्यता नहीं बल्कि, सुझाव होगा और प्रवेश के समय या अन्य निर्धारित अवसरों पर नाम परिवर्तन का विकल्प उपलब्ध रहेगा।
शिक्षा के मामले में राजस्थान पहुंचा चौथे नंबर पर
शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य का शैक्षणिक स्तर तेजी से सुधर रहा है। राजस्थान, जो पहले देश में 14वें स्थान पर था, अब चौथे स्थान पर पहुंच गया है। आगे सुधार के लिए उन शिक्षकों की सूची तैयार की जाएगी, जो किसी प्रकार के नशे या दुर्व्यसन के साथ स्कूल आते हैं। भविष्य में उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की संभावना जताई गई है।
अब छात्र बोर्ड परीक्षा दे सकेंगे दो बार
दिलावर ने बताया कि राजस्थान में शिक्षा विभाग की नई व्यवस्था के तहत छात्र अब बोर्ड परीक्षा दो बार दे सकेंगे। पहली परीक्षा के 45 दिन बाद दूसरी परीक्षा आयोजित की जाएगी, जिससे छात्र अपने अंक सुधार सकेंगे। हालांकि, पहली परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले छात्रों को दूसरा अवसर नहीं मिलेगा।
पहली बार 1 अप्रैल से ही सरकारी स्कूलों में नया सत्र शुरू
उन्होंने कहा कि राज्य में पहली बार 1 अप्रैल से ही सरकारी स्कूलों में नया सत्र शुरू कर दिया गया है। 11 अप्रैल तक प्रवेश उत्सव मनाया जा रहा है। ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसके साथ ही मंत्री ने शिक्षकों को घुमंतू जाति के बच्चों को बिना आईडी के भी प्राथमिकता से प्रवेश देने के निर्देश दिए।
दिलावर ने बताया कि अब प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में अब एलुमनाई मीट आयोजित की जाएगी, जिसमें पूर्व छात्रों को बुलाकर वर्तमान छात्रों को प्रेरित किया जाएगा। वहीं अब पीटीआई शिक्षकों को हर पीरियड में छात्रों को खेल गतिविधियों से जोड़ने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके।
जयपुर में अचानक स्कूल बंद करने के मामले में जांच के निर्देश
जयपुर के श्याम नगर में एक निजी स्कूल द्वारा फीस और अन्य शुल्क लेकर अचानक स्कूल बंद करने के मामले पर शिक्षा मंत्री ने संज्ञान लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
वहीं शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि आरटीई के तहत अब वास्तविक जरूरतमंद बच्चों को प्राथमिकता देने की दिशा में बदलाव किए जा रहे हैं, ताकि योजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचे।