महिला किसान ने खेती के साथ डेयरी फार्म लगाया:साइंटिफिक तरीके से आमदनी तीन गुना बढ़ी, कृषि विभाग से पुरस्कार भी मिल चुका

भरतपुर जिले के गांव सिंघाड़ा की रहने वाली किसान लक्ष्मी देवी कभी पारंपरिक खेती तक सीमित थी, लेकिन आज उन्होंने आधुनिक और एकीकृत कृषि के बूते खेती को लाभकारी बना लिया है। कुछ वर्ष पहले तक लक्ष्मी देवी अपने 1.5 हैक्टेयर खेत में केवल पारंपरिक फसलें गेहूं, सरसों, बाजरा उगाया करती थीं। कड़ी मेहनत के बाद भी साल के अंत में इतनी ही आय हो पाती थी। लक्ष्मी देवी ने पति के साथ मिलकर इस स्थिति को बदला। उन्हें कृषि विभाग की आत्मा योजना के बारे में पता चला।

प्लास्टिक टनल बनाई

फिर प्रशिक्षण शिविरों में हिस्सा लिया और वैज्ञानिक खेती की बारीकियों को समझा। वर्ष 2021-22 में उन्होंने फूलों और फल-सब्जियों की मिश्रित खेती की शुरुआत की। खेत में वैज्ञानिक तरीके से क्यारियां बनाकर मल्चिंग शीट बिछाई और लो-टनल तकनीक का इस्तेमाल किया। इस प्लास्टिक टनल का फायदा यह हुआ कि कड़ाके की ठंड, पाला या अत्यधिक गर्मी का फसलों पर असर नहीं पड़ा। प्रतिकूल मौसम में भी गुलाब, गेंदा और सूरजमुखी जैसे फूलों की खेती कर रही हैं। बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं। फूलों के साथ-साथ उन्होंने बहुफसली चक्र को अपनाया है।

डेयरी में 15 दूध देने वाले पशु

खेत में पपीता, खरबूज, तरबूज जैसे फलों के साथ-साथ प्याज, फूलगोभी, मिर्च, खीरा और ब्रोकली जैसी नकदी सब्जियां भी उगाते हैं। पूरे खेत में बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली अपनाई है। लक्ष्मी ने बताया कि सिर्फ फसलों पर निर्भर रहने के बजाय साथ में डेयरी स्थापित की। साहीवाल, राठी व देसी नस्ल की 12 गायें और 3 भैंसें मिलाकर कुल 15 दुधारू पशु हैं। रोजाना सौ सवा लीटर दूध डेयरी पर ही 75 रुपए लीटर बिक रहा है। वहीं पशुओं के गोबर से खेत के लिए खाद घर पर ही मिल जाती है। उद्यान विभाग से फसलों को बचाने के लिए कांटेदार तारबंदी पर अनुदान लिया।

फूल भी बिक रहे

खेत के एक हिस्से में व्यावसायिक रूप से गुलाब का बगीचा स्थापित करने के लिए भी सरकारी सहायता मिली है। बयाना, हिंडौन व भरतपुर तक फूलों की डिमांड है। सौ से लेकर पांच सौ रुपए किलो के हिसाब से बिक जाते हैं। कभी सालाना बमुश्किल 2 लाख रुपए की आमदनी से अब 5 लाख रुपए तक पहुंच चुकी है। उनकी इस सफलता कृषि विभाग ने उन्हें जिला स्तर पर उत्कृष्ट कृषक पुरस्कार से सम्मानित किया।