सरकार ने गुरुवार को कहा कि वह कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के साथ किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 24 घंटे में CJP को जेपी नड्डा के घर या ऑफिस पर बातचीत के लिए 4 बार प्रस्ताव भेजा जा चुका है।
हालांकि, CJP ने कहा है कि सरकार को बात करनी है तो जंतर-मंतर आए या फिर किसी न्यूट्रल जगह पर चर्चा करे। हम किसी के घर या ऑफिस नहीं जाएंगे।
इधर, कॉकरोच जनता पार्टी ने अब 24 जुलाई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है। प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
वहीं दिल्ली यूनिवर्सिटी ने भी अपने स्टूडेंट्स और प्रोफेसर्स को को चेतावनी दी है कि वे जंतर-मंतर न जाएं। उनपर कानूनी कार्रवाई हो सकती है, साथ ही उनके कॅरियर पर भी असर पड़ सकता है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था।
वहीं, इस आंदोलन में शामिल सोनम वांगचुक के अनशन का आज 26वां दिन हैं। मेदांता में भर्ती वांगचुक ने कहा है कि सरकार प्रदर्शनकारियों पर एक्शन न लेने का आश्वासन दे तो मैं अनशन तोड़ दूंगा।
CJP के प्रदर्शन पर सरकार का रुख बदला: पहले सख्ती, अब बातचीत
करीब एक महीने में कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। शुरुआती सख्ती के बाद अब सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। सरकार का रुख कैसे बदला, इसे 5 पॉइंट्स में समझिए-
1. आंदोलन देश भर में फैला: सोनम वांगचुक के अनशन, छात्रों की लगातार मौजूदगी और कई राज्यों से मिले समर्थन ने प्रदर्शन को देशभर में फैला दिया है। 2. जन आंदोलन में तब्दील हो रहा: शुरुआती दिनों में सरकार ने बैरिकेडिंग, हिरासत और मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदियां लगाईं। बाद में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने CJP का समर्थन किया। अब यह जन आंदोलन में बदलता दिख रहा है। 3. संसद मार्च के बाद सरकार का रुख बदला : 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई। पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कई प्रदर्शनकारी और 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए। इसके बाद सरकार बातचीत के लिए तैयार हुई।
4. कांग्रेस के अचानक प्रदर्शन से सरकार घिरी: 21 जुलाई को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों ने प्रधानमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया। केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह को बातचीत करने के लिए भेजा। विपक्ष अब सदन में पेपर लीक और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़ा है। संसद चल नहीं पा रही है। 5. CJP ने नड्डा के घर पर बातचीत से इनकार क्यों किया: 22 और 23 जुलाई को सरकार ने CJP को कई बार औपचारिक बातचीत का प्रस्ताव भेजा, लेकिन बैठक की जगह पर सहमति नहीं बन सकी। पहली बैठक 20 जुलाई को नड्डा के घर हुई थी। यह बेनतीजा रही थी।
- यदि बातचीत फिर नड्डा के घर या ऑफिस में होती, तो प्रदर्शन पर BJP के साथ राजनीतिक बातचीत का ठप्पा लग सकता था।
- CJP प्रदर्शन को लगातार छात्र आंदोलन बता रहा है। ऐसे में वह किसी राजनीतिक दल के दफ्तर में जाकर अपनी निष्पक्ष छवि कमजोर नहीं करना चाहता।
- जंतर-मंतर या किसी न्यूट्रल वेन्यू पर मिलने से यह संदेश जाएगा कि बातचीत बराबरी की स्थिति में हो रही है।