मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर जोर पकड़ रहा है। मौसम विभाग ने बुधवार को बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, नर्मदापुरम और रायसेन में अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। 24 घंटे में इन जिलों में 4 इंच तक बारिश हो सकती है। वहीं देवास, सीहोर, हरदा, बैतूल, पांढुर्णा, सागर, नरसिंहपुर, दमोह, जबलपुर और छतरपुर में भारी बारिश का अनुमान है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, प्रदेश के ऊपर सक्रिय मानसून ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण मजबूत मौसम प्रणाली बनी हुई है। यह सिस्टम ओडिशा, दक्षिण झारखंड और उत्तर छत्तीसगढ़ से होते हुए मध्य प्रदेश के पूर्वी और मध्य हिस्सों में भारी बारिश कराएगा। इसके बाद इसके धीरे-धीरे कमजोर होकर अवदाब और फिर निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना है।
मौसम विभाग ने भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, सतना, शहडोल, धार, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम, मंदसौर, नीमच, विदिशा, राजगढ़, शिवपुरी, मुरैना, भिंड, दतिया, कटनी, मंडला, डिंडौरी, सीधी, सिंगरौली, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी सहित कई जिलों में भी कहीं हलकी तो कहीं तेज बारिश की संभावना जताई है।
इस बीच प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का असर भी दिखने लगा है। ग्वालियर में बुधवार सुबह झमाझम बारिश से लोगों को कई दिनों की गर्मी और उमस से राहत मिली। वहीं बालाघाट में दो दिनों से लगातार बारिश के कारण बीते 24 घंटे में करीब 3 इंच पानी गिरा। इससे दैतबर्रा-मंगलेगांव पुल, टोंडिया नाला और थानेगांव का नाला उफान पर आ गए। सुरक्षा के मद्देनजर कई मार्गों पर आवागमन रोक दिया गया, लेकिन कुछ लोग अब भी जान जोखिम में डालकर नाले पार कर रहे हैं। टोंडिया नाले का पानी एक ढाबे में भी घुस गया।
कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक धर्मेंद्र अगासे ने बताया कि 30 जुलाई को भी जिले में बहुत भारी बारिश, बिजली, आंधी-तूफान और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है।
बारिश की तस्वीर सुधरने की उम्मीद मौसम विभाग के अनुसार, अब तक प्रदेश में औसत 13.6 इंच (345.9 मिमी) बारिश हुई है, जबकि 16.5 इंच (418.4 मिमी) पानी गिर जाना था। इस तरह 2.9 इंच यानी, 17 प्रतिशत बारिश कम हुई है। दूसरी ओर, पूर्वी हिस्से में 18 प्रतिशतऔर पश्चिमी हिस्से में 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। लगातार बारिश होने से यह तस्वीर सुधर सकती है।
नए सिस्टम का असर 1 अगस्त तक असर मौसम एक्सपर्ट नायक ने बताया कि वर्तमान में एक्टिव सिस्टम का असर 1 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान कई जिलों में अति भारी बारिश भी हो सकती है।
इन 47 जिलों में औसत से कम बारिश अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा।
वहीं, 8 जिले- भोपाल, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, मंदसौर, राजगढ़ और सीहोर में औसत से ज्यादा पानी गिर चुका है। देवास में 29% बारिश ज्यादा हुई है।
जून के बाद जुलाई में भी आंकड़ा कम चल रहा मौसम विभाग के अनुसार, जून में कम बारिश हुई, लेकिन जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। बाद में लगातार 9 दिन से तेज बारिश नहीं होने से लगातार चौथे दिन से आंकड़ा माइनस में आ गया है। बता दें कि इस महीने पूरे मानसून की एक तिहाई बारिश का ट्रेंड है। जैसे- भोपाल में 39 इंच सामान्य बारिश है तो 14 इंच बारिश जुलाई में होती है। बड़े शहरों में जबलपुर ही ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा 17 इंच से ज्यादा बारिश होती है। जुलाई के महीने में ही प्रदेश में कोटे की 40 प्रतिशत तक बारिश होती है।
प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है।
जुलाई में MP के 5 बड़े शहरों में ऐसा ट्रेंड
इंदौर में 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश का रिकॉर्ड इंदौर की बात करें तो 24 घंटे में 11.5 इंच बारिश होने का रिकॉर्ड है, जो 27 जुलाई 1913 में हुई थी। वर्ष 1973 को पूरे महीने 30.5 इंच पानी गिरा था। बारिश के चलते यहां भी तापमान में गिरावट देखने को मिलती है।
इंदौर में महीने की एवरेज बारिश 12 इंच है। एवरेज 13 दिन यहां बारिश होती है।
भोपाल में 41 इंच बारिश का रिकॉर्ड राजधानी भोपाल में जुलाई में खूब बारिश होती है। यहां एक ही महीने में 1031.4 मिमी यानी 41 इंच के करीब बारिश होने का रिकॉर्ड है। यह साल 1986 को हुई थी। 22 जुलाई 1973 को एक ही दिन में 11 इंच बारिश हुई थी, जो अब तक का रिकॉर्ड है।
भोपाल में बारिश के दिनों की बात करें तो जुलाई महीने में एवरेज 15 दिन बारिश होती है। यानी, हर दूसरे दिन पानी बरसता है। महीने की एवरेज बारिश 367.7 मिमी यानी 14.4 इंच है। बारिश के चलते दिन का तापमान 30 और रात में पारा 25 डिग्री से कम रहता है।
जबलपुर में सबसे ज्यादा बारिश होने का रिकॉर्ड चारों बड़े शहरों में जबलपुर ऐसा है, जहां सबसे ज्यादा बारिश होती है। वर्ष 1930 में करीब 45 इंच पानी बरसा था, जबकि 30 जुलाई 1915 को 24 घंटे की सर्वाधिक 13.5 इंच बारिश हुई थी। पिछले साल जुलाई में 13 इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। 2013 और 2016 में सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी।
जबलपुर में जुलाई की सामान्य बारिश 17 इंच है। महीने में 15 से 16 दिन पानी बरसता है।
ग्वालियर में 6 बार 8 इंच से कम बारिश भोपाल, इंदौर और जबलपुर की तुलना में ग्वालियर में सबसे कम बारिश होती है। पिछले 10 साल में 6 बार ऐसा हुआ, जब 8 इंच से कम पानी गिरा हो, जबकि यहां की एवरेज बारिश 9 इंच के करीब है। ग्वालियर में वर्ष 1935 में महीने की सबसे ज्यादा बारिश हुई थी। तब 623.3 मिमी यानी 24.5 इंच बारिश दर्ज की गई थी।
24 घंटे में सबसे ज्यादा बारिश की बात करें तो 12 जुलाई 2015 में 190.6 मिमी यानी साढ़े 7 इंच पानी बरसा था। ग्वालियर में जुलाई के महीने में एवरेज 11 दिन बारिश होती है।
उज्जैन में जमकर होती है बारिश प्रदेश के अन्य शहरों की तरह उज्जैन में भी जुलाई में जमकर बारिश होती है। कोटे की करीब 40 प्रतिशत बारिश इसी महीने हो जाती है।