राजस्थान के सरकारी हॉस्पिटल्स में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। भीलवाड़ा के महात्मा गांधी हॉस्पिटल में बुधवार (29 जुलाई) देर रात दो और प्रसूताओं की मौत हो गई।
डॉक्टर्स का कहना है कि दोनों की नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। किसी भी तरह की हाई रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में नहीं थीं। डिलीवरी के बाद हुई ज्यादा ब्लीडिंग के कारण उनकी मौत हुई है।
जिले के सबसे बड़े हॉस्पिटल में जुलाई महीने में ही अलग-अलग कारणों से 7 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इससे पहले मई में कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत हुई थी।
जून में बीकानेर में सिजेरियन के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई थी। दो की इलाज के दौरान मौत हुई थी।
शाहपुरा से रेफर हुई सुगना, हीमोग्लोबिन 1.8 ग्राम रह गया
जिले की कोटड़ी निवासी सुगना मोहन बैरवा (22) की बुधवार रात शाहपुरा (भीलवाड़ा) जिला हॉस्पिटल में नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। परिजनों का दावा है कि कुछ देर बाद उसका ब्लड प्रेशर गिर गया। उसे शाहपुरा से महात्मा गांधी हॉस्पिटल के आईसीयू में रेफर किया गया, जहां कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। हॉस्पिटल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (PMO) डॉ. अरुण गौड़ ने बताया ज्यादा ब्लीडिंग के कारण सुगना का हीमोग्लोबिन 10 ग्राम से घटकर सिर्फ 1.8 ग्राम रह गया था।
दूसरा केस
रानी की भी नॉर्मल डिलीवरी हुई, लेकिन ऑपरेशन का मौका नहीं मिला
दूसरा मामला भीलवाड़ा शहर के पटेल नगर निवासी रानी भूरा बंजारा (18) का है। उसकी भी एमजी अस्पताल में नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। प्रसव के बाद अचानक अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। ऐसे केस में पहले दवाओं से रक्तस्राव रोकने की कोशिश की जाती है और जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन कर गर्भाशय निकालना पड़ता है, लेकिन इस मामले में ऑपरेशन का समय ही नहीं मिल पाया।
दोनों मौतों की होगी जांच
सीएमएचओ संजीव शर्मा ने बताया – दोनों मृतक महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी में नहीं थीं और प्रसव के बाद अचानक जटिलताएं सामने आईं।
प्रसव होने के बाद निगरानी और आपातकालीन उपचार की व्यवस्थाएं होने के बावजूद मौतें क्यों हुईं, इसकी जांच की जा रही है। दोनों मामलों की केस हिस्ट्री, सोनोग्राफी रिपोर्ट और मौत के कारणों की जांच की जाएगी।
23 फीसदी प्रेग्नेंट महिला हाई रिस्क कैटेगरी में
भीलवाड़ा जिले में हाल ही में विशेष स्क्रीनिंग अभियान में एक सप्ताह के दौरान 2210 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें 500 महिलाएं हाई रिस्क कैटेगरी में हैं।
इनमें गंभीर एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर, शुगर, हार्ट और किडनी की बीमारी, पूर्व सिजेरियन, जुड़वां गर्भ और अन्य गंभीर चिकित्सीय स्थितियां शामिल हैं। हालांकि, हाल ही में जिन महिलाओं की मौत हुई, उनमें कई हाई रिस्क कैटेगरी में नहीं थीं।
3 महीने में 16 की मौत
इससे पहले मई में कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत हुई थी। जून में बीकानेर में सिजेरियन के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी फेल हो गई थी। दो की इलाज के दौरान मौत हुई थी। वहीं, जुलाई में भीलवाड़ा के अलावा बांसवाड़ा में भी दो प्रसूताओं की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
- फेरी देवी स्त्री रोग की मरीज थीं, गर्भवती नहीं थीं। उन्हें 30 जून को भर्ती किया गया और 1 जुलाई को ऑपरेशन हुआ। 7 जुलाई को उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने मौत का कारण मायोकार्डियल इंफार्क्शन (हार्ट अटैक) बताया है।
- शिमला गुर्जर प्रसूता थीं और 5 जुलाई को अस्पताल में भर्ती हुई थीं। वह रेफर केस थीं। उनका ऑपरेशन नहीं हुआ। 7 जुलाई को उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने गंभीर एनीमिया समेत अन्य बीमारियों को मौत का कारण बताया है।
- ईशा पांडे भी प्रसूता थीं। उन्हें 5 जुलाई को अस्पताल लाया गया। 6 जुलाई को ऑपरेशन हुआ और 8 जुलाई को उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने मौत का कारण पल्मोनरी थ्रोम्बोएम्बोलिज्म बताया है।
- दिव्या सेन को 7 जुलाई को प्रसूता के रूप में अस्पताल में भर्ती किया गया। उसी दिन उनका ऑपरेशन भी हुआ। वह रेफर केस थीं। 9 जुलाई को उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने मौत का कारण ब्लड प्रेशर से जुड़ी परेशानी और अन्य कारण बताए हैं।
- संगीता जीनगर को 9 जुलाई को गर्भावस्था के दौरान अस्पताल में भर्ती किया गया। उसी दिन उनका ऑपरेशन हुआ। अगले दिन 10 जुलाई को उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने अधिक ब्लीडिंग (हैवी ब्लीडिंग) को मौत का कारण माना है।