झज्जर जिले में लगातार हो रही बारिश अब जनजीवन के साथ कारोबार को भी प्रभावित करने लगी है। बारिश के चलते जमीन का चोंवा ऊपर आने से झज्जर शहर की आरा मशीनों पर संकट खड़ा हो गया है। शहर में संचालित करीब 10 आरा मशीनों की खाइयों में करीब एक फीट तक पानी भर गया है। पानी के कारण मशीनों के चक्के तक डूब गए हैं और लकड़ी की चिराई का काम ठप हो गया है।
आरा मशीन संचालक मोटर पंप लगाकर पानी निकालने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन लगातार बारिश और चोंवा ऊपर आने के कारण पानी दोबारा भर जा रहा है। ऐसे में मशीनों का संचालन करना मुश्किल हो गया है। कारोबारियों का कहना है कि यदि जल्द जल निकासी की व्यवस्था नहीं हुई तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
रोजाना 700 किलो लकड़ी की कटाई प्रभावित
स्थानीय कारोबारियों के अनुसार, एक आरा मशीन पर प्रतिदिन औसतन करीब 700 किलो लकड़ी की कटाई होती है। यहां से तंदूरी गुटका, चिरान लकड़ी और ईंधन के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी दुकानदारों और ग्राहकों तक पहुंचती है। मशीनें बंद होने के कारण लकड़ी की सप्लाई भी प्रभावित हुई है।
मशीन की खाई में पानी, चक्का तक डूबा
आरा मशीन संचालक मुकेश जांगड़ा, श्रीकृष्ण उर्फ भोली, लोकेश जांगड़ा, श्याम लाल, कालू पंडित और रामधारी ने बताया कि मंगलवार से चोंवा ऊपर आने के कारण मशीनों में पानी भरना शुरू हो गया। मशीन की खाई में करीब एक फीट पानी जमा है और मशीन का चक्का भी पानी में डूब गया है।
संचालकों का कहना है कि मोटर पंप से लगातार पानी निकाला जा रहा है, लेकिन बारिश और जमीन से निकल रहे पानी के कारण राहत नहीं मिल रही। इससे मशीनें चलाना पूरी तरह असंभव हो गया है।
दुकानों से लेकर होटलों तक सप्लाई प्रभावित
आरा मशीनों का कारोबार बंद होने का असर लकड़ी खरीदने वाले दुकानदारों पर भी पड़ रहा है। तंदूरी दुकानों, ईंट-भट्टों, होटलों और ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन के लिए लकड़ी की मांग रहती है। आरा मशीनों से आपूर्ति बाधित होने के कारण कई दुकानदारों को पुराने स्टॉक पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
कारोबारियों का कहना है कि पुराना स्टॉक कुछ दिनों तक ही चल पाएगा। यदि बारिश का दौर जारी रहा और मशीनें चालू नहीं हुईं तो लकड़ी की सप्लाई और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
हर साल सामने आती है समस्या, स्थायी समाधान की मांग
आरा मशीन संचालकों ने प्रशासन से चोंवा और बारिश के पानी की निकासी के लिए तत्काल व्यवस्था करने की मांग की है। कारोबारियों का कहना है कि जलभराव की समस्या हर साल बारिश के दौरान सामने आती है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
उनका कहना है कि यदि मशीनों के आसपास जल निकासी की उचित व्यवस्था कर दी जाए, तो बारिश के दौरान कारोबार को इस तरह ठप होने से बचाया जा सकता है।