जोधपुर के पूर्व महाराजा गजसिंह के नाम पर दर्ज संपत्तियों और जमीनों को हड़पने की नीयत से फर्जी इकरारनामे तैयार कर लिए गए। कोर्ट-कचहरी के मुकदमों की पैरवी के लिए 2015 में जारी किए आम मुखत्यारनामे (पावर ऑफ अटॉर्नी) का गलत इस्तेमाल कर सैकड़ों बीघा जमीन का फर्जी बेचाननामा तैयार कर कर लिया गया।
पूर्व महाराजा गजसिंह के आम मुखत्यार डॉ. महेंद्र सिंह तंवर निवासी हनुवंत-ए BJS कॉलोनी की रिपोर्ट पर उदयमंदिर थाने में बुधवार को धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
शिकायत के अनुसार- पूर्व महाराजा गजसिंह ने 15 अक्टूबर 2015 को दिवंगत दिलीप सिंह पुत्र स्व. तेज सिंह निवासी नादड़ी (जोधपुर) को विभिन्न कोर्ट में दीवानी, फौजदारी, राजस्व, ट्रिब्यूनल, इनकम टैक्स आदि में मुकदमों की पैरवी के लिए आम मुखत्यार नियुक्त किया था।
डॉ. तंवर का आरोप है कि इस मुखत्यारनामे में स्पष्ट लिखा था कि यह केवल कोर्ट कार्य और पैरवी के लिए है। इसमें पूर्व महाराजा गजसिंह की किसी भी संपत्ति को बेचने या बेचान इकरारनामा करने की कोई पावर नहीं दी गई थी।
मौत के बाद स्टाम्प ड्यूटी जमा कराकर जमीन हड़पने की कोशिश
हाल ही में जब दस्तावेजों की समीक्षा की गई तो सामने आया कि आरोपियों ने स्व. दिलीप सिंह के साथ मिलीभगत कर महाराजा गजसिंह की संपत्तियों को हड़पने की नीयत से फर्जी बेचान इकरारनामे तैयार कर लिए।
दिलीप सिंह की मौत के बाद आरोपी कमल कंवर, ऊषा कंवर, कैलाश कंवर, प्रियंका कंवर, जेठाराम, भवानी सिंह, दमयंती, गणपतलाल, रविंद्र गौड़ और भरत कुमार ने उप-महानिरीक्षक, पंजीयन व मुद्रांक वृत्त पाली-जोधपुर के सामने 10 साल पुराने बेचान इकरारनामों पर मुद्रांक शुल्क जमा कराने के लिए आवेदन किया।
शिकायत के अनुसार बिना रजिस्ट्री कराए सालों बाद मुद्रांक शुल्क जमा कराने की यह कोशिश फर्जी दस्तावेजों को असली रूप में इस्तेमाल करने की साजिश का हिस्सा थी। शिकायत में पाली की सोजत तहसील और जोधपुर की करोड़ों रुपए की सैकड़ों बीघा जमीन का ब्योरा दिया गया है।